AAP के 2/3 सांसदों ने BJP में विलय का निर्णय लिया है: राघव चड्ढा
मैं सही इंसान था, लेकिन गलत पार्टी में था: राघव चड्ढा
मैंने अपनी ज़िंदगी के 15 साल दिए, लेकिन पार्टी अपनी आत्मा खो चुकी है: राघव चड्ढा ने छोड़ी AAP
राघव चड्ढा BJP में शामिल, 6 सांसद भी साथ आए
सिद्धांतों पर बनी पार्टी अब उनसे दूर जा चुकी है: राघव चड्ढा ने AAP छोड़ी
राघव चड्ढा बोले — मैं उनके अपराधों और गलत कार्यों का हिस्सा नहीं बनना चाहता
राघव चड्ढा बोले — यह वह पार्टी नहीं है जिसे हमने बनाया था
एक व्यक्ति गलत हो सकता है, लेकिन सब गलत नहीं हो सकते: AAP पर राघव चड्ढा का अंतिम प्रहार
राष्ट्रहित में लिया फैसला, BJP में शामिल होंगे राघव चड्ढा
जनसेवा मेरा धर्म है — राजनीतिक दल कोई भी हो, सेवा जारी रहेगी: राघव चड्ढा
Babushahi Network
नई दिल्ली, भारत
24 अप्रैल, 2026
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एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आज आम आदमी पार्टी से अपने इस्तीफे की घोषणा की, जिससे पार्टी के साथ उनका 15 वर्षों का सफर समाप्त हो गया। राघव चड्ढा, 6 अन्य सांसदों के साथ, औपचारिक रूप से राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी में विलय कर चुके हैं।
इस निर्णय को “बेहद कठिन लेकिन अपरिहार्य” बताते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी के सबसे महत्वपूर्ण वर्ष — अपनी युवावस्था, ऊर्जा और समर्पण — ईमानदारी, पारदर्शिता और जनसेवा पर आधारित एक राजनीतिक आंदोलन को खड़ा करने में लगाए।
पार्टी अपने मूल मूल्यों से भटक चुकी है
राघव चड्ढा ने कहा कि AAP अपने स्थापना के सिद्धांतों से पूरी तरह दूर जा चुकी है। जो पार्टी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जन्मी थी, जिसने स्वच्छ राजनीति और जवाबदेही का वादा किया था, वह आज उन आदर्शों से बहुत दूर जा चुकी है।
राघव चड्ढा ने कहा, “मैं उनके अपराधों और गलत कार्यों का हिस्सा नहीं बनना चाहता।”
उन्होंने कहा कि जिन मूल्यों, सिद्धांतों और नैतिक दिशा ने कभी पार्टी को परिभाषित किया था, वे समय के साथ कमजोर पड़ गए हैं, जिससे संगठन के भीतर गहरी निराशा पैदा हुई है।
अपने व्यक्तिगत संघर्ष का ज़िक्र करते हुए चड्ढा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से वे भीतर ही भीतर असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा, “काफी समय से मुझे लग रहा था कि मैं सही इंसान हूं, लेकिन गलत पार्टी में हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने जानबूझकर पार्टी की सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी, क्योंकि वे पार्टी की दिशा से स्वयं को जोड़ नहीं पा रहे थे और उसके अपराधों तथा गलत प्रथाओं का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे।
राघव चड्ढा ने भावुक होते हुए कहा कि वे आज “दुखी, आहत और बेहद निराश” हैं कि जिस आंदोलन पर उन्होंने विश्वास किया, उसका यह रूप देखना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, “जो पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ बनी थी, वही आज समझौतों में फंसी हुई दिखाई देती है। यह सिर्फ मेरी चिंता नहीं है, यह उन हजारों कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों की भावना है जो उम्मीद और आदर्शवाद के साथ जुड़े थे।”
उन्होंने कहा कि कई समर्पित सदस्य पार्टी छोड़ चुके हैं और कई अन्य अपने भविष्य पर पुनर्विचार कर रहे हैं।
संस्थापक सदस्य के रूप में राघव चड्ढा ने दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों में पार्टी को खड़ा करने और विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उनका सफर कभी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का नहीं था।
राजनीति में आने से पहले उनका एक सफल पेशेवर करियर था और वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय थे। उन्होंने कहा, “मैं राजनीति में करियर बनाने नहीं आया था। मैं देशसेवा और भ्रष्टाचार मुक्त भारत के निर्माण के लिए आया था।”
वर्तमान समय को एक निर्णायक मोड़ बताते हुए चड्ढा ने कहा कि उनके सामने दो रास्ते थे — या तो राजनीति छोड़ दें, या फिर किसी नए मंच से सकारात्मक बदलाव के लिए कार्य करें।
दूसरा रास्ता चुनते हुए उन्होंने जनसेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
राघव चड्ढा ने कहा कि वे अपने कई समान विचारधारा वाले साथियों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे। उन्होंने श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और हाल के वर्षों में भारत की तेज़ प्रगति को अपने निर्णय का प्रमुख कारण बताया।
उन्होंने कहा, “भारत आज वैश्विक मंच पर पहले से अधिक मजबूत है और एक प्रमुख आर्थिक शक्ति बनकर उभर रहा है। मुझे विश्वास है कि देश के लिए सार्थक योगदान देने का यह सही मंच है।”
चड्ढा ने कहा कि जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं आया है।
उन्होंने कहा, “हम जनता की सेवा के लिए चुने जाते हैं, किसी पार्टी की सेवा के लिए नहीं। राजनीतिक परिवर्तन से यह जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।”
उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे आम नागरिकों के मुद्दे, सुशासन, जवाबदेही और जनकल्याण के लिए लगातार आवाज़ उठाते रहेंगे।
अपने वक्तव्य के अंत में राघव चड्ढा ने कहा, “एक व्यक्ति गलत हो सकता है, दो व्यक्ति गलत हो सकते हैं, लेकिन सब गलत नहीं हो सकते। जब बड़ी संख्या में समर्पित लोग एक जैसी भावना रखने लगें, तो उनकी आवाज़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने कहा कि इन 7 सांसदों में विश्व प्रसिद्ध क्रिकेटर, पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्व, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और अन्य सम्मानित हस्तियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी सांसदों का निर्णय नैतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पार्टी और सांसदों के संबंध पर बोलते हुए चड्ढा ने कहा, “अगर पार्टी ने हमें मंच दिया, तो हम 7 सांसदों ने भी पार्टी को बहुत कुछ दिया। AAP ने हमें जिम्मेदारियां दीं, और बदले में मैंने अपना सब कुछ AAP को दिया। मैंने AAP की पहचान और माहौल बनाने में भूमिका निभाई।”
उन्होंने सवाल उठाया, “हमें जनता के लिए चुना गया है — तो क्या मैं जनता के लिए काम करना बंद कर दूं?”
अपने ही सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे देशसेवा जारी रखेंगे और राष्ट्रहित में आगे बढ़ते रहेंगे।
राघव चड्ढा ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पूरे निर्णय का कानूनी और नैतिक आधार संविधान है, और उठाया गया हर कदम संवैधानिक प्रावधानों तथा लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप है।
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