Himachal Road Accidents : 532 सड़क हादसों में 248 ने गंवाई जान, जनवरी से मार्च तक बढ़ी दुर्घटनाएं; शाम छह से रात नौ बजे तक ज्यादा हादसे
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 27 अप्रैल 2026 : प्रदेश में तीन माह में 532 सड़क हादसों में 248 लोगों ने जान गवाई है, जबकि 839 लोग घायल हुए हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष जनवरी से मार्च माह में सड़क हादसों और उनमें मरने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है।
गत वर्ष की बात करें तो वर्ष 2025 में जनवरी से मार्च माह में 410 सड़क हादसों में 166 लोगों की मौत हुई थी और 547 लोग घायल हुए थे। प्रदेश में बढ़ रहे सड़क हादसों को कम करने के लिए ट्रैफिक टूरिस्ट रेलवे पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। राज्य भर में ईडार प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू कर दिया गया है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से दुर्घटनाओं का न केवल पंजीकरण होगा, बल्कि उनके कारणों और पैटर्न का वैज्ञानिक विश्लेषण कर समय रहते रोकथाम भी की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश में जनवरी से मार्च माह तक तीन महीने में हिमाचल प्रदेश में विभिन्न जगहों पर पेश आए 532 सड़ हादसों में 248 लोगों ने जान गवाई है।
इसके अलावा 839 लोग इन सडक़ हादसों में घायल हुए हैं। डीआईजी टीटीआर संजीव गांधी ने कहा कि ईडार केवल रिपोर्टिंग का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर वहां पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करता है।
प्रदेश में शाम 6 से 9 बजे तक डेंजर विंडो घोषित की गई है, इस समय सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। ट्रैफिक, टूरिस्ट एवं रेलवे विंग के डीआईजी संजीव गांधी ने बताया कि वैज्ञानिक अध्ययन में शाम छह से नौ बजे का समय सबसे अधिक जोखिम वाला पाया गया है। इस दौरान ट्रैफिक दबाव, कम दृश्यता और चालकों की थकान हादसों की बड़ी वजह बनती है। इसी कारण इस समयावधि में राजमार्गों पर विशेष इंटरसेप्टर वाहन और अतिरिक्त गश्ती दल तैनात किए गए हैं।
दुर्घटनाएं रोकने को योजना
तकनीक, सख्ती और सुधार, शाम छह से नौ बजे तक सघन पुलिस गश्त, स्पीड कैमरों और अल्को-सेंसर से निगरानी, अवैध पार्किंग पर तुरंत कार्रवाई, खतरनाक पहाड़ी मोड़ों पर हाई-विजिबिलिटी साइन बोर्ड, सुरक्षित ड्राइविंग का संदेश, आज सतर्क, तो कल सुरक्षित, सतर्क रहें आज, जीवित रहें कल, रफ्तार रोमांच देती है, पर जान भी ले सकती है, धीरे चलें, पहाड़ गलतियां माफ नहीं करते लगाए गए हैं। (SBP)
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