लंदन में आयोजित विश्व के सबसे बड़े आईवीएफ सम्मेलन में पटियाला की डॉ. मोनिका वर्मा ने प्रस्तुत किया महत्वपूर्ण शोध
पटियाला, 10 जुलाई:
सद्भावना मेडिकल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट, पटियाला की आईवीएफ एवं बांझपन रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका वर्मा ने यूरोपियन सोसाइटी ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्शन एंड एम्ब्रायोलॉजी (ईएसएचआरई) द्वारा लंदन में आयोजित 42वें वार्षिक सम्मेलन में आईवीएफ क्षेत्र से संबंधित अपना महत्वपूर्ण क्लीनिकल शोध प्रस्तुत कर पटियाला और पंजाब का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
डॉ. मोनिका वर्मा के शोध का मुख्य उद्देश्य पहले आईवीएफ चक्र की सफलता दर में वृद्धि करना था, ताकि बांझपन से जूझ रहे दंपतियों के लिए गर्भधारण की संभावनाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
अध्ययन के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि भले ही अल्ट्रासाउंड और अन्य नियमित जांचों में गर्भाशय सामान्य दिखाई देता हो, फिर भी हिस्टेरोस्कोपी के बाद की गई उन्नत जांचों के माध्यम से लगभग 20 प्रतिशत मरीजों में गर्भाशय की आंतरिक परत में लंबे समय से मौजूद संक्रमण (क्रॉनिक एंडोमेट्राइटिस) की पहचान हुई। शोध में पाया गया कि पहले आईवीएफ चक्र से पूर्व इस संक्रमण का उपचार किए जाने पर आईवीएफ की सफलता दर तथा गर्भधारण की संभावना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
आईवीएफ उपचार की सफलता दर में सुधार तथा मरीजों को अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की संभावनाओं के कारण इस शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना प्राप्त हुई।
डॉ. मोनिका वर्मा पिछले लगातार आठ वर्षों से ईएसएचआरई के वार्षिक सम्मेलनों में अपना शोध प्रस्तुत करती आ रही हैं, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम की मेहनत और समर्पण को देते हुए विशेष रूप से प्रसिद्ध एम्ब्रायोलॉजिस्ट डॉ. सरबप्रीत सिंह के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ. सरबप्रीत सिंह ने गुणवत्ता तथा मरीजों की देखभाल के अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. मोनिका वर्मा ने कहा कि मरीजों का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा और कार्य करने की शक्ति है।
डॉ. मोनिका वर्मा और डॉ. सरबप्रीत सिंह संयुक्त रूप से सद्भावना आईवीएफ स्कूल तथा फर्टिलिस अकादमी का संचालन भी कर रहे हैं। यह संस्थान देश-विदेश के विद्यार्थियों के लिए आईवीएफ के क्षेत्र में अकादमिक शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।
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