Himachal: कुल्लू में कांग्रेस कार्यकारिणी के 20 महासचिव, 80 सदस्यों की टीम, पर चंदा चोरी प्रदर्शन में नहीं जुटे लोग, विधायक भी नहीं दिखे
बाबूशाही ब्यूरो
कुल्लू: 15 जुलाई 2026: श्रीराम मंदिर चंदा चोरी को लेकर प्रदर्शन के मामले में जिला कांग्रेस एक तरह से बैक फुट पर आ गई है। अढ़ाई साल बाद कांग्रेस पार्टी की जिला कार्यकारिणी का गठन हुआ है। उसी के तहत कुल्लू जिला में भी कांग्रेस की जंबो कार्यकारिणी बनाई गई, जिसमें 20 महासचिवों सहित लगभग 80 पदाधिकारी नियुक्त हुए हैं।
लेकिन शर्मनाक स्थिति यह रही कि जंबो कार्यकारिणी गठन के बाद आयोजित पहले प्रदर्शन में कांग्रेस संगठन की हवा निकल गई। राम मंदिर चंदा चोरी के मसले पर आयोजित कांग्रेस पार्टी के इस प्रदर्शन में महज 40-50 पदाधिकारी कार्यकर्ता ही शामिल रहे। इतना ही नहीं बल्कि कांग्रेस के दोनों विधायक भी इस प्रदर्शन से नदारद रहे।
जबकि 80 पदाधिकारियों की फ़ौज में से भी महज चंद पदाधिकारी ही इस प्रदर्शन में शामिल हुए। जिससे साफ है कि कांग्रेस संगठन की स्थिति बेहद ही दयनीय है। सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता धरना प्रदर्शनों से दूरी बनाए हुए हैं। जबकि राम मंदिर चंदा चोरी का मामला देश भर में एक शर्मनाक मसले के तौर पर देखा जा रहा है।
सियासी पंडितों की माने तो अगर राम मंदिर चंदा चोरी में कांग्रेस के पदाधिकारी या कोई नेता शामिल होता तो उसके खिलाफ भाजपा द्वारा गांव गांव तक आंदोलन किए जाते। लेकिन इन मामलों में कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता पूरी तरह से फिस्सडी साबित होते हैं। यही पिछले दिन कुल्लू में भी हुआ। राम मंदिर चंदा चोरी के मसले पर निकाले गए जुलूस में मात्र 40-50 लोग ही शामिल हो पाए।
गौरतलब है कि लगभग अढ़ाई साल बाद जिला कार्यकारिणी का गठन हुआ है। जिसमें लगभग 80 पदाधिकारी शामिल है। अगर इस धरना प्रदर्शन में वह 80 पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्य भी शामिल हो जाते तो निश्चित तौर पर संख्या बल भी बढ़ता और कांग्रेस पार्टी की लाज भी रह जाती। लेकिन अधिकतर पदाधिकारियों ने इससे दूरी बनाए रखी। वहीं, इस प्रदर्शन में स्थानीय विधायक भी शामिल नहीं हुए, जबकि वह जिला मुख्यालय पर ही मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि इस प्रदर्शन से पूर्व 13 जुलाई को प्रदर्शन की तैयारी के लिए आयोजित बैठक में इससे ज्यादा नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे। लेकिन 14 जुलाई को हुए प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ता व नेताओं ने शामिल होने में कतई रुचि नहीं दिखाई, जिससे यह प्रदर्शन लगभग पूरी तरह से फ्लॉप रहा।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगर कार्यकारिणी के गठन के प्रारंभ में ही कांग्रेस के पदाधिकारियों में इस तरह के आयोजनों में रुचि नहीं है तो आने वाले समय में वह विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को किस तरह से जन-जन तक पहुंच जाएंगे और किस तरह से भाजपा का मुकाबला कर पाएंगे।
सियासी जानकारों की माने तो कांग्रेस संगठनात्मक तौर पर पूरी तरह से बिखर चुकी है। कार्यकर्ताओं की किसी भी स्तर पर पूछ नहीं हो रही है। जिसकी वजह से कार्यकर्ताओं में घोर निराशा है और वह पार्टी के इस तरह के आयोजनों से लगातार दूरी बने हुए हैं। जिसका खामियाजा कांग्रेस पार्टी को आने वाले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। (SBP)
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