छत्रपति मर्डर: राम रहीम के बरी होने के बाद डेरा प्रेमियों में खुशी का माहौल
अशोक वर्मा
बठिंडा, 7 मार्च, 2026: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आज हरियाणा के सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया, जिसके बाद डेरा के समर्थकों में खुशी का माहौल है। हालांकि डेरा प्रेमी इस मामले में जश्न मनाने से दूर दिखे, लेकिन वे एक-दूसरे को पर्सनली बधाई दे रहे हैं। आज भी कई डेरा भक्तों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि यह सच्चाई की जीत है। उन्होंने कहा कि डेरा प्रमुख द्वारा किसी की हत्या करवाना तो दूर, वे ऐसा सोच भी नहीं सकते। उन्होंने दावा किया कि डेरा प्रमुख को एक गहरी साज़िश के तहत फंसाया गया था।
इस मर्डर के बारे में जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक CBI छत्रपति मर्डर केस में हाई कोर्ट द्वारा मांगे गए सबूत पेश करने में नाकाम रही है। डेरा चीफ के वकील ने दलील दी कि राम रहीम को सिर्फ इस आधार पर दोषी ठहराया गया कि उसकी पत्रकार रामचंद्र छत्रपति से पर्सनल दुश्मनी थी। मृतक पत्रकार छत्रपति 'पूरा सच' नाम का एक शाम का अखबार निकालते थे, जिसमें डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ खबरें छपती थीं। वकील ने कहा कि CBI एक भी सबूत पेश नहीं कर पाई कि राम रहीम ने कभी रामचंद्र छत्रपति का अखबार पढ़ा था या नहीं। छत्रपति अपने अखबार में वही खबरें छापते थे जो सुबह के अखबारों में पहले ही छप चुकी होती थीं। इसलिए, अपील करने वाले की छत्रपति से पर्सनल दुश्मनी होने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
कोर्ट ने इस केस में सबसे अहम सबूत मानी जा रही सीलबंद गोली की फोरेंसिक जांच और उस पर किसी के साइन न होने जैसे पहलुओं पर भी सवाल उठाए हैं। बचाव पक्ष ने हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस शीलू नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की बेंच के सामने दलील दी कि पोस्टमॉर्टम के दौरान छत्रपति के शरीर में मिली गोली सील थी और कोर्ट में खोले जाने तक सील ही रही। इससे यह सवाल उठता है कि जब सीलबंद डिब्बा खुला ही नहीं था, तो फोरेंसिक एक्सपर्ट ने गोली की जांच और साइन कैसे किए। जब कोर्ट ने गोली की जांच की, तो फोरेंसिक एक्सपर्ट के निशान और साइन नहीं दिखे। इससे कोर्ट के लिए यह मानना मुश्किल हो गया कि गोली असली है जो पत्रकार के शरीर से निकली थी। इस तरह फोरेंसिक जांच ही शक के दायरे में आ गई। खट्टा सिंह का बयान भी बना आधार कोर्ट ने राम रहीम के ड्राइवर खट्टा सिंह के बयान में बार-बार बदलाव का भी जिक्र किया है। खट्टा सिंह ने 2007 में CBI को बयान दिया था कि इस हत्या की साजिश उसके सामने रची गई थी, जबकि वही खट्टा सिंह 2012 में CBI की स्पेशल कोर्ट के सामने अपने बयान से पलट गया था। अगस्त 2017 में राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद 2018 में एक बार फिर सामने आए खट्टा सिंह ने कहा कि उसने डर के मारे अपना बयान वापस ले लिया था। इस प्रक्रिया पर कोर्ट ने कहा कि ऐसे गवाह की गवाही पर फैसला नहीं दिया जा सकता। जांच की टूटी चेन की वजह से बरी
कानूनी जानकारों का कहना है कि कानून का सिद्धांत यह है कि जब तक आरोप बिना शक के साबित न हो जाए, तब तक सज़ा नहीं दी जा सकती। इस मामले में पहले चालान में नाम न होने, गवाहों के बयान बदलने और फोरेंसिक सबूतों में कन्फ्यूजन की वजह से केस कमजोर हो गया। इसी बेनिफिट ऑफ डाउट की वजह से हाई कोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया है।
छत्रपति मर्डर केस
आपको बता दें कि 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा के पूरा सच अखबार के एडिटर रामचंद्र छत्रपति को उनके घर से बुलाकर गोली मार दी गई थी। घायल छत्रपति को इलाज के लिए हॉस्पिटल लाया गया था, जहां 21 नवंबर 2002 को उनकी मौत हो गई थी। CBI की स्पेशल कोर्ट ने इस मर्डर केस में जनवरी 2019 में डेरा चीफ को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाई कोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया है, जबकि बाकी तीनों की सजा बरकरार रखी है। सुनारिया जेल में बंद डेरा चीफ अभी एक दूसरे केस में अपनी सजा काट रहे हैं।
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