मजदूर के बेटे ने रचा इतिहास: तौसीफ अहमद गनी बने पुलवामा जिले के पहले IAS अधिकारी
गांव पहुँचने पर हुआ भव्य स्वागत; खुशी से छलक उठीं ग्रामीणों की आँखें, फूलों की वर्षा और ढोल-नगाड़ों से गूंजी गलियां
पुलवामा (दक्षिण कश्मीर): 8 मार्च 2026- दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के लिए आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। अक्सर तनावपूर्ण खबरों के लिए चर्चा में रहने वाले इस क्षेत्र की गलियां आज जश्न और उत्साह से सराबोर दिखीं। एक बेहद साधारण परिवार के युवा तौसीफ अहमद गनी ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर पुलवामा का पहला IAS अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया है।
गांव में उत्सव का माहौल
रविवार को जब तौसीफ परिणाम आने के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचे, तो सैकड़ों लोग उनके स्वागत में सड़कों पर उतर आए। रिश्तेदारों, शिक्षकों और दोस्तों ने उन पर फूलों की वर्षा की और ढोल-नगाड़ों के साथ उन्हें घर तक ले जाया गया। ग्रामीणों ने इसे पुलवामा के इतिहास का सबसे बड़ा "ऐतिहासिक क्षण" बताया।
गरीबी को हराकर हासिल की मंजिल
तौसीफ की सफलता की कहानी संघर्षों से भरी है। उनके पिता एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं। अपनी सफलता पर बात करते हुए भावुक तौसीफ ने कहा, "मेरी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। मेरे पिता ने मजदूरी करके मुझे पढ़ाया ताकि मैं अपने सपने पूरे कर सकूं। मैं आज जो कुछ भी हूं, अपने माता-पिता के बलिदान और अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन की बदौलत हूं।"
युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
तौसीफ ने ग्रामीण क्षेत्रों और सीमित संसाधनों वाले युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि यदि वे एक छोटे से गांव से यह मुकाम हासिल कर सकते हैं, तो कोई भी कर सकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे विपरीत परिस्थितियों के आगे हार न मानें और अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ मेहनत करें।
इलाके में नई उम्मीद की किरण
स्थानीय लोगों का मानना है कि तौसीफ की उपलब्धि जिले की छवि बदलने में अहम भूमिका निभाएगी। जिस पुलवामा को दुनिया अब तक संघर्षों के कारण जानती थी, अब उसकी पहचान काबिल अफसरों के घर के रूप में होगी। यह सफलता उस समय आई है जब सरकारी और शैक्षिक संस्थान क्षेत्र के युवाओं को मुख्यधारा, शिक्षा और खेलों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
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