सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल भूखड़ी कलां का लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से इस्तीफा, भाजपा के दबाव के कारण 20 दिन बाद भी नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ
नई दिल्ली / लुधियाना, 13 अक्टूबर 2026: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अधिवक्ता एवं राष्ट्रीय नेता सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल भूखड़ी कलां ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज, स्वाभिमान और सिद्धांतों को सर्वोपरि रखते हुए लिया है।
सोशल मीडिया मंच X पर अपना पक्ष रखते हुए ग्रेवाल ने कहा कि उन्होंने 2 अगस्त 2026 को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्राथमिक सदस्यता से विधिवत इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनके अनुसार आज तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और अनुभवी नेताओं की अनदेखी की जा रही है तथा पार्टी की वैचारिक मर्यादा कमजोर पड़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा में 34 वर्षों तक निस्वार्थ भाव से सेवा करने के बावजूद वे अपने सिद्धांतों और स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं कर सकते।
ग्रेवाल ने बताया कि वे 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के केंद्रीय कार्यालय में विधिवत पार्टी में शामिल हुए थे। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पंजाब के सह-प्रभारी की जिम्मेदारियां सौंपने का भरोसा दिया गया था। लेकिन 20 दिन बीत जाने के बावजूद उनका नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया।
ग्रेवाल ने स्पष्ट आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व के दबाव के कारण ही उनका नियुक्ति पत्र जारी नहीं होने दिया गया। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना और दूसरी ओर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में उनकी नियुक्ति में बाधा डालना राजनीतिक दबाव एवं हस्तक्षेप का गंभीर उदाहरण है।
अपना रोष प्रकट करते हुए ग्रेवाल ने कहा, “क्या भाजपा में 34 वर्षों तक निस्वार्थ भाव से की गई सेवा का यही इनाम है? मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ईमानदारी से काम किया है और मेरा रिकॉर्ड बेदाग रहा है। यदि मैंने अपनी इच्छा से पार्टी छोड़कर नया राजनीतिक रास्ता चुना है, तो भाजपा नेतृत्व को इससे क्या आपत्ति है? मेरी नई पार्टी में नियुक्ति रोकने का अधिकार उन्हें किसने दिया है? प्रत्येक नेता को अपनी अंतरात्मा और स्वाभिमान के अनुसार राजनीतिक निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए।”
ग्रेवाल ने कहा कि इस मामले में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान पर भी दबाव डाला गया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसी राजनीतिक दल के नेता को दूसरी पार्टी में अपनी इच्छा से काम करने से रोकने के लिए दबाव बनाया जाए। उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की जनता के प्रति भाजपा नेतृत्व की नीयत और गंभीरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रेवाल ने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा किसी निजी रंजिश या वैमनस्य का परिणाम नहीं है। वे नहीं चाहते कि उनके फैसले के कारण राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर भाजपा और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के आपसी संबंधों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
उन्होंने श्री चिराग पासवान के प्रति हृदय से आभार, स्नेह और सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रति उनका व्यक्तिगत सम्मान हमेशा बना रहेगा। उन्होंने डॉ. के.पी. चौधरी, श्री पंकज भारद्वाज, श्री प्रेम सिंह सफरी तथा पार्टी के अन्य नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का सहयोग और हौसला बढ़ाने के लिए भी धन्यवाद किया।
अपने दृढ़ संकल्प को व्यक्त करते हुए ग्रेवाल ने कहा, “मैं दृढ़ निश्चय और मजबूत हौसले वाला इंसान हूं। भगवान न्याय करने में देर कर सकता है, लेकिन न्याय से इनकार नहीं करता। मैं अपना रास्ता स्वयं बनाऊंगा। न मैं राजनीतिक दबाव के आगे झुकूंगा और न ही किसी की चालों से डरकर पीछे हटूंगा। मेरे लिए किसी भी पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मेरा स्वाभिमान, मेरी अंतरात्मा और मेरे सिद्धांत हैं।”
ग्रेवाल ने पंजाब, किसानों, युवाओं, गरीबों और समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों की सेवा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि वे बिना किसी डर, दबाव या समझौते के जनता की आवाज बुलंद करते रहेंगे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका इस्तीफा उनके राजनीतिक सफर का अंत नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों और स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ने का निर्णय है। जनसेवा ही उनका उद्देश्य है और पंजाब की जनता के अधिकारों के लिए उनकी आवाज पहले की तरह ही बुलंद रहेगी।
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