सीबीएसई ने तीन-भाषा नीति पर नए दिशानिर्देश जारी किए
नई दिल्ली, 29 जून (2026):सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने देश भर के लाखों स्टूडेंट्स और स्कूलों के लिए थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर बहुत ज़रूरी और बड़ी राहत देने वाली नई गाइडलाइंस जारी की हैं। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत लागू हो रहे इन बदलावों के बीच, बोर्ड ने साफ़ किया है कि स्टूडेंट्स पर पढ़ाई का बोझ और एग्जाम का स्ट्रेस कम करने के लिए नियमों में बड़ी छूट दी गई है, जिससे मौजूदा बैच के बच्चों को बहुत फ़ायदा होगा।
मौजूदा 10वें बैच पर कोई नया नियम लागू नहीं होगा
CBSE ने अभी दसवीं क्लास में पढ़ रहे स्टूडेंट्स को सबसे बड़ी खुशखबरी दी है। बोर्ड ने ऑफिशियली साफ़ किया है कि नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी मौजूदा 10वें बैच पर बिल्कुल भी लागू नहीं होगी। इसका मतलब है कि ये स्टूडेंट्स बिना किसी कन्फ्यूजन या डर के अपने पुराने और बने-बनाए पैटर्न के हिसाब से बोर्ड एग्जाम की तैयारी करते रहेंगे और उन पर कोई नया नियम नहीं थोपा जाएगा। 7वीं, 8वीं और 9वीं के स्टूडेंट्स को थर्ड लैंग्वेज बोर्ड से छूट
बोर्ड ने जूनियर क्लास यानी अभी 7वीं, 8वीं और 9वीं क्लास में पढ़ रहे स्टूडेंट्स के लिए भी एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। नए नियमों के मुताबिक, जब ये स्टूडेंट्स अगली क्लास पास करके 10वीं में पहुंचेंगे, तो उन्हें अपनी थर्ड लैंग्वेज में कोई बोर्ड एग्जाम देने की ज़रूरत नहीं होगी। अक्सर देखा जाता था कि नई लैंग्वेज सीखने और उसके बोर्ड एग्जाम पास करने के प्रेशर की वजह से बच्चे मैथ्स, साइंस जैसे कोर सब्जेक्ट्स पर फोकस नहीं कर पाते थे, लेकिन अब उन्हें इस डर से पूरी तरह आज़ाद कर दिया गया है।
फॉरेन लैंग्वेज चुनने वालों के लिए नई शर्त
बोर्ड ने कई स्कूलों में दो फॉरेन लैंग्वेज पढ़ रहे स्टूडेंट्स के लिए एक खास फॉर्मूला तैयार किया है:
क्लास 7, 8 और 9 के जो स्टूडेंट्स पहले से दो फॉरेन लैंग्वेज ले चुके हैं, वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
लेकिन बोर्ड की नई शर्त के मुताबिक, अब इन स्टूडेंट्स को अपने सिलेबस में दो फॉरेन लैंग्वेज के साथ-साथ एक एडिशनल इंडियन लैंग्वेज भी शामिल करनी होगी। किसी भी नई पॉलिसी को ठीक से लागू करने के लिए, CBSE ने भरोसा दिलाया है कि बच्चों के ग्रेड और क्लास के हिसाब से सही स्टडी मटीरियल और टेक्स्टबुक बिना किसी देरी के स्कूलों को उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि टीचरों को पढ़ाने में कोई दिक्कत न हो और स्टूडेंट्स इस नए बदलाव को आसानी से अपना सकें।
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