केंद्रीय कृषि मंत्री ने की भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए पंजाब के किसानों की सराहना
सांसद सतनाम संधू ने की पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना में गुरु नानक देव जी के नाम पर मिल्लेट्स पर रिसर्च सेंटर बनाने की मांग
सांसद सतनाम सिंह संधू ने की रिसर्च और फसलों उन्नत किस्में विकसित करने में पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना की भूमिका की सराहना
"हवा के प्रदूषण के लिए किसान ज़िम्मेदार नहीं हैं": केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
सांसद सतनाम सिंह संधू ने संसद में उठाया पंजाब के किसानों के बीच फसल विविधीकरण और मोटे अनाजों (मिल्लेट्स) को बढ़ावा देने वाली योजनाओं का मुद्दा
पंजाब के किसानों ने पराली प्रबंधन के नए तरीके अपनाकर किया बेहतरीन काम " : शिवराज सिंह चौहान,द्रीय कृषि मंत्री
मोगा के किसानों ने पराली को जलाने की बजाए किया प्रबंधन की और रुख
मोटे अनाज (मिल्लेट्स) के उत्पादन को बढ़ावा देने के केंद्र सरकार के प्रयास फसल विविधीकरण को दे रहे बढ़ावा, धान-गेहूं के पारंपरिक चक्र को तोड़ने में बने सहायक:केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
New Delhi, 27 March 2026-
देश, पंजाब के किसानों का उनके कड़ी मेहनत के लिए आभारी है, जिन्होंने हरित क्रांति द्वारा भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाने तथा देशवासियों की भूख मिटाने में हमारी मदद की है। यह बात केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सांसद में कही।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने आगे कहा कि श्री नानक देव जी पहले सिख गुरु थे ने जिन्होंने 15वीं शताब्दी में ही कोधरा जैसे मोटे अनाजों के उपयोग को बढ़ावा दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने भी ने मोटे अनाज (Millets) के महत्व को समझा है। केंद्रीय मंत्री राज्यसभा में सांसद सतनाम सिंह संधू द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
इससे पहले, प्रश्नकाल के दौरान, सांसद सतनाम सिंह संधू ने सरकार से उस पहलों नीतियों की जानकारी मांगी, जिसे पंजाब में मोटे अनाज की खेती को बढ़ाने के लिए बनाया गया है। यह नीति फसलों में विविधता लाने और धान जैसी पानी के अधिक खपत वाली फसलों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों का अंग है। संसद में अपने संबोधन के दौरान, सांसद सतनाम संधू ने उस गंभीर स्थिति को सामने रखा जिसका सामना पंजाब आज 'धान-गेहूं चक्र' के कारण कर रहा है। सांसद सतनाम ने कहा कि पंजाब का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 50 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से 40 लाख हेक्टेयर पर खेती होती है और इस क्षेत्र का 99% हिस्सा सिंचित है। धान-गेहूं चक्र पंजाब की कुल कृषि भूमि के 75% से अधिक हिस्से का उपयोग करता है, जिसके लिए अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसी कारण पंजाब गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है, क्योंकि 80% से अधिक भूजल ब्लॉक 'डार्क ज़ोन' की श्रेणी में आ गए हैं।
पंजाब में मोटे अनाज की खेती और फ़सलों में विविधता लाने के संबंध में सांसद सतनाम संधू के सवाल का जवाब देते हुए, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन को बताया कि कृषि और किसान कल्याण विभाग फ़सलों में विविधता को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ लागू कर रहा है। इनमें 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन' (NFSNM) भी शामिल है, जिसके तहत 28 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में मोटे अनाज (श्री अन्न) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पंजाब के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि NFSM के तहत, वर्ष 2025-26 के लिए पंजाब राज्य में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने हेतु 34.60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
कृषि मंत्री ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत फसल विविधीकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सरकार ने 2025-26 के लिए पंजाब के किसानों को पारंपरिक फसलों की खेती से हटाकर बाजरा, दालें, तिलहन और अनाज जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर मोड़ने के लिए 103.75 करोड़ रुपये की राशि मंज़ूर की है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि 2025-26 में NFSNM योजना के तहत कुल 140 क्विंटल बाजरे के बीज वितरित किए गए हैं।
केंद्र सरकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को भी प्रोत्साहन दे रही है, जिसके लिए पिछले पाँच वर्षों में 800 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। पूरे भारत में 29 आवेदकों को 793 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया है, जिसमें पंजाब के कपूरथला, पटियाला और जालंधर ज़िलों के तीन प्रोजेक्ट शामिल हैं।
मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PMFME) के तहत 4612 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को मंज़ूरी दी है, जिनमें से पंजाब में बाजरे से जुड़े पाँच सूक्ष्म खाद्य उद्यमों को मंज़ूरी मिली है।
केंद्र सरकार पंजाब में मिट्टी के प्रदूषण और भूजल गिरावट की स्थिति को लेकर जताई चिंता :केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान
देश में मोटे अनाज (मिलेट्स) के उत्पादन को बढ़ावा देने के केंद्र सरकार के प्रयासों पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "केंद्र सरकार धान-गेहूं के फसल चक्र के विकल्प के तौर पर मोटे अनाज को बढ़ावा देने में सफल रही है। यह फसल चक्र पंजाब समेत कई राज्यों में अपनाया जा रहा था। भारत में मोटे अनाज का उत्पादन 2021-22 के लगभग 160 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 185.92 लाख टन हो गया है, और इसकी खेती का क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है।"
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा,“हाल के दशकों में, पानी और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हुई है। पंजाब में पानी की ज़्यादा खपत वाली गेहूं-धान की खेती की तरफ़ झुकाव देखा गया है, जिससे पानी की कमी, पोषक तत्वों का असंतुलन और मिट्टी की सेहत में गिरावट आई है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बाजरा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें ‘श्री अन्न’ (बाजरा) जैसी पहल शुरू करना और 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ घोषित करना शामिल है। बाजरा उत्पादन बढ़ाने, फ़सलों में विविधता लाने और दालों व तिलहनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी सोच के अनुरूप, ‘अंतर्राष्ट्रीय बाजरा (मिल्लेट्स) वर्ष 2023’ को 100 से ज़्यादा देशों और भारत के सभी राज्यों की भागीदारी के साथ मनाया गया। ज़्यादा से ज़्यादा लोग अपने खान-पान में बाजरा को शामिल गति मिलेगी, और ‘श्री अन्न’ का उत्पादन और खपत, दोनों लगातार बढ़ते रहेंगे।"
सांसद सतनाम संधू ने की पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना में गुरु नानक देव जी के नाम पर मिल्लेट्स रिसर्च सेंटर बनाने की मांग
सांसद सतनाम सिंह संधू ने की रिसर्च और फसलों उन्नत किस्में विकसित करने में पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना की भूमिका को सराहना
सांसद सतनाम सिंह संधू ने सदन में केंद्र सरकार से गुरु नानक देव जी के नाम पर लुधियाना की पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में बाजरे पर रिसर्च करने के लिए एक रिसर्च सेंटर बनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि गुरु नानक देव जी पहले सिख गुरु थे, जिन्होंने 15वीं सदी में भारत में बाजरे (कोधरा) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया था। सांसद ने रिसर्च करने तथा अधिक उपज वाली किस्में पैदा करने में पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की भूमिका को रेखांकित किया, जिसने हरित क्रांति के दौरान भारत को अनाज के मामले में आत्मनिर्भर देश बनाने में अहम भूमिका निभाई।
सांसद सतनाम संधू ने केंद्रीय कृषि मंत्री को पिछले सत्र में पराली जलाने से बढ़े वायु प्रदूषण के लिए पंजाब के किसानों को ज़िम्मेदार न ठहराने वाले आंकड़े संसद पेश करने के लिए धन्यवाद दिया।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने संसद में एक बार फिर दोहराया कि वायु प्रदूषण स्तर बढ़ने के लिए किसान ज़िम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने पंजाब के मोगा के किसानों की प्रशंसा की, जिन्होंने पराली जलाने के पुराने तरीकों को अपनाने के बजाय, फसल अवशेष मैनेजमेंट के नए तरीके अपनाए हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने नवंबर 2025 में मोगा के रणसिंह कलां गांव का दौरा किया, जहां उन्होंने पंजाब के किसानों को फसल अवशेष (पराली) को नए तरीके जैसे सीधी बुवाई अपनाते हुए देखा। उन्होंने सदन को बताया कि पंजाब के किसानों के लिए बाजरे की कुल 45 ज़्यादा पैदावार वाली किस्में जारी भी की गईं, जिनमें ज्वार, बाजरा और दूसरी किस्में शामिल हैं, जिनकी वर्तमान में मानसा, मोगा, रूपनगर तथा संगरूर में खेती की जा रही है।
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