ग़ज़ल मंच सरी ने मशहूर स्कॉलर डॉ. राजिंदर पाल सिंह बराड़ और डॉ. चरणजीत कौर बराड़ को किया सम्मानितहरदम मान
सरी, 10 जनवरी 2026-ग़ज़ल मंच सरी ने हाल ही में मशहूर पंजाबी स्कॉलर डॉ. राजिंदर पाल सिंह बराड़ और डॉ. चरणजीत कौर बराड़ के साथ एक मीट-एंड-ग्रीट प्रोग्राम आयोजित किया। इसमें दोनों स्कॉलर ने अपनी ज़िंदगी, टीचिंग जर्नी और ज़िंदगी के अनुभवों के बारे में लिटरेरी चर्चा की।
मेहमानों का परिचय कराते हुए ग़ज़ल मंच के प्रेसिडेंट जसविंदर ने कहा कि इस स्कॉलर जोड़ी ने अपनी सेवाओं से पंजाबी लिटरेचर फील्ड में बहुत गर्व की जगह हासिल की है। उनके एकेडमिक काम का दायरा बहुत बड़ा है। डॉ. राजिंदर पाल बराड़ एक ऐसे स्कॉलर हैं जो यूनिवर्सिटी में ऊंचे पदों पर होने के बावजूद ज़मीन से जुड़े हुए हैं। आज सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करके डॉ. चरणजीत बराड़ और डॉ. राजिंदर पाल सिंह बराड़ अपना चैनल और WhatsApp ग्रुप सफलतापूर्वक चला रहे हैं जहाँ बहुत सीरियस चर्चाएँ होती हैं।
डॉ. राजिंदर पाल सिंह बराड़ ने बताया कि उन्हें बचपन से ही परिवार में साहित्यिक माहौल मिला। उनके पिता टीचर थे। इस तरह उन्हें घर पर ही प्रोग्रेसिव लिटरेचर से जुड़ने का मौका मिला। B.Sc. मेडिकल तक की पढ़ाई करने के बाद वे पंजाबी यूनिवर्सिटी गए और मेडिकल लाइन छोड़कर पंजाबी भाषा में आ गए। इस पढ़ाई से पहले उन्हें स्कूल टीचर की सरकारी नौकरी भी मिली थी, लेकिन उसे छोड़ने के बाद उन्होंने M. Phil में एडमिशन लिया। उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से PhD की और यूनिवर्सिटी में टीचर की नौकरी पा ली। पंजाबी यूनिवर्सिटी में ही उनकी मुलाकात प्रोग्रेसिव विचारों की बहुत ही जुझारू शख्सियत डॉ. चरणजीत कौर से हुई और उन्होंने शादी कर ली। डॉ. चरणजीत कौर बराड़ ने इस मौके पर अपनी ज़िंदगी के दिलचस्प किस्से भी शेयर किए। उन्होंने यूनिवर्सिटी में अलग-अलग संघर्षों में अपने योगदान के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी दो टैलेंटेड बेटियां हैं और वे अपने परिवारों के साथ यहां B.C. (कनाडा) में रह रही हैं।
लगातार चार घंटे चले इस प्रोग्राम में इस विद्वान जोड़े ने किसी तरह समय निकाला और इस दिन को ग़ज़ल मंच सरे के लिए यादगार बना दिया। बातचीत के बाद कविताओं और ग़ज़लों का दौर चला जिसमें मौजूद कवि जसविंदर, राजवंत राज, दविंदर गौतम, दशमेश गिल फिरोज, सुखजीत हुंदल और प्रीत मनप्रीत ने अपनी रचनाएं सुनाईं। डॉ. दंपत्ति ने भी इन रचनाओं के बड़े असर को माना और उन्होंने माना कि ग़ज़ल मंच सरे का बड़ा नाम है और सरे में पंजाबी में जो खूबसूरत ग़ज़लें बन रही हैं, उसमें उनका बड़ा योगदान है। प्रोग्राम के आखिर में डॉ. राजिंदर पाल सिंह बराड़ और डॉ. चरणजीत कौर बराड़ को खास मेहमान के तौर पर सम्मानित किया गया। पूरा प्रोग्राम बहुत ही खुशनुमा माहौल में यादगार रहा।
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