ट्राइडेंट ग्रुप का बड़ा कदम: एसएलआईईटी संगरूर में रिसर्च सस्टेनेबिलिटी लैब की स्थापना के लिए ₹1 करोड़ का योगदान
पद्मश्री राजिंदर गुप्ता, राज्यसभा सांसद के नेतृत्व में पहल
Babusahi Network Bureau
पंजाब / चंडीगढ़, 22 जनवरी 2026:
पद्मश्री राजिंदर गुप्ता, माननीय सांसद (राज्यसभा), श्रम, वस्त्र एवं कौशल विकास संबंधी स्थायी समिति के सदस्य तथा ट्राइडेंट ग्रुप के चेयरमैन एमेरिटस ने आज संत लोंगोवाल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एसएलआईईटी), संगरूर में रिसर्च सस्टेनेबिलिटी लैब की स्थापना के लिए ₹1 करोड़ के योगदान की घोषणा की। यह पहल ट्राइडेंट के औद्योगिक संयंत्रों से प्राप्त वास्तविक परिचालन डेटा के आधार पर मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में आने वाली खराबियों के इंजीनियरिंग समाधान विकसित करने पर केंद्रित होगी।
यह रिसर्च सस्टेनेबिलिटी लैब मशीनरी की विफलताओं के निदान व मूल कारण विश्लेषण, इंजीनियरिंग व एआई आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस फ्रेमवर्क, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के लिए डेटा आधारित विश्वसनीयता मॉडलिंग तथा एसएलआईईटी के शोधकर्ताओं और ट्राइडेंट की तकनीकी टीमों के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को सहयोग प्रदान करेगी। इस अत्याधुनिक सुविधा का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं को वास्तविक डेटा पर काम करने का अवसर देकर बड़े पैमाने के विनिर्माण परिवेश के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करना है, जिससे देश की औद्योगिक समस्या-समाधान क्षमता को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम का आयोजन एसएलआईईटी के निदेशक प्रो. मणि कांत पासवान के नेतृत्व में किया गया, जिसमें प्रो. रवि कांत मिश्रा, डीन (एलुमनाई एवं औद्योगिक संबंध) तथा प्रो. सुरिंदर सिंह, डीन (अनुसंधान एवं परामर्श) का विशेष सहयोग रहा। संस्थान ने कहा कि यह पहल मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में व्यावहारिक प्रशिक्षण, वास्तविक औद्योगिक अनुभव और अनुसंधान की गहराई को नई दिशा देगी।
सभा को संबोधित करते हुए पद्मश्री राजिंदर गुप्ता ने आधुनिक विनिर्माण में इंजीनियरिंग नवाचार, तकनीकी सटीकता और डेटा आधारित निर्णयों के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह नई लैब अकादमिक शोध और वास्तविक औद्योगिक चुनौतियों के बीच की खाई को पाटने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि ट्राइडेंट ग्रुप एसएलआईईटी के 100 मेधावी छात्रों को रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, जिनमें प्राथमिकता उन छात्रों को दी जाएगी जो शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट हैं लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं। यह पहल बिना वित्तीय बाधाओं के प्रतिभा को आगे बढ़ाने के ट्राइडेंट ग्रुप के संकल्प को दर्शाती है।
इससे पहले निदेशक प्रो. पासवान ने एसएलआईईटी की शोध, नवाचार और कौशल विकास से जुड़ी वर्तमान पहलों की जानकारी दी। कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्यों, कर्मचारियों और छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही, जिसने उद्योग–शिक्षा सहयोग की बढ़ती मजबूती को रेखांकित किया। रिसर्च सस्टेनेबिलिटी लैब की स्थापना विनिर्माण विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने, तकनीकी कौशल विकास को गति देने और भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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