वरिंदर घुम्मन मौत मामला: पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, नई कमेटी करेगी 15 दिन में दूध का दूध और पानी का पानी
अमृतसर (दलजीत): मशहूर इंटरनेशनल बॉडीबिल्डर वरिंदर सिंह घुम्मन की फोर्टिस अस्पताल में हुई मौत का मामला अब और गरमा गया है। पहली जांच रिपोर्ट पर उठे सवालों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के कड़े विरोध के बाद, पंजाब सरकार ने अपनी पिछली कार्रवाई को किनारे करते हुए एक नई 'हाई-पावर' जांच कमेटी का गठन कर दिया है। सरकार ने इस नई कमेटी को महज 15 दिनों के भीतर पूरी सच्चाई सामने लाने के सख्त आदेश दिए हैं।
पहली जांच पर क्यों मचा बवाल?
9 अक्टूबर 2025 को हुई घुम्मन की मौत के बाद बनी पहली कमेटी ने अस्पताल के चार डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस पर IMA भड़क गई और इसे 'एकतरफा कार्रवाई' करार दिया। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आर. एस. सेठी का आरोप था कि पहली कमेटी में विशेषज्ञों और IMA के सदस्यों को शामिल नहीं किया गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। डॉक्टरों में बढ़ते रोष को देखते हुए अब सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा है।
विशेषज्ञों की टीम करेगी गहन तफ्तीश
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा गठित इस नई टीम में फॉरेंसिक एक्सपर्ट, सीनियर सर्जन, मेडिसिन विशेषज्ञ और IMA के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। यह कमेटी मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जांच करेगी:
-
क्या इलाज के दौरान स्टैंडर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन किया गया?
-
क्या डॉक्टरों की ओर से कोई लापरवाही या देरी हुई?
-
अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की असल स्थिति क्या थी?
15 दिन की समय सीमा पर उठे सवाल
जहां सरकार ने 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी है, वहीं जानकारों का मानना है कि इतने तकनीकी और संवेदनशील मामले की गहराई से जांच के लिए यह समय कम है। दूसरी ओर, वरिंदर घुम्मन का परिवार इंसाफ की आस में बैठा है और उनका कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
IMA ने किया स्वागत, पर दी चेतावनी
डॉ. आर. एस. सेठी और डॉ. नरेश चावला ने नई कमेटी के गठन का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उनका कहना है कि पीड़ित डॉक्टरों को न्याय मिलना चाहिए और किसी भी दबाव में गलत कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
Click to Follow बाबूशाही हिन्दी फेसबुक पेज →