Himachal ULB Election : नगर निकाय चुनावों में भाजपा की नजर वापसी पर, कांग्रेस के लिए गढ़ बचाने की चुनौती; प्रदेश में सियासी सरगर्मियां तेज
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 28 अप्रैल 2026 : हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनावों का बिगुल बजते ही सियासी पारा चढ़ गया है। पिछले चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर बेहद रोचक बनती है। कुल 27 नगर परिषदों में भाजपा समर्थित 14 और कांग्रेस समर्थित 13 अध्यक्ष रहे, जिससे दोनों दलों के बीच सीधी और कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।
एक-एक सीट का महत्व बढ़ गया है और छोटे अंतर ने चुनावी मुकाबले को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। जिलावार स्थिति भी इसी संतुलन को दर्शाती है। कांगड़ा में कांग्रेस 5 और भाजपा 3, मंडी में कांग्रेस 3 और भाजपा 1, सोलन में दोनों परिषद कांग्रेस के पास रहीं, जबकि बिलासपुर में कांग्रेस 2 और भाजपा 1 पर रहीं। कुल्लू में दोनों प्रमुख दलों में 1-1 पर बराबरी की स्थिति रही।
दूसरी ओर सिरमौर, ऊना, हमीरपुर और चंबा जैसे जिलों में भाजपा का दबदबा साफ नजर आया, जहां अधिकांश या सभी परिषदों पर भाजपा समर्थित अध्यक्ष रहे। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस सत्ता में है, ऐसे में पार्टी के लिए यह चुनाव अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका भी है और चुनौती भी। कांगड़ा, मंडी, सोलन और बिलासपुर जैसे जिलों में अपने गढ़ को बचाने के साथ बढ़त बढ़ाने पर फोकस रहेगा। उधर, भाजपा इन चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल मानकर चल रही है। सिरमौर, ऊना, हमीरपुर और चंबा में मजबूत पकड़ के दम पर भाजपा ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर राजनीतिक बढ़त हासिल करना चाहेगी, ताकि आगामी चुनावों के लिए माहौल अपने पक्ष में किया जा सके।
दो-दो की बराबरी पर चल रहे नगर निगमों में बढ़त बनाने की जुगत
हिमाचल प्रदेश के चार प्रमुख नगर निगमों में चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। दो-दो की बराबरी पर चल रहे नगर निगमों में बढ़त बनाने की जुगत में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल जुट गए हैं। अब तक पालमपुर नगर निगम में कांग्रेस समर्थित मेयर, डिप्टी मेयर काबिज थे, जबकि सोलन नगर निगम में कांग्रेस का मेयर और भाजपा का डिप्टी मेयर होने से सत्ता साझा स्थिति में थी। दूसरी ओर धर्मशाला और मंडी नगर निगम पूरी तरह भाजपा के कब्जे में रहे। ऐसे में चारों नगर निगमों में दोनों दलों के बीच संतुलन बना हुआ था। अब दो-दो के मुकाबले को तीन-एक या चार-शून्य करने के लिए दोनों प्रमुख राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगाने को तैयार हैं।
29 अप्रैल से नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही सियासी दलों के पत्ते खुलने भी शुरू हो जाएंगे। दोनों दल न केवल अपने कब्जे वाले नगर निगम बचाने की कोशिश करेंगे, बल्कि विरोधी दल के कब्जे वाले क्षेत्रों में सेंध लगाकर बढ़त हासिल करने की रणनीति पर भी काम करेंगे। नगर निगम चुनावों को लेकर दोनों दलों में टिकट वितरण सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हर वार्ड में मजबूत उम्मीदवार उतारने के लिए पार्टी स्तर पर गहन मंथन चल रहा है। दावेदारों की लंबी कतार और अंदरूनी खींचतान भी सामने आने लगी है। संभावित है कि मंगलवार या बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी तय हो जाएंगे।
इस बार चुनावों में स्थानीय मुद्दे जैसे शहरों का विकास, सफाई व्यवस्था, पेयजल संकट और ट्रैफिक मुख्य भूमिका निभाएंगे। कांग्रेस जहां अपनी सरकार के विकास कार्यों को जनता के सामने रखेगी, वहीं भाजपा इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है। चारों नगर निगमों में मुकाबला करीबी रहने के आसार हैं। वार्ड स्तर पर छोटी-सी बढ़त भी पूरे नगर निगम की सत्ता का समीकरण बदल सकती है। हिमाचल के चार नगर निगमों में होने जा रहे चुनाव इस बार केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं, बल्कि कांग्रेस और भाजपा के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई बनते जा रहे हैं, जहां जीत-हार आने वाले राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेगी। (SBP)
Click to Follow बाबूशाही हिन्दी फेसबुक पेज →