Himachal Big Breaking: कसोल की रेव पार्टियों पर हाईकोर्ट की सख्ती, SP कुल्लू और संबंधित SDM के तबादले के आदेश
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला: 25 जून 2026 : कुल्लू जिले के कसोल क्षेत्र के जंगलों में आयोजित कथित रेव पार्टियों को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने कुल्लू के पुलिस अधीक्षक (SP) तथा संबंधित उपमंडलाधिकारी (SDM) के तत्काल तबादले के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि जंगलों में इस प्रकार की गतिविधियां कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया तथा न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी की कि जिन क्षेत्रों में ये गतिविधियां संचालित हो रही थीं, वहां समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
इससे पहले अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) कुल्लू के सचिव को स्थल निरीक्षण कर 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। अब अदालत ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए SP और संबंधित SDM के तबादले के आदेश जारी किए हैं।
आयोजकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
खंडपीठ ने रेव पार्टियों के आयोजकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कुल्लू के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को व्यक्तिगत हलफनामा दायर कर मीडिया में प्रकाशित खबरों पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को निर्धारित की गई है।
HC नशे और रेव पार्टियों पर पहले भी दिखा चुका है सख्त रुख
हिमाचल हाईकोर्ट पूर्व में भी नशे और रेव पार्टियों से जुड़े मामलों में कड़ा रुख अपनाता रहा है।
2023: मनाली-मलाणा क्षेत्र में विदेशियों की कथित रेव पार्टियों के मामले में अदालत ने DGP से जवाब मांगा था और राज्य में नशे की बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जताई थी।
2024: कसोल और तोश क्षेत्र में अवैध कैफे तथा नशे से जुड़े अड्डों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देते हुए नियमित गश्त और औचक निरीक्षण पर जोर दिया गया था।
2025: ड्रग्स के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित करने संबंधी निर्देश दिए गए थे।
कई सवालों के जवाब अभी बाकी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब यह प्रश्न उठ रहे हैं कि संवेदनशील पर्यटन क्षेत्र में ऐसी गतिविधियां लंबे समय तक कैसे संचालित होती रहीं और स्थानीय स्तर पर निगरानी एवं कार्रवाई में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई। 6 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में DC और SP को अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट करनी होगी तथा अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देनी होगी।
मामले में हाईकोर्ट के सख्त रुख के चलते प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर आगे भी महत्वपूर्ण कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। (SBP)
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