HRTC Employees Strike: नहीं माने एचआरटीसी कर्मी, आज बुधवार से करेंगे हड़ताल, सरकार ने लगाया एस्मा, नई भर्ती का एलान
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला : 24 जून 2026 : हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की चालक-परिचालक यूनियन और सरकार के बीच मांगों को लेकर वार्ता में सहमति नहीं बन पाई है। मंगलवार को एसीसी (परिवहन) के साथ आयोजित बैठक बेनतीजा रहने के बाद यूनियन ने 24 जून की मध्यरात्रि 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया।
हड़ताल के एलान के बीच हिमाचल सरकार ने प्रदेश में छह महीने के लिए एस्मा लागू कर कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। हालांकि, कर्मचारी अपने फैसले पर अडिग हैं।
उधर, राज्य सरकार ने बस सेवाओं के सुचारु संचालन के लिए बुधवार से 656 अस्थायी चालकों की भर्ती शुरू करने का फैसला किया है। निजी ऑपरेटर मदद को सरकार के समर्थन में उतर आए हैं।
एचआरटीसी की लगभग 2800 बसें मुख्य परिवहन साधन
राज्य सचिवालय में हुई बैठक में चालक यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह का तबादला आदेश रद्द करने की मांग भी उठी। इस पर कोई सहमति न बनने के बाद यूनियन के पदाधिकारी कमरे से बाहर चले गए। वार्ता विफल रहने के बाद कर्मचारियों ने शिमला के पुराने बस अड्डा परिसर में प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में एचआरटीसी की करीब 2800 बसें हैं, जिसके 12,000 कर्मचारी 24 जून मध्यरात्रि से हड़ताल पर रहेंगे। हड़ताल से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। यूनियन ने सभी डिपो कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने को कहा है। लोगों से भी बुकिंग रद्द करने की अपील की है। बता दें कि एचआरटीसी कर्मचारी नाइट ओवरटाइम भत्ते के भुगतान, महंगाई भत्ते की लंबित किस्तों की अदायगी व लंबित चिकित्सा बिलों का भुगतान समेत कई अन्य मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं।
हड़ताल पर जाने का निर्णय बैठक पर ही निर्भर : समर
एचआरटीसी सर्व कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष समर चौहान ने बताया कि मंगलवार को शिमला के तारा देवी में बैठक हुई। चालक-परिचालक यूनियन की एसीएस के साथ जो बैठक हुई, उसमें कर्मचारियों की मांगों को सही तरीके से नहीं रखा गया है। बुधवार को प्रबंध निदेशक के साथ सर्व कर्मचारी यूनियन की बैठक होगी। हड़ताल पर जाने का निर्णय बैठक पर ही निर्भर करेगा।
निजी बस ऑपरेटरों का सरकार को समर्थन, अतिरिक्त सेवाएं देंगे
हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ ने हड़ताल के दौरान अतिरिक्त बस सेवा देने का एलान किया है। संघ ने आश्वस्त किया है कि किसी भी परिस्थिति में आम जनता को असुविधा नहीं होने दी जाएगी। संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश पराशर और प्रदेश महासचिव रमेश कमल ने कहा कि जहां भी आवश्यकता होगी, वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ सेवाएं देंगे।
विशेष परमिट के लिए आवेदन कर सकते हैं निजी ऑपरेटर : आरटीओ
शिमला के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी विश्व मोहन देव चौहान ने बताया कि एचआरटीसी के प्रभावित और महत्वपूर्ण रूटों पर बसें चलाने के लिए निजी बस ऑपरेटर विशेष परमिट के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने निजी शिक्षण संस्थानों, स्कूल वाहन संचालकों और अन्य अधिकृत परिवहन संचालकों से भी आवश्यकता पड़ने पर वाहन और प्रशिक्षित चालक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
एचआरटीसी के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे। प्रदेश में एस्मा लगाया गया है। नियमों का पालन न करने वाले कर्मचारियों को कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - आरडी नजीम, अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन
एचआरटीसी के 12,000 कर्मचारी 24 को मध्यरात्रि से हड़ताल पर रहेंगे। एचआरटीसी की बसें नहीं चलेंगी। सरकार कर्मचारियों की मांगें मानने को तैयार नहीं है। इसके चलते एचआरटीसी की यूनियनों ने यह फैसला लिया है। - मान सिंह, चालक यूनियन अध्यक्ष
हड़ताल पाबंदी तानाशाही, सरकार समस्याओं से भाग रही : बिक्रम
पूर्व परिवहन मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बिक्रम ठाकुर ने एचआरटीसी कर्मचारियों पर छह महीने की हड़ताल पाबंदी की आलोचना की है। उन्होंने एस्मा लागू करने के सरकार के फैसले को तानाशाही बताया। ठाकुर ने कहा कि यह कदम कांग्रेस सरकार की कर्मचारी विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार एचआरटीसी कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है। कर्मचारियों को समय पर वेतन, भत्ते और अन्य वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे हैं। सरकार उनकी मांगों को सुनने के बजाय एस्मा का सहारा ले रही है। यह कर्मचारियों की आवाज दबाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कर्मचारियों को विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, जिसे सरकार कुचलना चाहती है। एचआरटीसी की स्थिति बदहाल है। निगम में बसों की भारी कमी है। चालकों, परिचालकों सहित सैकड़ों पद रिक्त हैं। संसाधनों का अभाव और बढ़ता आर्थिक संकट सरकार की विफलताओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गंभीर होती तो एस्मा लागू करने के बजाय संवाद करती। वह कर्मचारी संगठनों से बातचीत कर उनकी जायज मांगों का समाधान करती। उन्होंने फैसले को वापस लेने की मांग की।
एचआरटीसी कर्मियों के प्रति तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाना दुर्भाग्यपूर्ण: जयराम
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि एचआरटीसी कर्मियों की जायज मांगों को सुनने के बजाय उनके प्रति तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित है। प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में एचआरटीसी कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान है, ऐसे में सरकार को उनकी समस्याओं और मांगों को संवेदनशीलता एवं गंभीरता से सुनना चाहिए।
कर्मचारियों के साथ टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय सरकार को तत्काल बातचीत की पहल कर सभी पक्षों को विश्वास में लेते हुए कर्मचारियों की जायज़ मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उन्हें न्याय प्रदान किया जाए। (SBP)
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