News Explainer: कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान? जिनका Resign Gen Z लेकर ही माने
बाबूशाही ब्यूरो
चंडीगढ़, 25 जुलाई, 2026ः देशभर में NEET-UG 2026 पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले कई सप्ताह से देशभर के छात्र, विभिन्न छात्र संगठन और विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। आखिरकार उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया।
कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान?
धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तलचेर में हुआ। उनके पिता देबेंद्र प्रधान भी भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। छात्र जीवन में ही वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई
उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से मानवशास्त्र (Anthropology) में स्नातकोत्तर (Post Graduation) किया। छात्र राजनीति में सक्रिय रहने के बाद वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने।
राजनीतिक सफर
- 2000 में पहली बार ओडिशा विधानसभा के लिए चुने गए।
- बाद में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं।
- 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री बने।
- इसके बाद इस्पात मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाली।
- जुलाई 2021 में उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया।
- मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल (2024) में भी उन्होंने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी जारी रखी
शिक्षा मंत्री के तौर पर प्रमुख फैसले
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में कई बड़े शिक्षा सुधार लागू किए गए—
- नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करने पर जोर।
- डिजिटल शिक्षा और तकनीक आधारित पढ़ाई को बढ़ावा।
- भारतीय भाषाओं में शिक्षा और AI आधारित शिक्षण पर विशेष फोकस।
- UGC सुधार और उच्च शिक्षा में बदलाव से जुड़े कई फैसले।
विवादों में क्यों आए?
2026 में आयोजित NEET-UG परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर देशभर में छात्रों का गुस्सा बढ़ता गया। छात्रों का आरोप था कि परीक्षा की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है और लाखों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया।
विपक्षी दलों ने भी सरकार पर हमला बोला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
क्या था Gen Z आंदोलन?
NEET विवाद के बाद देशभर के युवाओं, विशेषकर Gen Z यानी नई पीढ़ी के छात्रों ने बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया।
आंदोलन की मुख्य मांगें थीं—
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- पेपर लीक की निष्पक्ष जांच।
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता।
- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी सुधार।
दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई शहरों में प्रदर्शन हुए। सोशल मीडिया पर भी #ResignDharmendraPradhan जैसे अभियान तेज रहे। कई छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने आंदोलन का समर्थन किया।
इस्तीफा क्यों दिया?
25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजते हुए कहा कि छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है। उन्होंने परीक्षा सुधार, जांच और भविष्य में व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की।
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