करोड़ों की एक्स-रे मशीन पर चूहों का ‘अटैक’, 8 दिन से ठप जांच; टांडा में मरीज परेशान
छोटी मशीन के सहारे चल रहा काम, मरीजों की बढ़ी कतारें; करोड़ों के उपकरण की सुरक्षा और रखरखाव पर उठे सवाल
बाबूशाही ब्यूरो
कांगड़ा : 04 नवंबर 2026: हिमाचल प्रदेश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में शुमार डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय (टांडा मेडिकल कॉलेज) में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक एक्स-रे मशीन पिछले करीब आठ दिनों से ठप पड़ी है। वजह ऐसी है, जिस पर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो सकता है। बताया जा रहा है कि चूहों ने मशीन की मुख्य केबल को कुतर दिया, जिसके चलते महत्वपूर्ण जांच सुविधा बाधित हो गई।
मरीजों को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से लगाई गई इस महंगी मशीन का बंद होना अस्पताल पहुंचने वाले रोगियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। खासकर दूरदराज के इलाकों से उपचार करवाने के लिए टांडा पहुंचने वाले मरीजों को जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। एक ओर अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीद लेकर लोग पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर एक एक्स-रे जैसी बुनियादी जांच के लिए भी उन्हें कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
छोटी मशीन पर बढ़ा मरीजों का दबाव
मुख्य एक्स-रे मशीन के खराब होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर छोटी एक्स-रे मशीन को काम पर लगाया है। इससे जांच का काम पूरी तरह बंद होने से तो बचा है, लेकिन मरीजों की संख्या के मुकाबले यह व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हो रही। टांडा जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में रोजाना आने वाले मरीजों का दबाव देखते हुए सीमित क्षमता वाली मशीन पर निर्भरता परेशानी बढ़ा रही है।
नतीजतन, मरीजों और उनके तीमारदारों को एक्स-रे करवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई मरीजों के लिए यह केवल समय की बर्बादी का मामला नहीं, बल्कि आगे के उपचार में देरी की चिंता से भी जुड़ा है। चिकित्सकीय परामर्श के बाद जांच करवाने पहुंचे रोगियों को रिपोर्ट और आगे की प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, जांच में वास्तविक देरी और मरीजों की संख्या के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
करोड़ों की मशीन, लेकिन सुरक्षा में कहां रह गई चूक?
इस पूरे मामले ने अस्पताल में महंगे चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर मशीन की मुख्य केबल चूहों के कुतरने से खराब हुई है, तो यह जानना जरूरी है कि एक्स-रे कक्ष में चूहों की पहुंच कैसे हुई? क्या उपकरणों के आसपास केबलों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे? क्या नियमित निरीक्षण और पेस्ट कंट्रोल की व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू की जा रही थी?
महंगे चिकित्सा उपकरणों की खरीद और स्थापना के साथ उनका सुरक्षित संचालन और नियमित रखरखाव भी उतना ही जरूरी है। खासकर ऐसे संस्थान में, जहां हिमाचल के विभिन्न जिलों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, छोटी-सी तकनीकी बाधा भी बड़ी संख्या में रोगियों को प्रभावित कर सकती है।
खराबी दूर करने में आठ दिन, मरीजों को कब मिलेगी राहत?
मशीन करीब आठ दिनों से बंद होने की स्थिति में सबसे अहम सवाल यह है कि इसकी मरम्मत कब तक पूरी होगी और नियमित जांच सुविधा बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। यदि समस्या केवल केबल तक सीमित है, तो मरम्मत की प्रक्रिया, तकनीकी जांच और मशीन को दोबारा चालू करने की समयसीमा स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं, मशीन को दोबारा शुरू करने से पहले जरूरी सुरक्षा और तकनीकी परीक्षण भी महत्वपूर्ण हैं।
अस्पताल प्रशासन के लिए फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ मरीजों की जांच का दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है, तो दूसरी ओर मुख्य मशीन को जल्द बहाल करना भी आवश्यक है।
व्यवस्था पर बड़ा सवाल
टांडा मेडिकल कॉलेज में सामने आया यह मामला सिर्फ चूहों द्वारा केबल कुतरने तक सीमित नहीं है। यह स्वास्थ्य संस्थानों में उपकरणों की सुरक्षा, नियमित रखरखाव और जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा भी है। करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक मशीनें स्थापित करना तभी सार्थक होगा, जब जरूरत के समय वे मरीजों के काम भी आ सकें। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अस्पताल प्रबंधन मशीन की खराबी को कितनी जल्दी दूर करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
- Download Babushahi Hindi App
-
-
Click to Follow बाबूशाही हिन्दी फेसबुक पेज →