“हरियाणा सरकार ने पंजाब के इतिहासकार हरभजन सिंह सेलबराह को किया सम्मानित”
सप्त सिंधु के इतिहास लेखन में हरभजन सिंह सेलबराह का योगदान
Ravi Jakhu / Babushahi News Network
पंचकूला-चंडीगढ़, 17 सितंबर: हरियाणा सरकार ने पंजाब के इतिहासकार हरभजन सिंह सेलबराह को सप्त सिंधु के इतिहास लेखन में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला की ओर से उनके योगदान पर अकादमी भवन के महाराजा दाहिरसेन सभागार में एक दिवसीय National Seminar का आयोजन किया गया।
Seminar में अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और पूर्व कुलपति डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री मुख्य अतिथि रहे। इतिहासकार हरभजन सिंह सेलबराह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अकादमी के सदस्य सचिव श्री मनजीत सिंह विशिष्ट अतिथि रहे। डॉ. जगपाल सिंह, सहायक प्रोफेसर, टीपीडी मालवा कॉलेज और डॉ. जसवंत सिंह, सहायक प्रोफेसर, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला ने वक्ता के रूप में हिस्सा लिया। Seminar की शुरुआत वंदे मातरम् गीत से हुई।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में हरभजन सिंह सेलबराह ने अपने इतिहास लेखन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि वह गांव-गांव जाकर वहां के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ी सामग्री जुटाते रहे। इस काम में हरिद्वार के पंडितों की वंशावलियों को एक प्रमुख source बनाया गया। डॉ. गंडा सिंह और कर्मसिंह के sources का भी उन्होंने अध्ययन किया।
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ ग्रामीण गांवों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, इसलिए गांवों का इतिहास लिखना और उसे सुरक्षित रखना आज भी बहुत जरूरी है।
मुख्य अतिथि डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री ने भारत के प्राचीन इतिहास, राखीगढ़ी के अवशेषों और ऋग्वेद में दर्ज सप्त सिंधु क्षेत्र का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास लेखन में लंबे समय तक विदेशी नजरिए को अधिक महत्व दिया गया और विदेशियों से संघर्ष करने वाले लोगों के इतिहास को पर्याप्त जगह नहीं मिली।
डॉ. जगपाल सिंह ने कहा कि हरभजन सिंह सेलबराह ने मालवा क्षेत्र का जमीनी इतिहास लिखा है। इसके लिए उन्होंने गांव-गांव जाकर मौखिक परंपराओं से जुड़ी जानकारी भी जुटाई। उनका इतिहास लेखन केवल घटनाओं का ब्यौरा नहीं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी सामने लाता है।
डॉ. जसवंत सिंह ने हरभजन सिंह सेलबराह के गांवों के इतिहास लेखन पर विस्तार से चर्चा की और उनकी पुस्तकों पर अपना आलेख प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर Babushahi.com के Editor बलजीत बल्ली ने हरभजन सिंह सेलबराह की 12 साल की मेहनत की सराहना की। उन्होंने बताया कि सेलबराह ने अपने गृह जिले बठिंडा के 284 गांवों का इतिहास खोजकर उसे पुस्तक के रूप में तैयार करने का महत्वपूर्ण काम किया है।
बलजीत बल्ली ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके अपने जिले बठिंडा के गांव सेलबराह से जुड़े इस अध्यापक ने सप्त सिंधु के इतिहास लेखन में ऐसा research work किया है, जो आम तौर पर किसी संस्था या सरकार की जिम्मेदारी मानी जाती है।
उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा पंजाब के इस इतिहासकार के योगदान को पहचानकर सम्मान देने पर खुशी जताई, लेकिन साथ ही अफसोस जताया कि पंजाब की किसी Academy या सरकार ने अभी तक हरभजन सिंह के इस महत्वपूर्ण research work को न तो मान्यता दी और न ही उन्हें सम्मानित किया।
बलजीत बल्ली ने कहा कि हरभजन सिंह की research के आधार पर तैयार इतिहास को schools और colleges के syllabus का हिस्सा बनाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए, जिस तरह मोदी सरकार ने छोटे साहिबजादों की शहादत को school syllabus का हिस्सा बनाया है।
हरभजन सिंह सेलबराह बठिंडा जिले के गांव सेलबराह के रहने वाले और सेवानिवृत्त अध्यापक हैं।
कार्यक्रम में डॉ. देवेन्द्र कौर ने भी इतिहास लेखन के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। पंजाबी प्रकोष्ठ के निदेशक हरपालसिंह ने धन्यवाद देते हुए कहा कि हरभजन सिंह ने बिना किसी निजी स्वार्थ के इतिहास लेखन का काम किया है।
संस्कृत प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. चितरंजन दयाल सिंह कौशल और अकादमी के सदस्य सचिव मनजीत सिंह ने भी इतिहास लेखन की परंपरा पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजेन्द्र कुमार ने किया।
Seminar में प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. एम.एम. जुनेजा, बलवान सिंह, राजीव गुप्ता, डॉ. अजयवीर सिंह, Bhola Singh Sidhana , मनीषा नांदल, डॉ. प्रतिभा, मुकेश लता, अंजु कक्कड़, रितु, प्रदीप शर्मा, दिनेश कुमार, ओम प्रकाश सिंह और डॉ. जितेन्द्र परवाज सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
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