Himachal Budget 2026 -27 : हिमाचल सरकार का वार्षिक बजट आज, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सदन में पेश करेंगे बजट, देखें अहम बिंदु
शशिभूषण पुरोहित
शिमला, 21 मार्च 2026 : मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करेंगे, जो गंभीर आर्थिक संकट की छाया में घिरा हुआ है। ऐसे में भारी राजकोषीय घाटे की भरपाई और पूंजीगत व्यय को सुरक्षित रखने के लिए नए कर लगाए जा सकते हैं, जब तक कि यह पूरी तरह एक राजनीतिक बजट न साबित हो।
हिमाचल में हर बजट से लोगों को उम्मीदें रहती हैं, लेकिन इस बार यह उम्मीदें अधिक स्पष्ट और तीव्र दिखाई दे रही हैं। बेरोजगार युवाओं की चिंता सबसे अधिक है।
हिमाचल प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहाँ बेरोजगारी दर अपेक्षाकृत अधिक बताई जाती रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार हाल के महीनों में राज्य की बेरोजगारी दर लगभग 7 से 9 प्रतिशत के बीच रही है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक मानी जाती है। शिक्षित युवाओं के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। परंपरागत रूप से सरकारी नौकरी को यहाँ सबसे सुरक्षित रोजगार माना जाता है और हजारों युवा विभिन्न विभागों में भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
लेकिन मौजूदा वित्तीय दबावों को देखते हुए बड़े पैमाने पर सरकारी नियुक्तियाँ करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। इसलिए युवाओं को उम्मीद है कि बजट में कौशल विकास कार्यक्रमों, स्टार्ट-अप प्रोत्साहन योजनाओं, पर्यटन क्षेत्र के विस्तार और लघु उद्यमों को बढ़ावा देने जैसी नीतियों पर जोर दिया जाएगा ताकि सरकारी क्षेत्र के बाहर भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।
कृषक और बागवान वर्ग भी इस बजट से काफी अपेक्षाएँ लगाए हुए है। विशेष रूप से सेब उत्पादन हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। शिमला, कुल्लू और किन्नौर जैसे जिलों में सेब बागवानी लाखों लोगों की आजीविका का मुख्य आधार है। अनुमान है कि राज्य में दो लाख से अधिक परिवार प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बागवानी से जुड़े हुए हैं और यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था में हजारों करोड़ रुपये का योगदान देता है।
हालांकि हाल के वर्षों में सेब उत्पादकों के सामने नई चिंताएँ भी उभर कर आई हैं। भारत के विभिन्न देशों के साथ बढ़ते व्यापार समझौतों के कारण विदेशी सेब के आयात को लेकर बागवानों में चिंता बढ़ी है। भारत में पहले से ही बड़ी मात्रा में सेब का आयात होता है और बागवानी संगठनों के अनुसार यह मात्रा हर साल लगभग पाँच से छह लाख टन तक पहुँच जाती है।
हिमाचल का वार्षिक सेब उत्पादन सामान्यतः सात से आठ लाख टन के आसपास रहता है। ऐसे में बागवानों को आशंका है कि यदि आयात बढ़ता है तो विपणन मौसम के दौरान घरेलू कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए वे चाहते हैं कि राज्य बजट में कोल्ड स्टोरेज, नियंत्रित वातावरण भंडारण इकाइयों, परिवहन सहायता और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं।
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