“34 वर्षों की निस्वार्थ सेवा के बाद राष्ट्रीय BJP नेता सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल भूखड़ी कलां ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा”
लुधियाना (पंजाब), 2 अगस्त 2026: एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के तहत राष्ट्रीय भाजपा नेता सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल भूखड़ी कलां ने लगातार 34 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय जनता पार्टी की सेवा करने के उपरांत पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन जी को, भाजपा पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों जी के माध्यम से भेज दिया है।
अपने एक्स (X) अकाउंट पर साझा की गई पोस्ट में सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल भूखड़ी कलां ने लिखा कि उनका यह इस्तीफा केवल किसी राजनीतिक दल से संबंध समाप्त करने का निर्णय नहीं है, बल्कि त्याग, समर्पण, अनुशासन और अटूट वैचारिक प्रतिबद्धता से तय किए गए एक लंबे सफर का समापन है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1992 में वह भारतीय जनता पार्टी से उस समय जुड़े थे, जब पंजाब में भाजपा का साथ देना सुविधा का नहीं, बल्कि साहस, दृढ़ विश्वास और बलिदान का विषय था। उन कठिन दिनों में हजारों कार्यकर्ता राजनीतिक विरोध, सामाजिक दबाव और अनेक चुनौतियों के बावजूद चट्टान की तरह पार्टी के साथ डटे रहे। उन्होंने कहा कि वह भी उन समर्पित कार्यकर्ताओं में शामिल रहे, जिन्होंने सबसे कठिन दौर में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा।
ग्रेवाल ने कहा कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने न कभी किसी पद की मांग की और न ही सत्ता अथवा किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए कभी पैरवी या लॉबिंग की। उनके लिए राजनीति कभी व्यक्तिगत लाभ या स्वयं का प्रचार करने का माध्यम नहीं रही। उनका एकमात्र उद्देश्य पार्टी को मजबूत करना, राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाना तथा ईमानदारी और समर्पण के साथ समाज की सेवा करना था।
उन्होंने कहा कि आज की पंजाब भाजपा उस पार्टी से लगभग पूरी तरह अलग हो चुकी है, जिससे वह तीन दशक से भी अधिक समय पहले जुड़े थे। उनके अनुसार त्याग, समर्पण और ईमानदार कार्यकर्ताओं का सम्मान करने वाली संस्कृति धीरे-धीरे समाप्त होती चली गई, जिसके कारण हजारों निस्वार्थ और समर्पित कार्यकर्ता निराश और हताश हो चुके हैं।
ग्रेवाल ने कहा कि पंजाब भर के असंख्य समर्पित भाजपा कार्यकर्ता अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष पार्टी को समर्पित करने के बावजूद चुपचाप उपेक्षा का शिकार होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनेक निस्वार्थ कार्यकर्ता संगठन में गुमनाम होकर रह गए हैं तथा उनकी दशकों की मेहनत, निष्ठा और समर्पण को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे वास्तविक हकदार थे।
उन्होंने कहा कि ईमानदार कार्यकर्ताओं को अपनी कुर्बानियों के बावजूद धीरे-धीरे हताश होते देखना अत्यंत पीड़ादायक है। उनके अनुसार जब समर्पित कार्यकर्ता स्वयं को उपेक्षित और अनसुना महसूस करने लगते हैं, तब उसका सबसे अधिक नुकसान संगठन को ही होता है।
ग्रेवाल ने आगे कहा कि कोई भी राजनीतिक दल अपने वैचारिक और समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करके तथा जमीनी स्तर पर काम करने वालों में निराशा फैलाकर कभी मजबूत नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि संगठन तभी आगे बढ़ते हैं, जब योग्यता, ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण को व्यक्तिगत पसंद-नापसंद तथा आंतरिक गुटबाजी से ऊपर रखा जाता है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने भाजपा के साथ जीत और हार दोनों देखी हैं, राजनीतिक उतार-चढ़ाव और लंबे संघर्षों के दौर में भी पार्टी का साथ निभाया है, लेकिन आज जैसी निराशा उन्होंने पहले कभी अनुभव नहीं की।
ग्रेवाल ने कहा कि उनका इस्तीफा न तो किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का परिणाम है और न ही किसी पद अथवा चुनावी गणना से प्रेरित है। यह निर्णय लंबे समय तक आत्ममंथन, गहरे मानसिक कष्ट और आहत अंतःकरण की आवाज का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि अनेक तथ्य, घटनाएं और अनुभव ऐसे हैं, जिन्हें उन्होंने फिलहाल सार्वजनिक न करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर वह संपूर्ण सत्य जनता के सामने रखेंगे तथा विस्तार से बताएंगे कि किन परिस्थितियों ने उन्हें 34 वर्षों से अधिक की सेवा के बाद यह अत्यंत पीड़ादायक निर्णय लेने के लिए विवश किया।
ग्रेवाल ने कहा कि मौन को कभी भी कमजोरी नहीं समझना चाहिए। कुछ सच्चाइयाँ कुछ समय के लिए छिप सकती हैं, किंतु अंततः सत्य की ही विजय होती है।
उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक जीवन में स्वाभिमान, ईमानदारी और नैतिक साहस सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। उनके अनुसार कोई भी पद, सत्ता या राजनीतिक संबंध किसी व्यक्ति के सिद्धांतों, स्वाभिमान और अंतःकरण से बड़ा नहीं हो सकता।
ग्रेवाल ने जोर देकर कहा कि उनका इस्तीफा उस वातावरण के विरुद्ध सिद्धांतों पर आधारित एक शांत लेकिन स्पष्ट विरोध है, जहाँ सच्चे समर्पण का सम्मान लगातार कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता अपने जीवन के दशकों किसी संगठन को समर्पित कर देते हैं, वे सम्मान, न्याय और उचित पहचान पाने के पूर्ण अधिकारी हैं।
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