Himachal Police: स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा का नया प्लान, क्या अब हर स्कूल पर रहेगी पुलिस की नजर?
शिमला में 27 स्कूलों के प्रिंसिपलों से DGP अशोक तिवारी ने की चर्चा, CCTV से लेकर चिट्टा और साइबर अपराध तक पर फोकस
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 2 नवंबर 2026 : स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, नशे से बचाव और साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत अब पुलिस स्कूलों के साथ सीधा समन्वय स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगी। मुख्यमंत्री के बच्चों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े विजन को आगे बढ़ाते हुए पुलिस मुख्यालय शिमला में 'स्कूल कनेक्ट-स्कूल सेफ्टी एंड स्टूडेंट प्रोटेक्शन इनिशिएटिव' की शुरुआत की गई है।
इस पहल के तहत पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय में शिमला के 27 स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। बैठक में स्कूल परिसरों की सुरक्षा, बच्चों के सामने उभर रहे नए खतरों और पुलिस-स्कूल समन्वय को प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।
इस पहल का उद्देश्य केवल किसी घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियों को पहले ही पहचानना है, जिनसे बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके लिए स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों, पुलिस और समाज की साझा जिम्मेदारी पर जोर दिया गया।
CCTV से लेकर विजिटर वेरिफिकेशन तक, स्कूलों की सुरक्षा पर जोर
स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई व्यावहारिक उपायों पर चर्चा हुई। इनमें स्कूलों के प्रवेश और निकास द्वारों पर CCTV निगरानी, परिसर में आने वाले लोगों का सत्यापन, प्रवेश नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा शामिल है।
पुलिस ने स्कूलों में कर्मचारियों के सत्यापन और बच्चों की उचित निगरानी को भी जरूरी बताया। सुरक्षा इंतजाम केवल किसी घटना के बाद सक्रिय होने के बजाय स्कूल प्रबंधन की नियमित व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
इसके साथ ही स्कूलों में सुरक्षा समितियों के गठन, पुलिस के साथ नियमित संवाद और स्कूल स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति जैसे उपायों पर भी चर्चा की गई।
अपहरण, यौन शोषण और बुलिंग से बचाने की तैयारी
बच्चों को अपहरण, यौन शोषण, बुलिंग, उत्पीड़न और शोषण जैसी घटनाओं से बचाने के लिए जागरूकता और समय पर शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना गया।
बैठक में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की अनुचित घटना सामने आने पर तत्काल सूचना देने की जरूरत पर जोर दिया गया।
पुलिस का फोकस ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें बच्चे बिना डर अपनी परेशानी बता सकें और स्कूल प्रबंधन व अभिभावक भी समय रहते पुलिस तक जानकारी पहुंचा सकें।
ऑनलाइन गेमिंग से आगे बढ़कर डिजिटल खतरों पर भी नजर
बदलते डिजिटल दौर में बच्चों की सुरक्षा केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गई है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए भी बच्चे कई तरह के खतरों का सामना कर सकते हैं।
इसी को देखते हुए बैठक में साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, सेक्सटॉर्शन और डीपफेक जैसी चुनौतियों पर चर्चा की गई। बच्चों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया।
स्कूलों तक पहुंचेगी चिट्टा विरोधी मुहिम
हिमाचल में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को स्कूलों से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया। बच्चों को चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए जागरूकता गतिविधियों और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने की बात कही गई।
DGP ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन को और मजबूत बनाने का आह्वान किया। स्कूलों में समय रहते जागरूकता बढ़ाकर बच्चों को नशे के जाल से दूर रखने की दिशा में काम करने पर बल दिया गया।
स्कूल बसों से लेकर आपदा प्रबंधन तक सुरक्षा की तैयारी
बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवहन व्यवस्था को भी अहम हिस्सा माना गया। स्कूल बसों की सुरक्षा, चालकों और संबंधित कर्मचारियों का सत्यापन तथा आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारी जैसे मुद्दे बैठक में उठाए गए।
इसके अलावा आपदा प्रबंधन, सुरक्षित निकासी के लिए मॉक ड्रिल और आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS-112) के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
यूनिवर्सिटी कनेक्ट के बाद अब स्कूल कनेक्ट
हिमाचल प्रदेश पुलिस पहले से उच्च शिक्षण संस्थानों में पुलिस-यूनिवर्सिटी कनेक्ट कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों के साथ संवाद की पहल कर रही है। अब इसी व्यवस्था का विस्तार स्कूलों तक किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, स्कूल कनेक्ट का विशेष फोकस बच्चों की कम उम्र और उनकी अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील स्थिति को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा उपायों को मजबूत करना है।
DGP अशोक तिवारी ने कहा कि बच्चों को नुकसान पहुंचने के बाद केवल जांच करना पुलिस का उद्देश्य नहीं है, बल्कि सतर्कता, जागरूकता और आपसी समन्वय से ऐसी घटनाओं को रोकना प्राथमिकता है। हर बच्चे को सुरक्षित स्कूल और हर अभिभावक को मानसिक सुकून मिलना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश पुलिस के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों और अभिभावकों के साथ समन्वय जारी रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, समय पर सूचना देने और विद्यार्थियों तथा पुलिस के बीच विश्वास बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे।
सवाल यह है कि स्कूल कनेक्ट की यह पहल जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है। CCTV, सत्यापन, जागरूकता और पुलिस से सीधा संपर्क तभी सार्थक होगा, जब इन व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा हो और बच्चों की शिकायतों पर संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। (SBP)
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