गेयटी में गूंज उठी ‘पिद्दू चिड़ड़ू की कथा’, बच्चों ने अभिनय से जीवंत की लेखक की कल्पना
बाल रंगमंच महोत्सव में संभोटा तिब्बतियन स्कूल के विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति, दर्शकों ने तालियों से बढ़ाया उत्साह
शिमला, 7 अक्तूबर 2026: शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में चल रहे तीन दिवसीय बाल रंगमंच महोत्सव में बुधवार को बाल साहित्य और रंगमंच का खूबसूरत संगम देखने को मिला। लेखक किशन श्रीमान की चर्चित कहानी ‘पिद्दू चिड़ड़ू की कथा’ पर आधारित नाटक का मंचन संभोटा तिब्बतियन स्कूल, छोटा शिमला के विद्यार्थियों ने किया। बच्चों ने अपने सधे हुए अभिनय, संवाद अदायगी और मंचीय प्रस्तुति से कहानी के पात्रों को जीवंत कर दिया।
किकली चैरिटेबल ट्रस्ट और भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य बच्चों को रंगमंच से जोड़ने के साथ-साथ उनमें रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता को विकसित करना है। महोत्सव में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से साहित्यिक एवं सामाजिक विषयों को मंच पर प्रस्तुत कर रहे हैं।
कागज की कहानी जब मंच पर हुई जीवंत
‘पिद्दू चिड़ड़ू की कथा’ का मंचन लेखक किशन श्रीमान के लिए भी भावुक और यादगार क्षण रहा। जिस कहानी को उन्होंने कभी कागज पर शब्दों के माध्यम से रचा था, उसे बच्चों द्वारा संवाद, अभिनय, भाव-भंगिमा और मंचीय गतिविधियों के माध्यम से जीवंत होते देखना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।
किशन श्रीमान ने कहा कि एक लेखक के लिए इससे बड़ा आनंद और क्या हो सकता है कि उसकी कल्पना को कलाकार अपनी मेहनत और अभिनय से नया जीवन दें और दर्शक उसे पूरे मन से स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि कहानी लिखे जाने के बाद वह केवल लेखक की रचना नहीं रहती, बल्कि जब उसे मंच पर प्रस्तुत किया जाता है तो कलाकारों, निर्देशकों और दर्शकों का भी उससे भावनात्मक जुड़ाव हो जाता है।
बच्चों के अभिनय ने बांधा दर्शकों को
नाटक के दौरान विद्यार्थियों ने पात्रों के अनुरूप संवाद और भाव-भंगिमाओं का प्रभावी इस्तेमाल किया। मंच सज्जा, वेशभूषा, संगीत और तकनीकी सहयोग ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया। बच्चों की प्रस्तुति के दौरान दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी उत्साहवर्धक रहीं और कई अवसरों पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
लेखक ने नाटक के निर्देशक, सभी बाल कलाकारों, संगीत एवं तकनीकी टीम तथा आयोजन से जुड़े सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा साहित्यिक रचनाओं को मंच पर प्रस्तुत करना न केवल उनके भीतर कला के प्रति रुचि पैदा करता है, बल्कि उन्हें अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने और सामूहिक रूप से काम करने का अवसर भी देता है।
बाल रंगमंच से मिल रहा नई पीढ़ी को मंच
बाल रंगमंच महोत्सव बच्चों को अभिनय और रंगमंच की बारीकियों से परिचित कराने के साथ उन्हें साहित्य से जोड़ने का भी प्रयास है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों को मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और वे कहानी, संवाद, संगीत तथा अभिनय के विभिन्न पहलुओं को व्यावहारिक रूप से समझते हैं।
महोत्सव के दौरान प्रस्तुत की जा रही विभिन्न रचनाएं बच्चों को मनोरंजन के साथ सामाजिक और मानवीय मूल्यों से भी जोड़ रही हैं। गेयटी थिएटर जैसे ऐतिहासिक मंच पर बच्चों की प्रस्तुतियां शिमला की सांस्कृतिक गतिविधियों में नई पीढ़ी की भागीदारी को भी रेखांकित कर रही हैं।
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