CBI ने DGCA के पूर्व डायरेक्टर और अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया
नई दिल्ली, 23 अगस्त, 2026 (ANI): सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने कथित भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के सिलसिले में DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन) में फ्लाइंग ट्रेनिंग (DFT) के तत्कालीन डायरेक्टर कैप्टन अनिल गिल और कई कंपनियों व अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, CBI ने 21 अगस्त को 'प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट, 1988' (2018 में संशोधित) की धारा 11 और 12 तथा IPC की धारा 120B के तहत एक नियमित मामला दर्ज किया।
FIR में कहा गया है कि DGCA में फ्लाइंग ट्रेनिंग डायरेक्टर के तौर पर काम करते हुए अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल करने के आरोप में गिल के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद 7 अप्रैल, 2025 को एक प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज की गई थी।
FIR में आरोप लगाया गया है कि गिल ने चुनिंदा फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन्स (FTOs) को अनुचित आधिकारिक लाभ पहुँचाया, जिससे इसी तरह के काम करने वाले अन्य ऑपरेटर्स को नुकसान और आर्थिक हानि हुई।
विज्ञप्ति में आगे आरोप लगाया गया है कि गिल ने अपने करीबी रिश्तेदारों द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही बेनामी/शेल कंपनियों के माध्यम से कम कीमत पर ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट खरीदने में मदद की और बाद में उन्हें पसंदीदा FTOs को ऊँची दरों पर लीज़ पर दिया, जिससे कथित तौर पर अवैध आर्थिक लाभ कमाया गया।
विज्ञप्ति में बताया गया है कि 'ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड' (BAGPL) को 2016 में बनाया गया था, जिसके डायरेक्टर्स में गिल की माँ और मौसी शामिल थीं, जबकि बाद में उनके चचेरे भाई और भाभी भी कंपनी में शामिल हो गए।
FIR में यह भी कहा गया है कि 'सेबर्स कॉर्पोरेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड' और 'सैंडहिल्स एविएशन IFSC प्राइवेट लिमिटेड' जैसी अन्य कंपनियाँ भी गिल के रिश्तेदारों को डायरेक्टर बनाकर बनाई गई थीं।
FIR में कहा गया है कि BAGPL ने क्रमशः 10 लाख रुपये और 37.5 लाख रुपये में दो सेसना (Cessna) एयरक्राफ्ट खरीदे और बाद में दोनों एयरक्राफ्ट 'रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड' को लीज़ पर दिए; इसके लिए मंज़ूरी कथित तौर पर गिल ने अपनी आधिकारिक रेगुलेटरी हैसियत से दी थी।
FIR के अनुसार, 2021 और अक्टूबर 2023 के बीच, BAGPL ने अकेले 'रेडबर्ड एविएशन एकेडमी' से लीज़ रेंटल के तौर पर 2.16 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की। FIR में मंज़ूरी की प्रक्रिया में रेगुलेटरी पक्षपात का भी आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को अपनी शुरुआती FTO मंज़ूरी एक महीने और तीन दिन में मिल गई, जबकि दूसरी कंपनियों को मंज़ूरी मिलने में कथित तौर पर चार से छह महीने लगे।
इसमें यह भी कहा गया है कि गिल ने सितंबर 2022 में एक सिलेक्शन कमेटी की अध्यक्षता की थी, जिसने उनके चचेरे भाई विकास नैन को डिप्टी चीफ़ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के तौर पर नियुक्त किया था। बाद में रेडबर्ड एविएशन एकेडमी ने उन्हें लगभग 6.5 लाख रुपये की मासिक सैलरी पर नौकरी पर रखा।
FIR में कहा गया है कि सेबर्स कॉर्पोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन IFSC से जुड़े संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन भी पाए गए। साथ ही, गिल पर आरोप है कि उन्होंने एविएशन से जुड़ी गतिविधियों में अपने करीबी रिश्तेदारों की भागीदारी और नौकरी के बारे में जानकारी नहीं दी।
रिलीज़ के मुताबिक, CBI की FIR में कैप्टन अनिल गिल, ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड, सेबर्स कॉर्पोरेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, सैंडहिल्स एविएशन IFSC प्राइवेट लिमिटेड और अन्य अज्ञात सरकारी कर्मचारियों/निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।
जांच की ज़िम्मेदारी नई दिल्ली के AC-I के CBI इंस्पेक्टर आदित्य कुमार को सौंपी गई है। (ANI)
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