बद्दी के औद्योगिक प्रदूषण पर पंजाब और हिमाचल के सीएम से तत्काल बैठक की मांग, पर्यावरणविद् कर्नल जसजीत सिंह गिल ने भगवंत मान को भेजा पत्र
सरसा नदी के जरिए पंजाब में पहुंच रहे प्रदूषित पानी का मुद्दा उठाया
बाबूशाही ब्यूरो
चंडीगढ़ : 22 अगस्त 2026 : हिमाचल प्रदेश के बद्दी औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले प्रदूषित पानी का मुद्दा अब पंजाब सरकार के सामने उठाया गया है। पर्यावरणविद् और दिशा कमेटी लुधियाना के सदस्य कर्नल जसजीत सिंह गिल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ तत्काल बैठक कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
गिल ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि बद्दी औद्योगिक क्षेत्र का प्रदूषित पानी सरसा (सिरसा) नदी के जरिए पंजाब की सीमा में प्रवेश करता है। उनका दावा है कि इससे पंजाब में नदी और नहरों के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि इस मामले को केवल पंजाब की सीमा में पहुंचने के बाद नियंत्रित करने के बजाय प्रदूषण के स्रोत पर ही रोक लगाना जरूरी है।
सीमा पर रियल टाइम सेंसर लगाने की मांग
पर्यावरणविद् ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के चेयरमैन को निर्देश देकर हिमाचल, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर से पंजाब में प्रवेश करने वाले प्रमुख जल स्रोतों पर रियल टाइम जल गुणवत्ता निगरानी सेंसर लगाने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से सरसा नदी के पंजाब में प्रवेश बिंदु घनौली पर तत्काल निगरानी स्टेशन स्थापित करने का सुझाव दिया है।
उनका कहना है कि रियल टाइम निगरानी से यह पता चल सकेगा कि पंजाब में प्रवेश करने वाले पानी में प्रदूषण का स्तर कितना है और प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।
बद्दी में ही प्रदूषण रोकने पर जोर
गिल ने कहा कि पंजाब के हित में सबसे प्रभावी कदम यह होगा कि हिमाचल सरकार बद्दी औद्योगिक क्षेत्र में ही प्रदूषण को नियंत्रित करे। इसके लिए उन्होंने बद्दी के कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की क्षमता और कार्यप्रणाली में सुधार, उद्योगों से बिना उपचारित या आंशिक रूप से उपचारित पानी के बहाव पर रोक और अवैध डिस्चार्ज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में औद्योगिक इकाइयों की पाइपलाइनों में लीकेज और बाईपास रोकने, सभी संबंधित उद्योगों को सत्यापित ट्रीटमेंट सिस्टम से जोड़ने और नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई गई है।
औद्योगिक कचरे के साथ सीवेज भी बड़ी चुनौती
पत्र के अनुसार सरसा नदी में प्रदूषण का कारण केवल औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला अपशिष्ट नहीं है। बद्दी और आसपास के शहरी क्षेत्रों का घरेलू सीवेज भी नदी के प्रदूषण में योगदान कर सकता है। ऐसे में सीवरेज नेटवर्क और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का विस्तार कर घरेलू गंदे पानी को नदी में जाने से रोकने की मांग की गई है।
जीपीएस और सीसीटीवी निगरानी की भी मांग
गिल ने औद्योगिक अपशिष्ट ले जाने वाले टैंकरों की GPS आधारित ट्रैकिंग, महत्वपूर्ण स्थानों पर CCTV निगरानी और ऑनलाइन प्रदूषण निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि रियल टाइम निगरानी को केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित न रखकर नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई से जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि हिमाचल में पर्यावरण, उद्योग, शहरी विकास, जल शक्ति विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिलाकर एक संयुक्त रिवर रेजुवेनेशन कमेटी जैसी व्यवस्था बनाई जाए, जो बद्दी क्षेत्र से सरसा नदी तक प्रदूषण नियंत्रण की नियमित निगरानी करे।
केंद्र के स्तर पर भी मामला उठाने की मांग
कर्नल जसजीत सिंह गिल ने पंजाब सरकार से इस मुद्दे को केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के समक्ष भी उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि पंजाब में प्रवेश करने वाले अंतरराज्यीय जल स्रोतों के प्रदूषण को रोकने के लिए राज्यों के बीच समन्वित निगरानी व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से आग्रह किया कि पंजाब सरकार हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर युद्धस्तर पर प्रदूषण नियंत्रण की कार्ययोजना तैयार करवाए और पंजाब, जो इस प्रदूषण का कथित तौर पर downstream प्रभावित क्षेत्र है, निगरानी व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाए।
गिल ने कहा कि यदि बद्दी में ही औद्योगिक और घरेलू प्रदूषण को नियंत्रित कर लिया जाता है तो पंजाब में प्रवेश करने वाला सरसा नदी का पानी अपेक्षाकृत स्वच्छ होगा और सतलुज से जुड़े जल तंत्र पर पड़ने वाले downstream प्रभाव को कम किया जा सकेगा।
कर्नल जसजीत सिंह गिल ने स्वयं को पर्यावरणविद्, दिशा कमेटी लुधियाना का सदस्य और पंजाब स्टेट टास्क फोर्स ऑन बुद्ध दरिया रेजुवेनेशन प्रोजेक्ट का पूर्व सदस्य बताते हुए मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। (SBP)
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