भाजपा विधायक सुधीर के निशाने पर क्यों आए पुलिस अधिकारी, विजिलेंस पूछताछ के बीच DGP समेत तीन अफसरों पर विशेषाधिकार हनन का आरोप
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला : 22 अगस्त 2026 : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के बीच भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और सरकारी जांच एजेंसियों के बीच टकराव अब सदन तक पहुंचता नजर आ रहा है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस पूछताछ का सामना करने के बाद धर्मशाला विधायक सुधीर शर्मा ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की पहल की है।
सुधीर शर्मा का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई और उनके बयानों से एक निर्वाचित विधायक के अधिकारों और प्रतिष्ठा पर असर पड़ा है। ऐसे में उन्होंने इस मामले को विधानसभा के विशेषाधिकार के दायरे में उठाने का निर्णय लिया है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा सत्र शुरू होने के साथ ही सुधीर शर्मा को विजिलेंस ने शिमला मुख्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया था। उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ हुई। जांच एजेंसी ने उनकी आय, संपत्ति, निवेश, जमीन से जुड़े लेनदेन और मकान निर्माण पर खर्च से संबंधित जानकारी मांगी।
पूछताछ के बाद सुधीर शर्मा ने सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया। उनका कहना था कि संबंधित मामला धर्मशाला का है और जांच अधिकारी भी वहीं तैनात है, ऐसे में उन्हें शिमला बुलाने की आवश्यकता पर सवाल उठता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा सत्र के दौरान किसी मौजूदा विधायक को इस तरह पूछताछ के लिए बुलाना विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब विशेषाधिकार प्रस्ताव की पहल से यह विवाद जांच एजेंसी बनाम विधायक की लड़ाई से आगे बढ़कर विधानसभा के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा बन सकता है। यदि मामला सदन में उठता है तो पुलिस कार्रवाई, निर्वाचित प्रतिनिधि के विशेषाधिकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच नया टकराव देखने को मिल सकता है।
गौरतलब है कि सुधीर शर्मा पहले भी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार का मुद्दा उठा चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने पुलिस अधिकारी से जुड़े मामले में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था, हालांकि तत्कालीन नोटिस को अध्यक्ष ने खारिज कर दिया था।
मौजूदा घटनाक्रम में एक तरफ विजिलेंस आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर सुधीर शर्मा ने इसे राजनीतिक दबाव और विपक्ष की आवाज दबाने से जोड़ते हुए विधानसभा का रास्ता चुना है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला हिमाचल की सियासत में “जांच बनाम विशेषाधिकार” की नई बहस को जन्म दे सकता है।
विजिलेंस का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच जारी है और जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। एजेंसी के मुताबिक पूछताछ में संपत्ति, निवेश और मकान निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। बहरहाल उन्होंने डीजीपी समेत तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया है। (SBP)
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