रूसी सेना में भर्ती एक युवा पंजाबी गुरसेवक की युद्ध के दौरान मौत
रोहित गुप्ता, गुरदासपुर
गुरदासपुर: गुरदासपुर जिले के गांव घुमान के पास बोहजा गांव का रहने वाला सुखविंदर सिंह का बेटा गुरसेवक सिंह, जो रूस की सेना में भर्ती हुआ था, रूस और यूक्रेन के बीच हुए युद्ध के दौरान शहीद हो गया था। करीब आठ महीने बाद उसका शव रूस के राष्ट्रीय झंडे में लिपटा हुआ गांव बोहजा पहुंचा। जब युवक का शव गांव पहुंचा तो गांव वालों और परिवार में दुख की लहर दौड़ गई। सबकी आंखें नम थीं। मृतक युवक का गांव बोहजा के श्मशान घाट में नम आंखों से अंतिम संस्कार किया गया। चिता को मृतक गुरसेवक सिंह के छोटे भाई गुरबाज सिंह ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर मीडिया को जानकारी देते हुए मृतक युवक गुरसेवक सिंह के चाचा कुलविंदर सिंह और बोहजा के ब्लॉक समिति सदस्य मुख्तार सिंह ने बताया कि गुरसेवक सिंह कुछ साल पहले रोजी-रोटी कमाने के लिए वर्क परमिट पर जर्मनी गया था। और बाद में वह रूस पहुंचा और रूसी सेना में शामिल हो गया। जहां से वह 13 सितंबर 2025 से लापता था और उसके बाद उसका अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं था। उन्होंने कहा कि 7 मई 2026 को उन्हें पता चला कि गुरसेवक सिंह रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हो गए हैं। और आज उनका शव दिल्ली एयरपोर्ट से उनके पैतृक गांव बोहजा लाया गया। जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। उन्होंने कहा कि रूस की सेना ने गुरसेवक सिंह के शव को मिलिट्री यूनिफॉर्म और रूस के राष्ट्रीय झंडे में लपेटकर पूरे सम्मान और गरिमा के साथ भेजा है। उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की कि गुरसेवक सिंह का परिवार बहुत गरीब परिवार है और मृतक गुरसेवक सिंह के पिता सुखविंदर सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है। इस परिवार को हर संभव मदद दी जानी चाहिए।
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