New Tax in Himachal: हिमाचल प्रदेश में बिजली पर नया सेस: 10 नई श्रेणियों पर लगेगा ₹1 प्रति यूनिट अतिरिक्त शुल्क, जानें विस्तार
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 15 मई 2026 :
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त सेस लगाने का फैसला किया है। ऊर्जा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब होटल, निजी अस्पताल, पेट्रोल पंप, शॉपिंग मॉल और मल्टीप्लेक्स समेत 10 श्रेणियों के उपभोक्ताओं से बिजली खपत पर एक रुपये प्रति यूनिट की दर से सेस वसूला जाएगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
अधिसूचना में साफ किया गया है कि हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड इन उपभोक्ताओं से निर्धारित दर पर अतिरिक्त सेस की वसूली करेगा। यह आदेश हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी एक्ट 2009 की धारा 3-B के तहत जारी किया गया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला सार्वजनिक हित और बिजली क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लिया गया है।
जिन पर लगेगा ₹1 प्रति यूनिट सेस:बिजनेस हाउस (व्यावसायिक भवन)
बिजनेस हाउस
प्राइवेट ऑफिस
प्राइवेट अस्पताल
पेट्रोल पंप
होटल/मोटल
प्राइवेट नर्सिंग होम
प्राइवेट रिसर्च संस्थान
प्राइवेट कोचिंग संस्थान
शॉपिंग मॉल
मल्टीप्लेक्स
फरवरी 2025 में लगा था दूध और पर्यावरण सेस
हिमाचल प्रदेश में फरवरी 2025 से उपभोक्ताओं के बिजली बिल में दूध और पर्यावरण सेस शामिल किया गया था। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के दस पैसे प्रति यूनिट और अन्य के दो पैसे से छह रुपये प्रति यूनिट तक बिजली के दाम बढ़ गए थे। साल 2024 के विधानसभा मानसून सत्र में पारित विद्युत शुल्क संशोधन अधिनियम 2024 के तहत यह सेस लगाया गया है। घरेलू उपभोक्ताओं पर सिर्फ दूध सेस लगा है, जबकि अन्य सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को दूध के साथ पर्यावरण सेस भी चुकाना पड़ रहा है।
शून्य बिल वाले घरेलू उपभोक्ताओं से दूध उपकर नहीं लिया जाता है। सरकार ने दिसंबर 2025 में बैंकिंग, वित्त और बीमा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों पर पर प्रति यूनिट बिजली खपत पर दो रुपये की दर से सेस लगाया था।
सुधीर शर्मा ने साधा निशाना
हिमाचल सरकार के इस फैसले को लेकर भाजपा विधायक और पूर्व शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई और अब बिजली पर नया सेस लगाकर जनता और कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अधिसूचना साझा करते हुए लिखा कि यह फैसला सरकार की आर्थिक नीतियों और व्यवस्था पतन को दर्शाता है। (SBP)
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