Himachal Pradesh : Fish Catch Royalty Reduced : प्रदेश सरकार ने मत्स्य आखेट पर रॉयल्टी घटाकर की एक प्रतिशत
Babushahi Bureau
शिमला: 03 जून 2024 : राज्य के विभिन्न जलाशयों में मत्स्य पालन गतिविधियों से जुड़े मछुआरों की आय को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा के अनुरूप जलाशयों से होने वाली मत्स्य आखेट पर लगने वाली रॉयल्टी को 7.5 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। इससे पूर्व राज्य सरकार ने पिछले वर्ष भी रॉयल्टी दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया था।
इस निर्णय से गोबिंद सागर, पोंग बांध, चमेरा, रंजीत सागर तथा कोल बांध जलाशयों पर आजीविका के लिए निर्भर 6,500 से अधिक मछुआरा परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। यह पहल मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा पोषण और प्रोटीन सुरक्षा में भी उल्लेखनीय योगदान देता है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार नीति समर्थन, बुनियादी ढांचे के विकास और मूल्य संवर्धन पहलों के माध्यम से मछुआरों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रॉयल्टी और लाइसेंस शुल्क में की गई कमी से मछुआरों को महत्वपूर्ण आर्थिक राहत मिलेगी, उनकी आजीविका में सुधार होगा तथा उनके जीवन स्तर में समग्र रूप से वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने मत्स्य विभाग को निर्देश दिए कि संशोधित नीति के लाभ सभी पंजीकृत मछुआरों तक पहुंचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि पूर्व की रॉयल्टी व्यवस्था का प्रतिकूल प्रभाव मछुआरा सहकारी समितियों और व्यक्तिगत मछुआरों की आय पर पड़ रहा था। रॉयल्टी को एक प्रतिशत तक घटाने से लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त जलाशय क्षेत्रों से होने वाले पलायन को हतोत्साहित किया जा सकेगा तथा राज्य की उभरती हुई ब्लू इकोनॉमी को प्रोत्साहन मिलेगा।
सुक्खू ने कहा कि सरकार मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए कई कदम उठा रही है, जिनमें मछली अवतरण केन्द्रों का विकास, आइस बॉक्स उपलब्ध करवाना तथा विपणन सम्पर्कों को मजबूत करना शामिल है ताकि मछली उत्पादों के बेहतर मूल्य सुनिश्चित किए जा सके। रॉयल्टी में कमी के साथ यह पहल मछुआरों की शुद्ध आय बढ़ाने और मत्स्य पालन को ग्रामीण युवाओं के लिए अधिक टिकाऊ एवं आकर्षक आजीविका विकल्प बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय मछुआरों की मेहनत और उनके योगदान का सम्मान करने के साथ-साथ समावेशी ग्रामीण विकास तथा जलाशय-निर्भर समुदायों की आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। (SBP)
Click to Follow बाबूशाही हिन्दी फेसबुक पेज →