राजनीति : पुरानी चार्जशीट, नए सियासी निशाने: कांग्रेस छोड़कर भाजपा में पहुंचे नेताओं पर फिर क्यों गरमाई राजनीति?
शशिभूषण पुरोहित
शिमला : 19 अगस्त 2026 : हिमाचल की सियासत में करीब एक दशक पुराने आरोप-पत्र की फाइल एक बार फिर खुल गई है। फर्क सिर्फ इतना है कि जिस चार्जशीट को कभी भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपना बड़ा राजनीतिक हथियार बनाया था, आज उसी के आरोप कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जा चुके नेताओं के खिलाफ चर्चा में हैं।
मामला वीरभद्र सिंह सरकार के कार्यकाल से जुड़ी उस चार्जशीट का है, जिसमें तत्कालीन मंत्रियों, विधायकों और अन्य नेताओं पर भ्रष्टाचार से लेकर सरकारी धन के दुरुपयोग, आय से अधिक संपत्ति और भर्ती में अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। भाजपा ने यह चार्जशीट तत्कालीन राज्यपाल को सौंपी थी।
सियासी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट
चार्जशीट में जिन नेताओं का नाम या उनके कार्यकाल से जुड़े आरोप चर्चा में थे, उनमें से कुछ नेता आज कांग्रेस में नहीं हैं। सुधीर शर्मा, राजेंद्र राणा, अनिल शर्मा और हर्ष महाजन जैसे नेता अलग-अलग समय में कांग्रेस छोड़कर भाजपा के साथ जा चुके हैं। यही वजह है कि पुरानी चार्जशीट अब हिमाचल की मौजूदा सियासत में एक नए संदर्भ के साथ सामने आई है।
हालांकि, इन आरोपों को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्धि नहीं हैं। राजनीतिक आरोपों और किसी सक्षम जांच अथवा अदालत में सिद्ध अपराध के बीच अंतर रहता है।
सुधीर शर्मा ने उठाया बड़ा सवाल
मौजूदा विवाद पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने पलटवार किया है। उनका कहना है कि यह मामला उस समय का है जब वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे और वह स्वयं सरकार में मंत्री थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन आरोपों के जरिए तत्कालीन पूरी कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।
सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े मौजूदा मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए पुराने मामलों को राजनीतिक तरीके से उछाला जा रहा है।
सीएम सुक्खू का पलटवार, 'आरोप हमने नहीं लगाए'
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा। उनका कहना है कि ये आरोप वर्ष 2017 में भाजपा के शासनकाल से पहले लगाए गए थे और इन्हें उन्होंने नहीं लगाया था। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार पर श्वेत पत्र लाने की बात भी कही है।
असली सवाल: चार्जशीट या सियासी चार्जशीट?
हिमाचल की राजनीति में अब असली सवाल आरोपों से ज्यादा उनके राजनीतिक इस्तेमाल का है। एक तरफ कांग्रेस पुरानी भाजपा की चार्जशीट के आरोपों को सामने रखकर भाजपा में गए नेताओं को घेर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा और उसके नेता कांग्रेस सरकार के खिलाफ नई चार्जशीट तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। भाजपा ने जुलाई 2026 में कांग्रेस सरकार के करीब साढ़े तीन साल के कार्यकाल को लेकर व्यापक चार्जशीट तैयार करने की घोषणा की थी।
यानी हिमाचल की राजनीति में चार्जशीट अब सिर्फ आरोपों का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी मुकाबले की राजनीतिक पटकथा का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है।
पुरानी फाइलें खुल रही हैं, पुराने आरोप दोहराए जा रहे हैं और दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ आरोपों का दस्तावेज तैयार कर रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हिमाचल की सियासत में 'चार्जशीट बनाम चार्जशीट' का मुकाबला और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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