अनुराग ठाकुर
अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी को दी बहस की चुनौती, 1984 के दंगों पर घेरा
लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना, सिख समुदाय के जख्मों का भी उठाया मुद्दा
बाबूशाही ब्यूरो
कांगड़ा: 04 नवंबर 2026: भाजपा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं और वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कई सवाल उठाए। बुधवार को कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती देने पर पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और फिर संसद से बाहर बहस की बात करने का आरोप लगाया।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि देश में सबसे लंबे समय तक शासन करने का अवसर प्राप्त करने वाली कांग्रेस आज लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने में लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार चुनावी हार के बाद ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के भरोसे को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। ठाकुर के इस बयान के साथ एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच लोकतंत्र, चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर टकराव सामने आया है।
संसद में चर्चा नहीं, बाहर बहस की बात क्यों?
राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती देने के मुद्दे पर अनुराग ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब संसद देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का मंच है, तो वहां कार्यवाही में बाधा डालने के बाद बाहर बहस की बात क्यों की जाती है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि विपक्षी दल संसद में चर्चा के अवसरों का समुचित उपयोग नहीं कर रहा और राजनीतिक मुद्दों को लेकर बाहर बयानबाजी कर रहा है। ठाकुर के मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद की भूमिका महत्वपूर्ण है और राजनीतिक दलों को सदन के भीतर संवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, बहस को लेकर दोनों पक्षों के राजनीतिक तर्कों के बीच यह सवाल भी अहम है कि संसद में सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों किस तरह निभाते हैं।
'वोट चोरी' नहीं, जनता ने कांग्रेस को वोट देना बंद किया: ठाकुर
चुनावी प्रक्रिया और ईवीएम को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी अनुराग ठाकुर ने निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस की चुनावी हार को लेकर कहा कि पार्टी को आत्ममंथन करना चाहिए, न कि बार-बार चुनावी व्यवस्था पर सवाल खड़े करने चाहिए। ठाकुर ने कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा कि चीन के दार्शनिक कन्फ्यूशियस थे, लेकिन कांग्रेस के नेता 'कन्फ्यूज अस' हैं। उनके इस कटाक्ष का निशाना कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और नेतृत्व रहा। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है, तो उसे उन चुनावों पर भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए, जिनमें इसी व्यवस्था के तहत पार्टी को जीत मिली है। भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी नतीजों को स्वीकार करने के बजाय ईवीएम, चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा कर रही है। ये आरोप अनुराग ठाकुर के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। चुनावी अनियमितताओं से जुड़े किसी भी दावे का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों, शिकायतों और आधिकारिक जांच के आधार पर किया जाना जरूरी है।
1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाकर कांग्रेस को घेरा
कांगड़ा एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनुराग ठाकुर ने पंजाब की राजनीति और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जुड़े सवालों के बीच 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कांग्रेस से वर्ष 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा के लिए देश और सिख समाज से माफी मांगने की मांग की। ठाकुर ने कहा कि उस हिंसा के जख्म आज भी सिख समुदाय के मन में मौजूद हैं और कांग्रेस को अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारियों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस दौर से जुड़े बयान का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेतृत्व को घेरा और राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वह सिखों के खिलाफ हुए अत्याचारों को उचित मानते हैं? अनुराग ठाकुर ने कहा कि यदि कांग्रेस अपनी ऐतिहासिक गलतियों को स्वीकार करने के लिए तैयार है, तो राहुल गांधी को पंजाब जाकर सिख समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों और पीड़ितों के लिए न्याय, जवाबदेही और स्मृति आज भी महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे में इस त्रासदी का राजनीतिक विमर्श में बार-बार सामने आना इसकी संवेदनशीलता को भी रेखांकित करता है।
पंजाब की राजनीति में फिर गरमाया 1984 का मुद्दा
पंजाब में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा राजनीतिक बहस में फिर प्रमुखता से उभर रहा है। कांग्रेस और भाजपा के बीच इस विषय पर आरोप-प्रत्यारोप का असर पंजाब की राजनीतिक चर्चा पर भी पड़ सकता है। अनुराग ठाकुर का बयान ऐसे समय में आया है, जब चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और विपक्ष की राजनीति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस चल रही है। भाजपा जहां कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है, वहीं चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब तथ्यों और पारदर्शिता के आधार पर दिया जाना लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
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