Himachal Breaking: हिमाचल में नशे पर बड़ा प्रहार: स्कूलों और प्रोफेशनल कोर्सेज में दाखिले से पहले होगा ‘चिट्टा टेस्ट’; CM सुक्खू का बड़ा ऐलान
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला, 11 मई 2026 :हिमाचल प्रदेश में बढ़ते नशे के खतरे के बीच मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने बड़ा और सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं। सरकार अब स्कूलों और प्रोफेशनल कोर्सेज में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए ड्रग्स स्क्रीनिंग यानी “चिट्टा टेस्ट” लागू करने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना और शैक्षणिक संस्थानों को नशामुक्त बनाना बताया जा रहा है।
प्रदेश सरकार पहले ही नशे के खिलाफ व्यापक अभियान चला रही है। अब शिक्षा संस्थानों को भी इस अभियान से सीधे जोड़ने की रणनीति बनाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मेडिकल, पैरामेडिकल, इंजीनियरिंग, नर्सिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज में प्रवेश के दौरान विद्यार्थियों की ड्रग्स जांच करवाई जा सकती है। इसके अलावा वरिष्ठ कक्षाओं में भी समय-समय पर टेस्ट करवाने पर विचार किया जा रहा है।
सरकार की चिंता: युवाओं में तेजी से फैल रहा चिट्टा
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में चिट्टे और सिंथेटिक ड्रग्स के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। खासकर कॉलेज और स्कूल जाने वाले युवाओं में इसकी पहुंच सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। मुख्यमंत्री सुक्खू कई मंचों से यह कह चुके हैं कि नशा हिमाचल की नई पीढ़ी को खोखला कर रहा है और इसके खिलाफ कठोर कदम उठाना जरूरी है।
सरकार का मानना है कि यदि शिक्षा संस्थानों में शुरुआती स्तर पर ही ड्रग्स की पहचान हो जाए तो युवाओं को समय रहते काउंसलिंग और उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। यही कारण है कि अब “प्री-एडमिशन ड्रग स्क्रीनिंग” मॉडल पर मंथन शुरू हुआ है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी
प्रदेश सरकार पहले ही शिक्षा क्षेत्र में कई सुधारों की घोषणा कर चुकी है। स्कूलों में मोबाइल फोन प्रतिबंध, आधुनिक शिक्षा प्रणाली, डिजिटल मॉनिटरिंग और स्कूल ऑफ एक्सीलेंस जैसी योजनाएं लागू की जा रही हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने हाल ही में कहा था कि सरकार शिक्षा को पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और अनुशासित बनाने की दिशा में काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ड्रग्स टेस्ट नीति लागू होती है तो हिमाचल देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो सकता है, जहां शिक्षा संस्थानों में प्रवेश से पहले नशा जांच को औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा।
सामाजिक संगठनों ने किया स्वागत
नशे के खिलाफ काम करने वाले कई सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने सरकार के इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। उनका कहना है कि चिट्टे ने हिमाचल के गांवों तक अपनी पहुंच बना ली है और अब कठोर सामाजिक एवं प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
हालांकि, कुछ शिक्षा विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि इस तरह की नीति लागू करते समय विद्यार्थियों की गोपनीयता, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास व्यवस्था का विशेष ध्यान रखना होगा, ताकि इसे दंडात्मक नहीं बल्कि सुधारात्मक अभियान के रूप में लागू किया जा सके।
सरकार जल्द ला सकती है विस्तृत नीति
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और गृह विभाग मिलकर इस संबंध में विस्तृत नीति तैयार कर सकते हैं। इसमें टेस्ट की प्रक्रिया, रिपोर्टिंग सिस्टम, काउंसलिंग और पुनर्वास से जुड़े प्रावधान शामिल किए जाएंगे। आने वाले समय में इस मुद्दे पर कैबिनेट स्तर पर चर्चा भी संभव मानी जा रही है। (SBP)
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