AIMS Bilaspur: Himachal: थायराइड की गांठों में कैंसर के खतरे का शुरुआती स्तर पर लग जाएगा पता, शोध शुरू
बाबूशाही ब्यूरो
बिलासपुर: 19 जून 2026 :
एम्स बिलासपुर में थायराइड कैंसर की पहचान को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनेटिक टेस्टिंग आधारित एक महत्वाकांक्षी शोध परियोजना शुरू की जा रही है।
यह परियोजना थायराइड की गांठों के जोखिम मूल्यांकन और कैंसर की संभावनाओं का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रोजेक्ट के सफल होने पर थायराइड कैंसर के निदान में अनावश्यक सर्जरी और अतिरिक्त जांचों की आवश्यकता कम हो सकती है। एम्स बिलासपुर के पैथोलॉजी एवं लैब मेडिसिन विभाग में शुरू हो रहे इस शोध का शीर्षक एआई-इनेबल्ड मल्टीमॉडल रिस्क स्ट्रैटिफिकेशन ऑफ थायराइड नोड्यूल्स यूजिंग साइटोलॉजी इमेजिंग एंड ए टारगेटेड 6 जीन म्यूटेशन पैनल है।
परियोजना को विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड के अंतर्गत एएनआरएफ प्रधानमंत्री अर्ली करियर रिसर्च ग्रांट से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। परियोजना के मुख्य अन्वेषक एवं एम्स बिलासपुर के पैथोलॉजी एवं लैब मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर हैं। उनके नेतृत्व में शोध दल थायराइड की गांठों के मूल्यांकन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जेनेटिक विश्लेषण का संयुक्त मॉडल विकसित करेगा। थायराइड की गांठें आम समस्या हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम गांठें कैंसर ग्रस्त होती हैं। वर्तमान में ऐसी गांठों की जांच के लिए फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि कई मामलों में जांच रिपोर्ट अस्पष्ट या संदिग्ध श्रेणी में आती है, जिससे यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि मरीज को सर्जरी की जरूरत है या नहीं। इसी चुनौती को दूर करने के लिए इस परियोजना में दो आधुनिक तकनीकों को एक साथ उपयोग में लाया जाएगा।
पहली तकनीक के तहत साइटोलॉजी स्लाइड्स और कोशिकाओं की डिजिटल इमेज का विश्लेषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किया जाएगा। दूसरी तकनीक के तहत मरीजों के नमूनों में छह प्रमुख जीनों में होने वाले म्यूटेशन की जांच की जाएगी। इन दोनों जानकारियों को मिलाकर एक ऐसा रिस्क असेसमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा, जो थायराइड की गांठों के कैंसरग्रस्त होने की संभावना का अधिक सटीक अनुमान दे सके।
विशेषज्ञों के अनुसार इससे मरीजों को समय पर सही उपचार मिल सकेगा तथा अनावश्यक ऑपरेशन और चिकित्सा खर्च को भी कम करने में मदद मिलेगी। परियोजना के संचालन के लिए एम्स बिलासपुर ने एक तकनीकी पद पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। लैबोरेटरी असिस्टेंट/टेक्नीशियन/प्रोजेक्ट असिस्टेंट/टेक्निकल असिस्टेंट के एक पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। चयनित अभ्यर्थी को 27,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय तथा नियमानुसार हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) प्रदान किया जाएगा। उम्मीदवार की अधिकतम आयु 50 वर्ष निर्धारित की गई है।
यह होगी शैक्षणिक योग्यता
आवेदक के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से विज्ञान विषय में स्नातक (बीएससी) की डिग्री अथवा इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी में तीन वर्षीय डिप्लोमा होना चाहिए।।इसके अलावा मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, डीएनए एवं आरएनए एक्सट्रैक्शन, पीसीआर/क्यूपीसीआर तकनीक, साइटोपैथोलॉजी, डिजिटल पैथोलॉजी, डेटा मैनेजमेंट तथा कंप्यूटर एप्लीकेशन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
तीन वर्ष तक बढ़ सकता है कार्यकाल
यह नियुक्ति पूरी तरह अस्थायी और परियोजना आधारित होगी। चयनित उम्मीदवार की प्रारंभिक नियुक्ति 16 फरवरी 2027 तक रहेगी। हालांकि कार्य प्रदर्शन और परियोजना के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर कार्यकाल को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा सकता है। कुल अवधि अधिकतम तीन वर्ष तक हो सकती है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि इस नियुक्ति के आधार पर एम्स बिलासपुर में स्थायी नौकरी का कोई अधिकार या दावा मान्य नहीं होगा।
7 जुलाई तक कर सकेंगे आवेदन
इच्छुक उम्मीदवारों को अपना अद्यतन बायोडाटा, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों को एक संयुक्त पीडीएफ फाइल में तैयार कर निर्धारित ईमेल आईडी पर भेजना होगा। इसके साथ ही विज्ञापन में उपलब्ध गूगल फॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन भरना भी अनिवार्य है।।आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 7 जुलाई 2026 को शाम पांच बजे निर्धारित की गई है। आवेदन पत्रों की जांच के बाद शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा या साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। इसकी सूचना ईमेल अथवा एम्स बिलासपुर की वेबसाइट के माध्यम से दी जाएगी। (SBP)
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