UPI पर MDR से व्यापारियों की लागत बढ़ने की आशंका — हरियाणा व्यापार मंडल ने सरकार से पुनर्विचार की मांग की
रोहतक/हरियाणा, 16 सितंबर 2026:
हरियाणा व्यापार मंडल ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था के अंतर्गत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारी लेन-देन पर लागू किए गए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर व्यापारिक समुदाय की चिंताओं को गंभीरता से उठाया है।
हरियाणा व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष श्री विजय लक्ष्मी चंद गुप्ता ने कहा कि UPI ने देश के व्यापारिक एवं आर्थिक तंत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। छोटे दुकानदार, खुदरा व्यापारी, सेवा प्रदाता और बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान—सभी के लिए UPI आज भुगतान प्राप्त करने का तेज, सुविधाजनक और पारदर्शी माध्यम बन चुका है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले वर्षों में डिजिटल भुगतान को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया है और व्यापारी समुदाय ने भी इस परिवर्तन को खुले मन से अपनाया है। ऐसे समय में व्यापारी लेन-देन की लागत बढ़ाने वाला कोई भी प्रावधान विशेषकर छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए अतिरिक्त वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है।
सरकार की 15 सितंबर 2026 की जानकारी के अनुसार ₹2,000 से अधिक के कुछ P2M लेन-देन पर 0.4% MDR लागू होगा, जबकि कई छोटे व्यापारी लेन-देन zero-MDR व्यवस्था के अंतर्गत बने रहेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से वसूला जाने वाला सरकारी टैक्स नहीं है।
श्री विजय लक्ष्मी चंद गुप्ता ने कहा,
“व्यापारी पहले से ही GST, आयकर, बिजली-पानी, किराया, कर्मचारियों के वेतन, परिवहन, बैंकिंग तथा लगातार बढ़ती परिचालन लागत जैसी अनेक जिम्मेदारियां वहन कर रहा है। डिजिटल भुगतान को व्यापार की सुविधा और पारदर्शिता का माध्यम बनाया गया है। इसलिए हमारी मांग है कि व्यापारियों के लिए UPI भुगतान की लागत न्यूनतम रखी जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे डिजिटल भुगतान अपनाने वाले व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।”
उन्होंने कहा कि व्यापारी UPI और डिजिटल इंडिया के पूरी तरह समर्थक हैं, लेकिन डिजिटल भुगतान की बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए इसके संचालन की लागत का ऐसा समाधान आवश्यक है जिससे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
व्यापार मंडल की प्रमुख मांगें
1. ₹2,000 से अधिक के व्यापारी UPI लेन-देन पर MDR की व्यवस्था की व्यापारिक लागत और उसके प्रभाव की समीक्षा की जाए।
2. छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को अतिरिक्त भुगतान लागत से सुरक्षित रखने के लिए zero-MDR व्यवस्था को अधिक व्यापक बनाया जाए।
3. छोटे व्यापारियों के लिए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए जिसमें डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत उनके व्यापारिक मार्जिन को प्रभावित न करे।
4. UPI भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता रखते हुए व्यापारियों को MDR, उसकी दर और उसके वास्तविक प्रभाव की स्पष्ट जानकारी दी जाए।
5. डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार, बैंकिंग संस्थानों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच ऐसा मॉडल विकसित किया जाए जिसमें लागत का पूरा भार व्यापारियों पर न आए।
श्री गुप्ता ने कहा कि व्यापारी डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और डिजिटल भुगतान के विस्तार में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी नई भुगतान लागत या शुल्क व्यवस्था को लागू करते समय व्यापारियों, विशेषकर छोटे और मध्यम व्यापारियों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
उन्होंने केंद्र सरकार एवं संबंधित संस्थाओं से आग्रह किया कि व्यापारी संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर UPI की ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए जो डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे, ग्राहकों के लिए सुविधाजनक रहे और व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव न डाले।
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