कलगीधर ट्रस्ट के विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस कार्यक्रम में वास्तविक जीवन के अनुभव रहे केंद्र में 2026 के शोध में किशोरों की नींद पर सोशल मीडिया का प्रभाव
Babushahi Network
चंडीगढ़, 11 अक्टूबर 2026: कलगीधर ट्रस्ट बड़ू साहिब ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर “सुखमन 2026 – मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े वास्तविक जीवन के अनुभव” कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें व्यक्तिगत अनुभवों, विशेषज्ञों के विचारों, नाट्य प्रस्तुति और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से करुणा, समावेशिता और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अकाल अकादमी के विद्यार्थियों द्वारा शब्द कीर्तन से हुई। इसके बाद अकाल मनोरोग एवं नशा मुक्ति केंद्रों के निदेशक डॉ. (कर्नल) राजिंदर सिंह ने स्वागत संबोधन में कहा, “हर मानसिक स्वास्थ्य समस्या या नशे की लत के पीछे एक इंसान और उसकी कहानी होती है, जिसे सुना जाना चाहिए। स्वस्थ होने के लिए केवल उपचार ही नहीं, बल्कि सम्मान, समझ तथा परिवार और समाज का निरंतर सहयोग भी आवश्यक है।” गुरबाणी हीलिंग के संस्थापक सरदार हरदियाल सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। आध्यात्मिक शक्ति और करुणा के महत्व पर उन्होंने कहा, “सच्चा कल्याण आंतरिक शक्ति, जीवन के उद्देश्य और सार्थक मानवीय संबंधों से आता है। करुणा और आध्यात्मिक ज्ञान लोगों को जीवन की भावनात्मक चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकते हैं।” मंथन ग्रुप की विचारोत्तेजक नाट्य प्रस्तुति में डिजिटल लत तथा रिश्तों, नींद और भावनात्मक स्वास्थ्य पर उसके प्रभाव को दर्शाया गया। अप्रैल 2026 में प्रकाशित प्यू रिसर्च सेंटर के अध्ययन के अनुसार, अमेरिका में टिकटॉक इस्तेमाल करने वाले 37% किशोरों ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म से उनकी नींद पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। यह आंकड़ा स्वस्थ डिजिटल आदतों और सार्थक मानवीय संबंधों की आवश्यकता को रेखांकित करता है। नशे की लत पर एक वीडियो प्रस्तुति के बाद नशे से उबर चुके पूर्व रोगी, मार्गदर्शक और लेखक विक्रम सेठी ने गीत प्रस्तुत किया, जिसमें उनके उपचार और पुनर्वास की यात्रा की झलक मिली। कलगीधर ट्रस्ट से जुड़े भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) में पंजीकृत विशेष शिक्षक जगदीप सिंह ने तनाव, चिंता और अवसाद पर संवादात्मक सत्र लिया। ट्रस्ट की मनोवैज्ञानिक सिमरनजीत कौर ने तनाव कम करने और विश्राम की व्यावहारिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। सोरेम स्कूल की प्रिंसिपल संगीता जैन ने दिव्यांगता, देखभाल करने वाले परिजनों के मानसिक स्वास्थ्य तथा दिव्यांग व्यक्तियों और उनके परिवारों के सामने आने वाली भावनात्मक चुनौतियों पर विचार साझा किए। ऑटिज़्म से प्रभावित एक बच्चे के देखभालकर्ता ने अपने व्यक्तिगत अनुभव बताए और सहानुभूति, समावेशिता तथा पारिवारिक सहयोग का महत्व उजागर किया। पीजीआई के प्रोफेसर डॉ. तरनदीप सिंह ने भावनात्मक दृढ़ता और सामुदायिक कल्याण को मजबूत करने में आध्यात्मिकता, सेवा और करुणा की भूमिका पर चर्चा की। “थ्राइव बोर्ड” पर दर्शकों ने “जीवन में कैसे आगे बढ़ें और बेहतर जीवन जिएँ” विषय पर अपने संदेश चिपकाए, जो आशा और सहयोग की सामूहिक अभिव्यक्ति बने। कार्यक्रम स्थल पर चढ़दीकला स्टूडियो का स्टॉल, मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित पुस्तकों का स्टॉल और सोरेम स्कूल का स्टॉल भी लगाया गया, जहाँ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों द्वारा बनाई गई हस्तनिर्मित वस्तुएँ प्रदर्शित की गईं। वास्तविक जीवन के अनुभवों और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से सुखमन 2026 ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को दूर कर समझ, समय पर सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। कलगीधर ट्रस्ट द्वारा चीमा साहिब (पंजाब) और बड़ू साहिब (हिमाचल प्रदेश) में संचालित अकाल मनोरोग एवं नशा मुक्ति केंद्र चिकित्सा देखभाल, परामर्श, आध्यात्मिकता और सामुदायिक सहभागिता के समन्वित दृष्टिकोण से समग्र उपचार और पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करते हैं।
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