दशहरा उत्सव से पहले कुल्लू में ट्रैफिक व्यवस्था की तैयारी, सर्किट हाउस से मियां बेहड़ तक नो पार्किंग
30 दिन तक सड़क किनारे वाहन खड़े करने पर रहेगी रोक, 16 अक्तूबर से 15 नवंबर तक लागू रहेगी व्यवस्था; एंबुलेंस और अग्निशमन वाहनों की आवाजाही सुचारू रखने पर जोर
बाबूशाही ब्यूरो
कुल्लू, 16 अक्तूबर: 2026: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के मद्देनजर जिला प्रशासन ने शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की तैयारियां तेज कर दी हैं। उत्सव के दौरान बढ़ने वाली आवाजाही और शहर की सड़कों पर यातायात के दबाव को देखते हुए सर्किट हाउस कुल्लू से शेर सिंह की दुकान (मियां बेहड़) तक सड़क मार्ग को प्रारंभिक तौर पर 30 दिनों के लिए नो पार्किंग जोन घोषित किया गया है। इस अवधि में संबंधित सड़क पर वाहनों की पार्किंग की अनुमति नहीं होगी।
जिला प्रशासन का यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के दौरान कुल्लू शहर में स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बढ़ती है। ऐसे में संकरे सड़क मार्गों पर बेतरतीब पार्किंग यातायात में बाधा बन सकती है। प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना का उद्देश्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही सुचारू रखने के साथ पैदल चलने वालों और आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ता खुला रखना है।
17 अक्तूबर से 15 नवंबर तक लागू रहेगी व्यवस्था
उपायुक्त एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. अमित कुमार शर्मा ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 एवं 117 के तहत इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इसके अनुसार सर्किट हाउस कुल्लू से शेर सिंह की दुकान, मियां बेहड़ तक सड़क को प्रारंभिक तौर पर 30 दिनों के लिए नो पार्किंग जोन घोषित किया गया है। यह व्यवस्था 16 अक्तूबर से 15 नवंबर, 2026 तक प्रभावी रहेगी। निर्धारित अवधि के दौरान इस सड़क मार्ग पर वाहन खड़े करने से यातायात बाधित न हो, इसके लिए पार्किंग पर प्रतिबंध लागू रहेगा।
संकरी सड़क पर पार्किंग से बढ़ती है परेशानी
प्रशासन के अनुसार, संबंधित सड़क मार्ग संकरा होने के कारण सड़क किनारे वाहन खड़े करने से आवागमन प्रभावित होता है। इससे अन्य वाहनों के गुजरने में परेशानी होती है और पैदल चलने वालों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव जैसे बड़े आयोजन के दौरान शहर में यातायात प्रबंधन की चुनौती और बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क की उपलब्ध चौड़ाई का बेहतर इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण हो जाता है। सड़क किनारे खड़े वाहन आवागमन के लिए उपलब्ध जगह कम कर देते हैं, जिससे यातायात बाधित होने की आशंका रहती है।
आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता खुला रखना जरूरी
नो पार्किंग व्यवस्था लागू करने के पीछे एक प्रमुख उद्देश्य एंबुलेंस और अग्निशमन वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना भी है। किसी दुर्घटना, आगजनी या अन्य आपात स्थिति में इन वाहनों को बिना अनावश्यक रुकावट के घटनास्थल तक पहुंचना जरूरी होता है। सड़क पर वाहनों की पार्किंग के कारण यदि रास्ता संकरा हो जाए, तो आपातकालीन सेवाओं को मौके पर पहुंचने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में प्रशासन इस सड़क मार्ग पर पार्किंग प्रतिबंध के माध्यम से यातायात को व्यवस्थित रखने की दिशा में कदम उठा रहा है।
फिलहाल 30 दिन का परीक्षण, फिर जारी होगी अंतिम अधिसूचना
जिला प्रशासन ने इस व्यवस्था को प्रारंभिक तौर पर लागू किया है, ताकि मौके पर इसकी व्यवहारिकता और प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके। इसके साथ ही आम जनता से निर्धारित अवधि के भीतर इस संबंध में अपने सुझाव, आपत्तियां और दावे प्रस्तुत करने का आग्रह किया गया है। अधिसूचना के अनुसार, निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद प्राप्त आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके बाद प्रशासन की ओर से अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
दशहरा उत्सव में यातायात प्रबंधन पर रहेगा जोर
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव जिले का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है। इस दौरान शहर में वाहनों और लोगों की आवाजाही बढ़ने से यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। संकरे मार्गों पर पार्किंग नियंत्रित करना इसी व्यापक चुनौती से निपटने की तैयारी का हिस्सा है। सर्किट हाउस से मियां बेहड़ तक लागू की गई नो पार्किंग व्यवस्था का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्धारित क्षेत्र में इसका पालन किस तरह सुनिश्चित किया जाता है। आम लोगों से भी अपेक्षा है कि वे सड़क किनारे वाहन खड़े करने से बचें और यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
- Download Babushahi Hindi App
-
-
Click to Follow बाबूशाही हिन्दी फेसबुक पेज →