अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 97 के करीब पहुंचा
बाबूशाही ब्यूरो
नई दिल्ली, 20 मई, 2026 — बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.88 पर गिर गया। इसकी वजह यह रही कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और अमेरिकी मुद्रा की लगातार बढ़ती ताकत ने उभरते बाजारों की मुद्राओं पर भारी दबाव डाला।
रुपये में आई इस भारी गिरावट ने आयात लागत में बढ़ोतरी, महंगाई के दबाव और वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। कमजोर रुपया भारत के लिए कच्चे तेल और अन्य ज़रूरी चीज़ों जैसे आयात को और महंगा बना देता है, जिसका असर घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है।
बाजार विश्लेषकों ने बताया कि निवेशकों का रुख सतर्क हो गया है। ऐसा तब हुआ जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज़ी आई और यह उम्मीद बढ़ी कि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। खबरों के मुताबिक, 30-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड 5% से ऊपर चढ़ गया है, जो 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से पहले के दौर में देखे गए स्तरों के करीब पहुंच गया है।
मजबूत डॉलर और वैश्विक यील्ड में बढ़ोतरी ने कई उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव डाला है, और हालिया कारोबारी सत्र में भारतीय रुपया सबसे ज़्यादा प्रभावित मुद्राओं में से एक रहा है।
ईरान की स्थिति से जुड़ी अनिश्चितता और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव सहित जारी भू-राजनीतिक तनावों ने मुद्रा बाजारों पर दबाव को और बढ़ा दिया है।
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