निशाने से नौकरी तक—अवनीत कौर सिद्धू ने पंजाब की बेटियों के लिए खोला नया रास्ता
सुखमिंदर भंगू
मेलबर्न की स्वर्ण पदक विजेता, बीजिंग ओलंपियन और पंजाब पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी—अवनीत कौर सिद्धू की कहानी साहस, अनुशासन और लगातार मेहनत की मिसाल है।
पंजाब की धरती ने भारत को अनेक महान खिलाड़ी दिए हैं, लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ पदक नहीं जीतते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता भी तैयार करते हैं। अवनीत कौर सिद्धू ऐसा ही एक गौरवशाली नाम हैं। पंजाब की इस बेटी ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का तिरंगा लहराने के बाद पुलिस सेवा में भी अपनी अलग पहचान बनाई।
बादल के कॉलेज से ओलंपिक तक
अवनीत ने बठिंडा के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल से पढ़ाई की और वर्ष 2000 के आसपास दसमेंश गर्ल्स कॉलेज, बादल से जुड़ीं। कॉलेज की जानकारी के अनुसार, यहीं उन्हें प्रतिस्पर्धी निशानेबाजी से जुड़ने का अवसर मिला।
कॉलेज में विकसित शूटिंग सुविधाओं ने ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए खेल का एक नया रास्ता खोला और अवनीत इस व्यवस्था की सबसे चमकदार सफलताओं में से एक बनीं।
दिलचस्प बात यह है कि निशानेबाजी उनकी जिंदगी में शुरुआत में शौक के रूप में आई। धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया और उन्होंने इसे अपना करियर बना लिया। 2008 की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कॉलेज की शूटिंग सुविधाओं से शुरुआत करते हुए इंटर-कॉलेज, विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय चैंपियनशिप और नेशनल गेम्स के स्तर को पार किया और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं।
मेलबर्न 2006—सोने से लिखा अध्याय
अवनीत कौर सिद्धू के खेल करियर का सबसे यादगार अध्याय 2006 के मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स में आया।
उन्होंने तेजस्विनी सावंत के साथ मिलकर महिला 10 मीटर एयर राइफल पेयर्स स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल के व्यक्तिगत मुकाबले में रजत पदक भी हासिल किया।
भारतीय ओलंपिक संघ के रिकॉर्ड में दोनों पदक दर्ज हैं।
यह सफलता केवल दो पदकों तक सीमित नहीं थी। इसने पंजाब की लड़कियों को यह विश्वास दिया कि ग्रामीण पंजाब से आने वाली एक बेटी भी विश्व स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकती है।
दोहा एशियाई खेलों में भी पदक
2006 के दोहा एशियाई खेलों में भी अवनीत ने भारत के लिए पदक जीता।
महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में अवनीत कौर सिद्धू, तेजस्विनी सावंत और सुमा शिरूर की भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता। ISSF के आधिकारिक रिकॉर्ड में अवनीत का व्यक्तिगत 10 मीटर एयर राइफल में पांचवां स्थान भी दर्ज है।
इस तरह कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों दोनों में पदक जीतकर उन्होंने पंजाब की प्रमुख महिला निशानेबाजों में अपनी जगह बनाई।
ज़ाग्रेब से मिली ओलंपिक टिकट
2006 में क्रोएशिया के ज़ाग्रेब में हुई विश्व शूटिंग चैंपियनशिप उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव बनी।
उनके प्रदर्शन ने भारत को 2008 बीजिंग ओलंपिक के लिए कोटा स्थान हासिल करने में मदद की। बीजिंग ओलंपिक में उन्होंने भारत की ओर से महिला 10 मीटर एयर राइफल और 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन में हिस्सा लिया।
बीजिंग में वह पदक नहीं जीत सकीं, लेकिन उस दौर में पंजाब की महिला निशानेबाज के लिए ओलंपिक तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल में 39वां और 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन में 42वां स्थान हासिल किया।
सम्मान से भरा करियर
अवनीत की उपलब्धियों को भारत सरकार और पंजाब सरकार ने भी सम्मान दिया।
उन्हें 2007 के अर्जुन पुरस्कार के सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल किया गया। राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने उन्हें यह पुरस्कार 29 अगस्त 2008 को प्रदान किया।
उन्हें पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उनके खेल करियर में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक शामिल हैं।
पुलिस की वर्दी में भी खेलों वाला जज्बा
अंतरराष्ट्रीय खेल करियर के बाद अवनीत ने जनसेवा का रास्ता चुना।
वह पंजाब पुलिस में डीएसपी के रूप में शामिल हुईं और बाद में एसपी के पद तक पहुंचीं। वर्ष 2020 में उन्हें पंजाब पुलिस में सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस के रूप में पदोन्नति मिली।
फरवरी 2023 में उन्हें फाजिल्का की एसएसपी नियुक्त किया गया। इससे पहले वह मलेरकोटला की एसएसपी रह चुकी थीं।
फाजिल्का के बाद जुलाई 2023 में उन्हें 27वीं बटालियन पीएपी, जालंधर की कमांडेंट नियुक्त किया गया।
अब वह एआईजी/सीआईडी, बठिंडा के रूप में तैनात हैं।
पुलिस खेलों में भी पदकों की बरसात
खेलों से दूर होने के बजाय अवनीत ने पुलिस सेवा के दौरान भी अपनी निशानेबाजी प्रतिभा को जारी रखा।
उन्होंने 2012, 2013, 2015 और 2016 की ऑल इंडिया पुलिस शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते।
2017 में लॉस एंजेलिस में आयोजित वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स में उन्होंने एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक जीते।
2018 में इंदौर में आयोजित ऑल इंडिया पुलिस शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने दो रजत पदक हासिल किए।
परिवार भी खेलों से जुड़ा
अवनीत कौर सिद्धू का विवाह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान राजपाल सिंह से हुआ है।
दोनों के खेलों से जुड़े होने के कारण वे एक-दूसरे के पेशे की चुनौतियों को अच्छी तरह समझते हैं। रिपोर्टों के अनुसार दोनों की मुलाकात 2009 में पुणे में एक कैंप के दौरान हुई और बाद में दोनों विवाह के बंधन में बंधे। उनकी एक बेटी है।
यह एक दिलचस्प खेल परिवार है—एक तरफ भारतीय हॉकी टीम का पूर्व कप्तान और दूसरी तरफ ओलंपियन निशानेबाज।
कोच और मददगार—एक व्यक्ति नहीं, पूरा सिस्टम
अवनीत की सफलता का श्रेय केवल किसी एक कोच या व्यक्ति को देना तथ्यों के लिहाज से उचित नहीं होगा।
दसमेंश गर्ल्स कॉलेज स्वयं बताता है कि उनकी शिक्षिकाओं, कोचों और सहयोगी स्टाफ ने उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कॉलेज की शूटिंग रेंज और ग्रामीण लड़कियों के लिए उपलब्ध सुविधाएं उनकी यात्रा का अहम हिस्सा रहीं।
उस समय पंजाब में महिलाओं के लिए निशानेबाजी को करियर के रूप में चुनना आसान नहीं था। महंगे उपकरण, उच्च स्तर की कोचिंग, लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए यात्रा—ये सभी बड़ी चुनौतियां थीं।
बादल स्थित दसमेंश गर्ल्स कॉलेज में विकसित शूटिंग सुविधाओं ने इन बाधाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यादगार पल
2006 मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।
इसके साथ व्यक्तिगत रजत, दोहा एशियाई खेलों का कांस्य, 2008 बीजिंग ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व और अर्जुन पुरस्कार—ये सभी उपलब्धियां उनके खेल करियर को विशेष बनाती हैं।
इसके बाद पुलिस सेवा में एसपी और एसएसपी जैसे पदों तक पहुंचना उनकी दूसरी पारी की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
2023 में फाजिल्का की एसएसपी के रूप में उन्होंने पंजाब के एक सीमावर्ती जिले का नेतृत्व करने वाली महिला अधिकारियों में अपनी जगह बनाई।
अवनीत की कहानी का असली संदेश
अवनीत कौर सिद्धू की कहानी केवल पदकों की सूची नहीं है।
यह उस यात्रा की कहानी है जिसमें एक कॉलेज छात्रा का शौक जुनून में बदला, वह जुनून उसे ओलंपिक मंच तक ले गया और वही अनुशासन बाद में उसे पुलिस सेवा तक लेकर गया।
खेल मैदान में देश के लिए पदक, ओलंपिक में तिरंगे का प्रतिनिधित्व और पुलिस की वर्दी में जनता की सेवा—अवनीत कौर सिद्धू पंजाब की उन बेटियों में से एक हैं जिन्होंने दिखाया कि सपने छोटे शहरों और गांवों से भी जन्म लेते हैं, लेकिन उनकी उड़ान की कोई सीमा नहीं होती।
- Download Babushahi Hindi App
-
-
Click to Follow बाबूशाही हिन्दी फेसबुक पेज →