HRTC Strike: एचआरटीसी कर्मियों ने वापस ली हड़ताल; सरकार और यूनियन के बीच बैठक में बनी सहमति, Dy CM बोले - बसें नहीं चलानी तो चाबियां सौंपें
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला : 24 जून 2026 :
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की चालक-परिचालक यूनियन ने आज मध्यरात्रि से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला वापस ले लिया है। कर्मचारी यूनियन व सरकार के बीच बुधवार को राज्य सचिवालय में हुई वार्ता में मांगों पर सहमति बनने के बाद यह फैसला लिया गया।
बैठक में इन मांगों पर बनी सहमति
एचआरटीसी चालक यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम ने कर्मियों की मांगों को सहानुभूति पूर्वक सुना व पूरा करने का आश्वासन दिया। कहा कि बैठक में सहमति बनी है कि 12 महीनों का करीब 25 करोड़ बकाया नाइट ओवर टाइम एक सप्ताह के अंदर दिया जाएगा। इसी तरह वर्दी की राशि का भी भुगतान किया जाएगा।
4-9-14 को बहाल करने, वेतन विसंगति को दूर करने, ड्यूटी इंचार्ज की मांग को भी पूरा करने का आश्वासन दिया गया। मान सिंह ने कहा कि कर्मचारियों की सभी मांगें तो नहीं मानी गईं लेकिन सरकार की स्थिति को देखते हुए यूनियन ने भी समझाैता किया। वेतन भी पहली तारीख को देने की बात की गई। प्रबंधन ने इन सभी मांगों को माना है। ओवर टाइम आगे से हर महीने देने की सहमति बनी। साथ ही जिन चालकों-परिचालकों के तबादलों को भी एक-दो दिन में वापस लिया जाएगा। अब हड़ताल पर नहीं जाएंगे।
बसें नहीं चलानीं तो चाबियां सौंप दें: मुकेश
वहीं बुधवार दोपहर उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शिमला में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि सरकार कर्मचारियों के सम्मान और संवाद में विश्वास रखती है, लेकिन बस सेवाओं को बाधित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद से कर्मचारियों को समय पर वेतन और पेंशन का भुगतान किया जा रहा है। सरकार एक महीने की भी डिफॉल्टर नहीं रही है और एचआरटीसी कर्मचारियों को समय पर महंगाई भत्ता तथा पुरानी पेंशन योजना का लाभ भी दिया जा रहा है।
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि एचआरटीसी का मुख्य उद्देश्य जनसेवा है। प्रतिवर्ष लाखों लोग निगम की बसों में सफर करते हैं।
ऐसे में किसी भी राजनीतिक एजेंडे या अन्य कारणों से बस सेवाओं को बाधित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रस्तावित चक्का जाम गैरकानूनी है और सरकार इसे अवैध मानती है। प्रदेश में एस्मा लागू है और सरकार उसके प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई करेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाद का समाधान बातचीत से ही संभव है और सरकार के वार्ता के दरवाजे हमेशा खुले हैं। डिप्टी सीएम ने कहा कि यदि चालक और परिचालक बसें नहीं चलाना चाहते तो वे बसों की चाबियां वापस कर दें। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी कर्मचारी को कानून अपने हाथ में लेने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या यात्रियों को बीच रास्ते में उतारने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि गुरुवार से चालक और परिचालकों को उनके रूट संबंधी लिखित आदेश जारी किए जाएंगे। (SBP)
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