Fortis Mohali का बड़ा कदम, लॉन्च किया Institute of Genomic Medicine, अब Cancer का होगा Personalized Treatment
Babushahi Bureau
चंडीगढ़, 29 अगस्त, 2025: कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा कदम उठाते हुए, Fortis हॉस्पिटल मोहाली ने आज अपने इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक मेडिसिन (Institute of Genomic Medicine) की शुरुआत की है। इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य कैंसर के इलाज को और भी सटीक, व्यक्तिगत और विश्वस्तरीय बनाना है। अब, मरीजों के जीन्स (Genes), क्रोमोसोम (Chromosomes) और DNA पैटर्न की गहराई से जांच करके कैंसर पैदा करने वाले कारणों का पता लगाया जाएगा, जिससे न केवल बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि भविष्य में होने वाले खतरे का भी अनुमान लगाया जा सकेगा।
क्या है जीनोमिक मेडिसिन और यह कैसे काम करेगा?
यह संस्थान जेनेटिक टेस्टिंग (Genetic Testing) यानी आनुवंशिक परीक्षण पर काम करेगा। इसका सीधा सा मतलब है कि यह आपके शरीर के अंदर छिपे उन आनुवंशिक बदलावों या गड़बड़ियों का पता लगाएगा, जो कैंसर का कारण बनते हैं।
1. कैसे होगी जांच: यह जांच मरीज के खून (Blood), लार (Saliva) या ट्यूमर के टिश्यू (Tumor Tissues) के सैंपल से की जाती है।
2. एडवांस्ड तकनीक: इसके लिए नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग (Next-Generation Sequencing) और लिक्विड बायोप्सी (Liquid Biopsy) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
3. क्या पता चलेगा: इससे यह पता चलेगा कि ट्यूमर के अंदर कौन से जीन्स में गड़बड़ी (Mutation) है, जो कैंसर को बढ़ावा दे रही है।
मरीजों को क्या फायदा होगा?
इस नई तकनीक से कैंसर के इलाज का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।
1. व्यक्तिगत इलाज (Personalized Treatment): अब हर मरीज के लिए एक जैसी दवा नहीं होगी। जीन्स की जांच के बाद, डॉक्टर सिर्फ उसी गड़बड़ी को ठीक करने के लिए टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy) देंगे, जिससे इलाज ज्यादा असरदार होगा।
2. कम साइड इफेक्ट्स: जब दवा सिर्फ कैंसर सेल्स पर असर करेगी, तो कीमोथेरेपी जैसे पारंपरिक इलाजों के अनावश्यक साइड इफेक्ट्स से बचा जा सकेगा।
3. भविष्य के खतरे का पता: इस तकनीक से यह भी पता लगाया जा सकता है कि क्या किसी व्यक्ति या उसके परिवार में BRCA1/2 जैसे कैंसर पैदा करने वाले जीन्स मौजूद हैं। इससे भविष्य में होने वाले कैंसर के खतरे का पहले ही पता चल जाएगा।
4. रोकथाम संभव: अगर किसी व्यक्ति में कैंसर का खतरा पाया जाता है, तो डॉक्टर उसे जीवनशैली में बदलाव, प्रिवेंटिव जांच या सही समय पर जरूरी हस्तक्षेप की सलाह दे सकते हैं, ताकि कैंसर को होने से पहले ही रोका जा सके।
विशेषज्ञों की टीम करेगी नेतृत्व
इस संस्थान का नेतृत्व डॉ. राजीव बेदी (डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल ऑन्कोलॉजी) और डॉ. रवनीत कौर (एसोसिएट कंसल्टेंट, डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल जेनेटिक्स) की विशेषज्ञ टीम करेगी।
डॉ. राजीव बेदी ने कहा, "जीनोमिक्स की बदौलत, कैंसर का इलाज अब 'एक दवा सबके लिए' वाले दौर से निकलकर 'हर मरीज के लिए खास' समाधानों की ओर बढ़ रहा है। कोई भी दो कैंसर एक जैसे नहीं होते, और अब उनका इलाज भी एक जैसा नहीं होगा।"
डॉ. रवनीत कौर ने बताया, "यह तकनीक कैंसर को जन्म देने वाली 'खराब वायरिंग' (Faulting Wiring) की पहचान करती है। इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि इलाज को और बेहतर कैसे बनाया जाए, ताकि थेरेपी अधिक प्रभावी हो और मरीज को अनावश्यक दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।"
Fortis मोहाली की यह पहल कैंसर के इलाज में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है, जिससे मरीजों को न केवल बेहतर परिणाम मिलेंगे, बल्कि वे एक स्वस्थ और लंबा जीवन जी सकेंगे।
MA
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