Himachal: Kullu Breaking : Scientific Dredging work at Jia Sangam : जिया संगम में वैज्ञानिक ड्रेजिंग कार्य का ऐतिहासिक शुभारंभ, कुल्लू में नदी प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम
बाबूशाही ब्यूरो
कुल्लू, 29 मई 2026 :वैज्ञानिक नदी प्रबंधन तथा बाढ़ संबंधी जोखिमों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत स्वीकृत रूपरेखा के अंतर्गत पहली ड्रेजिंग निविदा को जिया संगम (साइट संख्या-3 डाउनस्ट्रीम) में सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया गया है। यहां 28 मई, 2026 से ड्रेजिंग कार्य औपचारिक रूप से आरम्भ हो गया है।
उपायुक्त कुल्लू अनुराग चन्द्र शर्मा ने कहा कि यह न केवल ज़िले बल्कि पूरे प्रदेश के लिये एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस पहल का उद्देश्य केवल नदी तल से वैज्ञानिक तरीके से सामग्री निकालना ही नहीं, बल्कि नदी प्रशिक्षण, तलछट प्रबंधन, संवेदनशील आधारभूत संरचनाओं पर दबाव कम करना तथा व्यास नदी तंत्र के संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ जोखिम को कम करना भी है।
उन्होंने बताया कि आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने, वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत अनुमति लेने, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने, निविदा औपचारिकताओं तथा कार्यान्वयन की प्रक्रिया एचपी स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में पूरी की गई है। उन्होंने कहा कि कार्य शुरू करने से पूर्व सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां और स्वीकृतियां प्राप्त कर ली गई थीं तथा कार्य को स्वीकृत शर्तों और तकनीकी मानकों के अनुसार नियंत्रित एवं निगरानी में किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जिया संगम स्थल को हिमाचल प्रदेश में सतत ड्रेजिंग एवं नदी प्रबंधन के लिये विकसित की जा रही व्यापक नीति रूपरेखा के अंतर्गत एक पायलट परियोजना के रूप में चिन्हित किया गया है। पायलट परियोजना के तहत भुंतर एयरपोर्ट, लंका बेकर और जिया संगम सहित तीन स्थानों पर कुल 9 साइटों का चयन किया गया है।
वर्ष 2026 के मानसून से पूर्व इन स्थानों से लगभग 1.25 लाख मीट्रिक टन नदी तल सामग्री निकाले जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम साइट के सफल संचालन से वैज्ञानिक निष्कर्षण तथा दीर्घकालिक नीति सुधारों के लिये महत्वपूर्ण फील्ड-स्तरीय अनुभव प्राप्त होने की उम्मीद है।
उपायुक्त ने कहा कि इस पहल से दीर्घकाल में अनेक लाभ प्राप्त होंगे, जिनमें नदी तल में जमा सामग्री और उससे जुड़े बाढ़ जोखिम में कमी, सड़कों और पुलों सहित सार्वजनिक आधारभूत संरचनाओं की सुरक्षा,
नदी तल सामग्री का वैज्ञानिक एवं विनियमित उपयोग, अवैध एवं अनियंत्रित खनन गतिविधियों में कमी,सरकार के राजस्व में वृद्धि, तथाजिला स्तरीय जलागम प्रबंधन समितियों के माध्यम से जलवायु वित्त सृजन एवं उपयोग शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि जिया संगम साइट (साइट संख्या-3) से लगभग 8,333 मीट्रिक टन सामग्री 1.46 हेक्टेयर क्षेत्र से निकाले जाने का प्रस्ताव है।
उपायुक्त ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिये एचपी स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, वन विभाग, खनन विभाग, राजस्व विभाग, जल शक्ति विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के समन्वित प्रयासों की सराहना की। जिला प्रशासन ने पुनः दोहराया कि ड्रेजिंग गतिविधियां पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों, वैधानिक शर्तों और वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुरूप ही संचालित की जाएंगी, ताकि पारिस्थितिक संतुलन, जन सुरक्षा और आधारभूत संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि जिया संगम में कार्य का सफल शुभारंभ जिले में सतत एवं वैज्ञानिक नदी प्रबंधन ढांचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहला कदम है। (SBP)
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