चंडीगढ़ में नहीं बनेंगे फ्लाईओवर: हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान-2031 को बरकरार रखा, अंडरपास का विकल्प दिया
ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर पर हाईकोर्ट की रोक, कहा— चंडीगढ़ की विरासत से समझौता नहीं किया जा सकता
बलजीत बल्ली / बाबूशाही नेटवर्क
चंडीगढ़, 29 मई 2026: चंडीगढ़ की विशिष्ट पहचान, विरासत और नियोजित शहरी स्वरूप को संरक्षित रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ट्रिब्यून चौक पर प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण पर पूर्ण रोक लगा दी। ट्रिब्यून चौक शहर के सबसे व्यस्त यातायात चौराहों में से एक है।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यातायात प्रबंधन के नाम पर चंडीगढ़ की मूल योजना और वैधानिक मास्टर प्लान से समझौता नहीं किया जा सकता।
यह फैसला उस याचिका पर सुनाया गया जिसमें ट्रिब्यून चौक पर प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना को चुनौती दी गई थी। यह परियोजना वहां लगने वाले ट्रैफिक जाम को कम करने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि "चंडीगढ़ पैदल चलने वालों के लिए बनाया गया है, केवल वाहनों की आवाजाही के लिए नहीं।" अदालत ने कहा कि शहर की खुली सड़कें, हरियाली और विशाल खुले स्थान इसकी विश्व स्तर पर पहचानी जाने वाली विशिष्ट पहचान हैं और इन्हें हर कीमत पर संरक्षित किया जाना चाहिए।
अदालत ने अपने निर्णय में चंडीगढ़ मास्टर प्लान (सीएमपी)-2031 का विस्तृत उल्लेख करते हुए कहा कि वैधानिक नियोजन ढांचे के तहत चंडीगढ़ में फ्लाईओवर और ओवरब्रिज के निर्माण की अनुमति नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसे निर्माण शहर की सुंदरता, विरासत मूल्य और "सिटी ब्यूटीफुल" की मूल वास्तु अवधारणा को प्रभावित करते हैं।
खंडपीठ ने माना कि यातायात जाम एक वास्तविक समस्या है, लेकिन उसका समाधान मास्टर प्लान के दायरे में रहकर और शहर की विशिष्ट शहरी पहचान को नुकसान पहुंचाए बिना खोजा जाना चाहिए।
अदालत ने क्या आदेश दिए
अपने फैसले के प्रभावी हिस्से में हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर के निर्माण को आगे बढ़ाने से रोक दिया और कहा कि यह परियोजना सीएमपी-2031 के प्रावधानों का उल्लंघन करेगी।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ प्रशासन ट्रिब्यून चौक पर अंडरपास का निर्माण करने के लिए स्वतंत्र होगा, क्योंकि सीएमपी-2031 के तहत अंडरपास की अनुमति है और इसे यातायात दबाव कम करने के वैकल्पिक उपाय के रूप में अपनाया जा सकता है।
अदालत ने यूटी प्रशासन को ट्रिब्यून चौक और उसके आसपास स्थित किसी भी आम के पेड़ अथवा अन्य वृक्ष को काटने से भी रोक दिया।
चंडीगढ़ की विशिष्ट पहचान को संरक्षित रखने पर जोर देते हुए खंडपीठ ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वह शहर के हरित, विरासती और वास्तुशिल्पीय स्वरूप को बनाए रखे, विशेष रूप से फेज-1 (सेक्टर 1 से 30) और दक्षिण मार्ग सहित उन क्षेत्रों में जो चंडीगढ़ के हेरिटेज ज़ोन का अभिन्न हिस्सा हैं।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने और निजी मोटर वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए भी निर्देशित किया। अदालत ने कहा कि शहर के भीतर आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि ट्रैफिक दबाव कम हो और निजी वाहनों का उपयोग सीमित किया जा सके।
अदालत ने उम्मीद जताई कि चंडीगढ़ प्रशासन यातायात चुनौतियों के समाधान के लिए ऐसे टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल उपाय अपनाएगा जो शहर के मूल स्वरूप और नियोजन दर्शन को सुरक्षित रखें।
इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने 29 मई 2026 को याचिका को स्वीकार करते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
यह याचिका जगवंत सिंह बाठ एवं अन्य द्वारा दायर की गई थी।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से:
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सुश्री तनु बेदी, अधिवक्ता (मुख्य बहसकर्ता)
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श्री बलविंदर सांगवान, अधिवक्ता
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श्री कृष्णा मौर्य, अधिवक्ता
यूटी चंडीगढ़ की ओर से:
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श्री अमित झांजी, वरिष्ठ अधिवक्ता / वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता (मुख्य बहसकर्ता)
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सुश्री शुभ्रीत कौर सरों, अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता
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डॉ. एलिजा गुप्ता, अधिवक्ता
भारत सरकार (यूओआई) की ओर से:
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श्री धीरज जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता / वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता (मुख्य बहसकर्ता)
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श्री हिमांशु बिंदल, अधिवक्ता
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