कैबिनेट मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया, पढ़े पूरी ख़बर
कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक उलटफेर: वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले के विवाद के बीच मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफ़ा
बेंगलुरु, 29 अगस्त, 2026: कर्नाटक की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर हुआ है। राज्य के योजना और सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले और अनियमितताओं के आरोपों के बीच अपने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है।
खबरों के अनुसार, पिछले दो सालों में यह दूसरी बार है जब बी. नागेंद्र को मंत्री पद छोड़ना पड़ा है, जिससे राज्य में राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।
नागेंद्र के इस्तीफ़े को केंद्रीय जांच एजेंसियों की बढ़ती कार्रवाई और विपक्ष के बढ़ते राजनीतिक दबाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। खबरों के मुताबिक, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने महर्षि वाल्मीकि ST विकास निगम से जुड़े फंड के कथित अवैध डायवर्जन, दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में नागेंद्र पर मुकदमा चलाने के लिए कर्नाटक के राज्यपाल से औपचारिक मंज़ूरी मांगी थी।
जांच एजेंसियों की सख्ती और कानूनी कार्रवाई की संभावना के बीच, सरकार और उनकी पार्टी के भीतर मंत्री पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बढ़ रहा था।
हालांकि, इस्तीफ़ा सौंपने के बाद बी. नागेंद्र ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और दावा किया कि उन्हें बेवजह इस विवाद में घसीटा जा रहा है। नागेंद्र ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला विपक्ष की एक राजनीतिक साज़िश का हिस्सा है, जिसका मकसद उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।
इस विवाद के कारण भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कर्नाटक सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं। BJP ने सरकार पर गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है और नागेंद्र के तुरंत इस्तीफ़े की मांग कर रही थी।
अपने अभियान को तेज़ करने के लिए, BJP ने 1 सितंबर से रायचूर से बल्लारी तक 10 दिन की विशाल पदयात्रा की भी घोषणा की थी। प्रस्तावित मार्च से ठीक पहले आए इस इस्तीफ़े को सरकार की ओर से विपक्ष के नियोजित आंदोलन के असर को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नागेंद्र का इस्तीफ़ा सरकार का एक रणनीतिक कदम हो सकता है ताकि बढ़ता राजनीतिक दबाव कम किया जा सके और राज्य विधानसभा में और अधिक शर्मिंदगी से बचा जा सके। इस बीच, बीजेपी ने इस इस्तीफ़े को अपने अभियान की बड़ी जीत बताया है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस कथित घोटाले में कई अन्य प्रमुख हस्तियां भी शामिल हो सकती हैं और उन्होंने जांच पूरी होने तक अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया है।
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