बर्फीली चोटियों में दिखे स्नो लेपर्ड, चंबा में सर्दियों की दस्तक
पांगी-सुराल घाटी और भरमौर की ऊंची चोटियों पर तीन इंच तक हिमपात, दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी ने खींचा ध्यान
बाबूशाही ब्यूरो
चंबा : 15 अक्टूबर 2026 : हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में सर्दियों की आहट के साथ हिमालय की ऊंची चोटियों पर वन्यजीवों की गतिविधियां भी चर्चा में हैं। चंबा जिले के पांगी और भरमौर की ऊंची पहाड़ियों पर ताजा बर्फबारी के बीच दो स्नो लेपर्ड नजर आने की सूचना सामने आई है। इससे एक बार फिर हिमालय के इस दुर्गम क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी की ओर ध्यान गया है। पांगी और भरमौर की ऊंची चोटियों पर करीब तीन इंच तक ताजा हिमपात हुआ है। पांगी की सुराल घाटी में भी बर्फबारी शुरू होने की सूचना है। दूसरी ओर, जिले के निचले क्षेत्रों में बारिश के कारण तापमान में गिरावट और ठंड में बढ़ोतरी महसूस की जा रही है। मौसम में आए इस बदलाव ने पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दियों की शुरुआती तस्वीर पेश कर दी है। वहीं, मनाली के साथ लगते रोहतांग दर्रे समेत जिला लाहुल स्पीती में सुबह से बर्फवारी हो रही है। इससे उपरी हिमाचल शीत लहर के आगोश में है।
बर्फबारी के बीच दिखे दो स्नो लेपर्ड
चंबा के पहाड़ी क्षेत्र में दो स्नो लेपर्ड नजर आने की सूचना इस घटनाक्रम का खास पहलू है। बर्फीले और ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाला स्नो लेपर्ड अपनी छिपकर रहने की प्रकृति के कारण आसानी से दिखाई नहीं देता। इसके प्राकृतिक आवास में मानवीय गतिविधियों की सीमित पहुंच और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां भी इसके अध्ययन को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। ऐसे में दो स्नो लेपर्ड दिखाई देने की जानकारी वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति में रुचि रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इनके देखे जाने के सटीक स्थान, परिस्थितियों और वन विभाग की ओर से इसकी पुष्टि के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस घटना को फिलहाल स्नो लेपर्ड की मौजूदगी की सूचना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
बर्फ की सफेद चादर में लिपटीं चोटियां
चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र पांगी और भरमौर की ऊंची चोटियों पर ताजा हिमपात के बाद प्राकृतिक नजारा बदल गया है। पहाड़ों पर बर्फ की सफेद चादर बिछने से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों का असर साफ नजर आने लगा है। पांगी की सुराल घाटी में भी हिमपात शुरू होने की सूचना है। इन क्षेत्रों में मौसम का मिजाज तेजी से बदलता है और ऊंचाई के अनुसार तापमान में काफी अंतर देखने को मिलता है। ताजा बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ने से स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है।
वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से अहम है हिमालय
हिमालय का ऊंचाई वाला क्षेत्र अनेक दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। यहां की जलवायु, भौगोलिक बनावट और वनस्पति वन्यजीवों के जीवन को प्रभावित करती है। स्नो लेपर्ड जैसे वन्यजीव इस पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी मौजूदगी की सूचना ऐसे क्षेत्रों में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, उनकी गतिविधियों और संरक्षण की जरूरतों पर ध्यान आकर्षित करती है। हालांकि, केवल किसी वन्यजीव के दिखाई देने के आधार पर उसकी आबादी में वृद्धि या आवास में बदलाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए नियमित निगरानी, कैमरा ट्रैप, वैज्ञानिक अध्ययन और वन विभाग के आंकड़ों की आवश्यकता होती है।
मौसम में बदलाव, बढ़ेगी ठंड
ऊंची चोटियों पर हिमपात और निचले क्षेत्रों में बारिश के कारण चंबा जिले में ठंड का असर बढ़ने लगा है। सुबह और शाम के समय तापमान में गिरावट महसूस होने के साथ लोगों को गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। मौसम में इस बदलाव के बीच ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर जाने वाले लोगों के लिए सतर्क रहना जरूरी है। बारिश और बर्फबारी के कारण रास्तों पर फिसलन बढ़ सकती है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने से पहले मौसम और सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी लेना आवश्यक है।
प्राकृतिक खूबसूरती के साथ संरक्षण की चुनौती
चंबा के पांगी और भरमौर क्षेत्र अपनी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, ऊंची चोटियों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाने जाते हैं। बर्फबारी के साथ स्नो लेपर्ड नजर आने की सूचना ने इन क्षेत्रों की प्राकृतिक विशिष्टता को फिर चर्चा में ला दिया है। यह घटनाक्रम इस बात की भी याद दिलाता है कि हिमालय की सुंदरता केवल बर्फ से ढकी चोटियों तक सीमित नहीं है। यहां का वन्यजीवन और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों में पर्यटन और अन्य मानवीय गतिविधियों के विस्तार के साथ प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा तथा दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है। (SBP)
- Download Babushahi Hindi App
-
-
Click to Follow बाबूशाही हिन्दी फेसबुक पेज →