माइनस 20 डिग्री में जवानों और लाहुलवासियों की सेहत पर होगा शोध, केलांग में 36 करोड़ से बनेगा ICMR केंद्र
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने किया उच्च पर्वतीय चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र का शिलान्यास, मशीनें लगने के बाद 50 करोड़ रुपये तक पहुंचेगी परियोजना की लागत
Babushahi Bureau
केलांग, 13 अक्टूबर 2026। हिमालय की बर्फीली वादियों में माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक गिरने वाले तापमान में रहने वाले लोगों और देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात जवानों के स्वास्थ्य पर ठंड का क्या प्रभाव पड़ता है, अब इसका वैज्ञानिक अध्ययन करना आसान हो जाएगा। लाहौल-स्पीति के मुख्यालय केलांग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) का उच्च पर्वतीय चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जा रहा है। करीब 36 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह केंद्र हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और अत्यधिक ऊंचाई पर तैनात सुरक्षा बलों के जवानों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझने में अहम भूमिका निभाएगा। आधुनिक मशीनें और अन्य आवश्यक उपकरण स्थापित होने के बाद इस परियोजना पर कुल खर्च लगभग 50 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को केलांग में इस केंद्र का भूमि पूजन कर शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि केंद्र का निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संस्थान उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा देगा और हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट परिस्थितियों में रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं को वैज्ञानिक तरीके से समझने के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा।
माइनस 20 डिग्री में शरीर पर क्या पड़ता है असर, मिलेगा वैज्ञानिक जवाब
लाहौल-स्पीति जैसे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान तापमान बेहद नीचे चला जाता है। कई बार पारा माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसी परिस्थितियों में लंबे समय तक रहने वाले लोगों के शरीर पर ठंड का क्या असर पड़ता है, इस दौरान कौन-सी स्वास्थ्य समस्याएं अधिक सामने आती हैं और शरीर अत्यधिक ठंड के अनुकूल किस तरह प्रतिक्रिया करता है, ऐसे विषय अनुसंधान के केंद्र में रह सकते हैं। केलांग में स्थापित होने वाला आईसीएमआर केंद्र इन परिस्थितियों से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध कराएगा। इससे स्थानीय आबादी की स्वास्थ्य जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने के साथ-साथ उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात जवानों के स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर भी शोध की संभावनाएं मजबूत होंगी।
अत्यधिक ठंड में रहने वाले लोगों में हाइपोथर्मिया, शीतदंश यानी फ्रॉस्टबाइट, सांस संबंधी परेशानियों और ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम परिस्थितियों के अनुसार बढ़ सकता है। ऐसे में स्थानीय वातावरण, तापमान, ऊंचाई और जीवनशैली को ध्यान में रखकर किया गया अनुसंधान भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों की पहचान और उनसे निपटने की रणनीतियां विकसित करने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इन विषयों पर कौन-कौन से विशिष्ट अध्ययन किए जाएंगे, इसकी विस्तृत शोध योजना और समयसीमा की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
जवानों के स्वास्थ्य के लिहाज से भी अहम होगा केंद्र
लाहौल-स्पीति और आसपास के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड तथा कठिन भौगोलिक परिस्थितियां स्वास्थ्य के लिए अलग तरह की चुनौतियां पेश करती हैं। देश की सुरक्षा में तैनात जवानों को भी कई बार ऐसे वातावरण में लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है, जहां कम तापमान, कम ऑक्सीजन और मौसम की प्रतिकूलता उनके शरीर की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में केलांग स्थित अनुसंधान केंद्र की स्थापना का महत्व केवल स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा। यहां उच्च पर्वतीय परिस्थितियों से संबंधित चिकित्सा अनुसंधान को संस्थागत आधार मिलने से सुरक्षा बलों के जवानों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझने की दिशा में भी काम किया जा सकेगा। यदि अनुसंधान के निष्कर्षों के आधार पर ठंड से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम, समय रहते पहचान और बेहतर चिकित्सकीय प्रबंधन के उपाय विकसित किए जाते हैं, तो इससे अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों में रहने और काम करने वाले लोगों को लाभ मिल सकता है।
लाहुलवासियों की स्वास्थ्य जरूरतों को समझने में मिलेगी मदद
लाहौल-स्पीति की भौगोलिक परिस्थितियां प्रदेश के मैदानी और अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों से काफी अलग हैं। यहां सर्दियों में अत्यधिक ठंड, बर्फबारी, दुर्गम रास्ते और कई स्थानों पर सीमित पहुंच स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चुनौतियां पैदा करती हैं। ऐसे में स्थानीय आबादी की स्वास्थ्य समस्याओं का अध्ययन उसी क्षेत्र की परिस्थितियों के संदर्भ में करना महत्वपूर्ण है। केलांग में आईसीएमआर का अनुसंधान केंद्र स्थापित होने से उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सा अनुसंधान के लिए स्थानीय स्तर पर आधारभूत ढांचा उपलब्ध होगा। इससे भविष्य में क्षेत्र विशेष की स्वास्थ्य चुनौतियों पर केंद्रित अध्ययन करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर अत्यधिक ठंड के प्रभाव, ऊंचाई के अनुकूल शरीर की प्रतिक्रिया और मौसम से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को बेहतर ढंग से समझना भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार हो सकता है।
36 करोड़ निर्माण पर, मशीनों के साथ 50 करोड़ तक पहुंचेगी लागत
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के अनुसार, केंद्र के निर्माण पर लगभग 36 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान उपकरणों और मशीनों की स्थापना के बाद परियोजना की कुल लागत करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही गई है। यह निवेश उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सा अनुसंधान के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, केंद्र में स्थापित की जाने वाली मशीनों, उपलब्ध होने वाली विशिष्ट अनुसंधान सुविधाओं और कर्मचारियों की संख्या के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। नड्डा ने कहा कि केंद्र को रिकॉर्ड समय में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके निर्माण और उपकरणों की स्थापना के बाद इसकी वास्तविक अनुसंधान क्षमता और स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था में इसकी भूमिका स्पष्ट होगी।
मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य अनुसंधान के विस्तार पर भी बोले नड्डा
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने देश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में छह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) थे, जबकि केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में इनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई है। उन्होंने बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या पहले 387 थी, जो अब बढ़कर 858 हो गई है। इसी तरह, उनके अनुसार, मेडिकल शिक्षा में स्नातक यानी एमबीबीएस की सीटों की संख्या लगभग 51 हजार से बढ़कर एक लाख 31 हजार हो गई है। स्नातकोत्तर यानी पीजी की सीटें भी 31 हजार से बढ़कर 86 हजार तक पहुंच गई हैं। उन्होंने इन आंकड़ों के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते संस्थागत ढांचे का उल्लेख किया। केलांग में अनुसंधान केंद्र की स्थापना को भी इसी व्यापक क्षेत्र में अनुसंधान सुविधाओं के विस्तार के संदर्भ में देखा जा रहा है।
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने भी केलांग में उच्च पर्वतीय अनुसंधान केंद्र की स्थापना से जुड़े कार्यक्रम में भाग लिया। इस केंद्र की स्थापना से हिमालयी क्षेत्र में चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान को स्थानीय स्तर पर आधार मिलने की उम्मीद है। इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता यह होगी कि अत्यधिक ठंड और ऊंचाई वाली परिस्थितियों में रहने वाले लोगों तथा वहां तैनात जवानों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझने के लिए अनुसंधान की संभावनाएं विकसित होंगी। कुल मिलाकर, केलांग में बनने वाला यह केंद्र लाहौल-स्पीति के लिए केवल एक नया संस्थान नहीं, बल्कि हिमालय की कठिन जलवायु में मानव स्वास्थ्य को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र का निर्माण कितनी जल्दी पूरा होता है और यहां अनुसंधान की वास्तविक गतिविधियां कब शुरू होती हैं।
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