ऐतिहासिक मुलाकात की 195वीं वर्षगांठ से पहले रूपनगर के विरासत स्थल के लिए संधू ने 10 लाख रुपये देने की घोषणा की
राज्यसभा सांसद 1831 में महाराजा रणजीत सिंह और लॉर्ड विलियम बेंटिंक की मुलाकात के स्थल पर कूटनीतिक विरासत स्मारक का प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष आगे बढ़ाएंगे
रूपनगर, 18 अक्टूबर, 2026: राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने रविवार को रूपनगर के उस ऐतिहासिक स्थल पर संरक्षण कार्यों और आगंतुकों के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित करने हेतु अपनी सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) निधि से 10 लाख रुपये देने की घोषणा की, जहां 1831 में महाराजा रणजीत सिंह की मुलाकात लॉर्ड विलियम बेंटिंक से हुई थी। उन्होंने कहा कि वह प्रस्तावित कूटनीतिक विरासत स्मारक के मामले को केंद्र सरकार के समक्ष आगे बढ़ाएंगे।
यह घोषणा सतलुज नदी के किनारे स्थित विरासती चौकी सरकार-ए-खालसा के दौरे के दौरान की गई। यह दौरा महाराजा और तत्कालीन गवर्नर जनरल के बीच 26 अक्टूबर, 1831 को हुई मुलाकात की 195वीं वर्षगांठ से आठ दिन पहले हुआ। संधू ने 12 अगस्त को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इस स्थल पर स्मारक बनाने की मांग उठाई थी।
संधू ने कहा, “यह स्थल भारत के कूटनीतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को दर्ज करता है। इसका संरक्षण आगंतुकों को महाराजा रणजीत सिंह की शासन-कला और 1831 की मुलाकात के महत्व को समझने में मदद करेगा।”
उन्होंने कहा कि स्थानीय संगठन प्रतिबद्धता के साथ संरक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें धन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। 10 लाख रुपये का यह योगदान जारी बुनियादी कार्यों में सहायता देने और आगंतुकों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
प्रस्तावित महाराजा रणजीत सिंह रूपर कूटनीतिक विरासत स्मारक में एक संग्रहालय, ऐतिहासिक दस्तावेजों की गैलरी और डिजिटल प्रस्तुतियां शामिल होंगी। इनके माध्यम से उस मुलाकात, महाराजा की शासन व्यवस्था तथा भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में उनके योगदान के बारे में जानकारी दी जाएगी। संधू ने कहा कि वह इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और इस स्थल को उचित पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार के साथ इस मामले को आगे उठाएंगे।
उन्होंने कहा, “महाराजा ने भारत की विरासत को संरक्षित करने में मदद की। अब उनकी विरासत को संजोना हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने आगे कहा, “उचित तरीके से संरक्षित किया गया यह स्थल युवाओं को इस इतिहास से परिचित करा सकता है और विरासत स्थल के रूप में रूपनगर के आकर्षण को बढ़ा सकता है।”
संधू ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें विकास को विरासत के संरक्षण से जोड़ा गया है। उन्होंने स्थल पर परिवारों और बच्चों की मौजूदगी का स्वागत किया और कहा कि निरंतर संरक्षण प्रयासों के माध्यम से लोगों की इस रुचि को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
दौरे के दौरान उन्होंने रोटरी क्लब रूपर, विरासत संभाल समिति, महाराजा रणजीत सिंह बाग प्रबंधन समिति और चौकी सरकार-ए-खालसा वेलफेयर सोसाइटी के प्रतिनिधियों के साथ संरक्षण कार्यों तथा आगंतुकों की सुविधाओं पर चर्चा की। उन्होंने गुरुद्वारा श्री टिब्बी साहिब में माथा भी टेका, सभी की खुशहाली और पंजाब की समृद्धि के लिए अरदास की तथा बाबा अवतार सिंह से मुलाकात की।
इस अवसर पर डॉ. आर. एस. परमार; रोटरी के पूर्व जिला गवर्नर चेतन अग्रवाल; चौकी सरकार-ए-खालसा वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष रणजीत सिंह पटियाला और सचिव अजमेर सिंह; कमल तिवाना; रोटरी क्लब रूपर के अध्यक्ष गगन सैनी; प्रेस क्लब रूपनगर के अध्यक्ष सतनाम सिंह सत्ती और पूर्व अध्यक्ष बहादुरजीत सिंह; महाराजा रणजीत सिंह सोशल एंड एनवायरनमेंट कमेटी के अध्यक्ष गुरचरण सिंह कपूर; बार काउंसिल के सदस्य मुनीश आहूजा; तथा अभिजीत आहूजा उपस्थित थे।
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