ब्रेकिंग: HC ने लोंगोवाल स्पोर्ट्स स्टेडियम के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई, राज्य सरकार से हलफनामा मांगा
बाबूशाही नेटवर्क
चंडीगढ़, 18 अक्टूबर, 2026: संगरूर जिले में लोंगोवाल पुलिस स्टेशन के पास सरकारी जमीन पर प्रस्तावित स्पोर्ट्स स्टेडियम के निर्माण का मामला अदालत की निगरानी में आ गया है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है और पंजाब सरकार को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह पुष्टि करनी होगी कि विवादित इलाके में कोई पेड़ नहीं काटा गया है।
याचिका में पेड़ों की कथित कटाई और इलाके में मोरों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचने को लेकर चिंता जताई गई है।
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने पंजाब सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि अदालत की विशेष अनुमति के बिना विवादित इलाके में अब और पेड़ नहीं काटे जाएंगे। पीठ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक इस आश्वासन का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
अदालत ने राज्य सरकार से अगली सुनवाई पर एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह पुष्टि करनी होगी कि इलाके में कोई पेड़ नहीं काटा गया है। अब इस मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
अदालत के पिछले निर्देशों के पालन पर सवाल
यह मामला जसविंदर सेखों द्वारा दायर एक याचिका के जरिए अदालत के सामने आया था। इससे पहले, अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अपनी शिकायतें संबंधित अधिकारियों के पास रखने का निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एस. बैंस और अधिवक्ता शाहबाज थिंड ने तर्क दिया कि अधिकारी उठाए गए मुद्दों पर ठीक से विचार करने में विफल रहे और उन्होंने याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं दिया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन चिंताओं के बावजूद बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं और मोरों के प्राकृतिक आवास को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
पंजाब सरकार की ओर से, वरिष्ठ उप महाधिवक्ता सलिल सबलोक ने नोटिस स्वीकार किया और अदालत को बताया कि न तो जमीन पर कोई निर्माण कार्य हुआ है और न ही कोई पेड़ काटा गया है।
अदालत ने सरकार को अपना पक्ष औपचारिक रूप से स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में वन्यजीव आवास के आकलन की मांग
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि जब तक वन्यजीव आवास का आकलन नहीं हो जाता और वन विभाग की सिफारिशों पर उचित विचार नहीं किया जाता, तब तक पेड़ों को काटने या उखाड़ने, या प्रस्तावित स्टेडियम के निर्माण से जुड़ी किसी भी गतिविधि पर रोक लगाई जाए।
याचिका में 27 सितंबर, 2023 की उस सिफारिश को भी चुनौती दी गई है, जिसके तहत स्टेडियम बनाने के लिए इस जगह का प्रस्ताव रखा गया था।
याचिकाकर्ता के अनुसार, इस फैसले में वहां मौजूद पेड़ों, प्राकृतिक आवास, या उस इलाके के जंगलों और वन्यजीवों से जुड़े पुराने रिकॉर्ड पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ता ने सक्षम वन और वन्यजीव अधिकारियों की मदद से इस जगह का नए सिरे से आकलन कराने की भी मांग की है। अदालत से आग्रह किया गया है कि वह इस बात पर विचार करे कि क्या इस जमीन को 'संरक्षण रिजर्व' (कंजर्वेशन रिजर्व), 'संरक्षित क्षेत्र' (प्रोटेक्टेड एरिया), या किसी अन्य उपयुक्त कानूनी सुरक्षा श्रेणी के अंतर्गत लाया जा सकता है।
संरक्षित वन्यजीव प्रजातियों को लेकर चिंता
याचिकाकर्ता का दावा है कि सरकारी जमीन पर पुराने पेड़ हैं और यह 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' की अनुसूची-I के तहत संरक्षित एक प्रजाति का आवास है।
इसके आधार पर, याचिका में मांग की गई है कि इस इलाके को 'ग्रीन स्पेस' (हरित क्षेत्र) और प्राकृतिक आवास के रूप में संरक्षित रखा जाए, न कि यहां ऐसा कोई विकास कार्य होने दिया जाए जिससे इसके पारिस्थितिक महत्व को नुकसान पहुंचे।
इस मामले ने पर्यावरण संरक्षण, पुराने पेड़ों को बचाने और वन्यजीव आवासों के संरक्षण को लेकर चिंताओं के बीच प्रस्तावित स्टेडियम परियोजना को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अब सबकी नजरें 28 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जब पंजाब सरकार के हलफनामे पर विचार किए जाने की उम्मीद है और हाई कोर्ट इस मामले पर आगे कोई रुख अपना सकता है।
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