झोटा हत्याकांड: एक्शन कमिटी ने CM मान और पंजाब DGP के इस्तीफे के साथ-साथ CBI जांच की मांग की
बाबूशाही ब्यूरो
मानसा (पंजाब), 18 अक्टूबर, 2026: 'शहीद भाई परविंदर सिंह झोटा इंसाफ मोर्चा' ने एक कड़े शब्दों वाला पत्र जारी कर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव के इस्तीफे की मांग की है। यह मांग मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में की गई है।
एक्शन कमिटी ने इस हत्याकांड की CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) से जांच कराने की भी मांग की है। साथ ही, कमिटी का आरोप है कि पंजाब में नशा तस्करों, पुलिसकर्मियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच एक मिलीभगत (नेक्सस) है।
13 अक्टूबर, 2026 को परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि वह एक मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाओं की बिक्री का विरोध करने गए थे। कमिटी का दावा है कि इस घटना को पूरे पंजाब के लोगों ने फेसबुक लाइव के जरिए देखा था।
पत्र में, मोर्चे ने सरकार पर आरोप लगाया कि शुरुआत में इस हत्या को 'आपसी रंजिश' का मामला बताया गया, जिससे असल परिस्थितियों से ध्यान भटकाने की कोशिश की गई। ये आरोप कमिटी द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
कमिटी का कहना है कि नशों के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति की हत्या के मामले में, चुने हुए जनप्रतिनिधियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे सरकार से जवाबदेही मांगें। कमिटी ने इस मुद्दे पर विधायकों की 'चुप्पी' की आलोचना की है।
एक्शन कमिटी की मुख्य मांगें
मोर्चे ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं:
घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री और पंजाब DGP का इस्तीफा।
हत्याकांड और नशा तस्करों, पुलिस तथा राजनेताओं के बीच कथित मिलीभगत की CBI जांच।
परिवार की सहमति से, चंडीगढ़ के PGIMER (पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) में वरिष्ठ डॉक्टरों के एक पैनल द्वारा शव का पोस्टमार्टम।
मानसा के दो स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO), पुलिस उपाधीक्षक (DSP) और संबंधित ड्रग इंस्पेक्टर को बर्खास्त करना।
उस मेडिकल स्टोर पर झोटा की प्रतिमा स्थापित करना, जहां उनकी गोली मारकर हत्या की गई थी। उनके नाम पर खियाला कलां में एक ट्रॉमा सेंटर की स्थापना।
आरोपियों पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाए और दोषी पाए जाने पर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
घटना में घायल हुए लोगों का किसी उच्च-स्तरीय चिकित्सा संस्थान में सरकारी खर्च पर इलाज कराया जाए।
पत्र में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है और अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
ये मांगें एक्शन कमिटी के रुख को दर्शाती हैं। इन मांगों पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया रही, इसके बारे में उपलब्ध सामग्री में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
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