देवभूमि कुल्लू एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के रंगों में रंगने जा रही है। सात दिन तक चलने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन में जहां 347 देवी-देवताओं की उपस्थिति देव आस्था और परंपराओं की भव्यता का अहसास कराएगी, वहीं पहली बार होने वाले ड्रोन और लेजर शो आसमान को रोशनी से सजाएंगे। दस देशों के सांस्कृतिक दलों के नृत्य, देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और बॉलीवुड-पंजाबी संगीत की महफिलें इस बार के उत्सव को खास बनाएंगी।
21 से 27 अक्तूबर तक ढालपुर मैदान में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव-2026 की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उत्सव का शुभारंभ 21 अक्तूबर को राज्यपाल करेंगे। वह भगवान रघुनाथ जी की ऐतिहासिक रथयात्रा में भी शामिल होंगे। 26 अक्तूबर को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस बार उत्सव की खासियत यह है कि पारंपरिक देव संस्कृति के साथ अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आधुनिक तकनीक का मेल देखने को मिलेगा। रथ मैदान में 22, 24 और 26 अक्तूबर को ड्रोन और लेजर शो आयोजित किए जाएंगे। वहीं, लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में सातों दिन सांस्कृतिक संध्याएं सजेंगी।
आसमान में रोशनी, मंच पर दुनिया भर की संस्कृति
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में पहली बार आयोजित होने वाले ड्रोन और लेजर शो दर्शकों के लिए नया आकर्षण होंगे। 22, 24 और 26 अक्तूबर को रथ मैदान में होने वाले इन कार्यक्रमों के जरिए रोशनी और दृश्य संयोजन का विशेष अनुभव मिलेगा। इससे उत्सव की शामों में आधुनिक तकनीक का नया रंग जुड़ेगा। दूसरी ओर, ग्लोबल डांस कार्यक्रम में इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका, रूस, थाईलैंड, मलेशिया, मिस्र, श्रीलंका और नेपाल के सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे। हिमाचल प्रदेश के कलाकारों के साथ लद्दाख, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान, केरल और मणिपुर की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी।
कुल्लू की पारंपरिक धुनों पर विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियां इस आयोजन को एक अलग पहचान देंगी। उत्सव के माध्यम से स्थानीय लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा, वहीं दर्शकों को दुनिया के विभिन्न देशों की नृत्य शैलियों और सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
सुंदर सिंह ठाकुर बोले- देव आस्था और परंपराएं सर्वोपरि
कुल्लू के विधायक एवं अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह ठाकुर ने मंगलवार को कुल्लू में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि देवभूमि की धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उत्सव में आधुनिक आकर्षणों के साथ देव संस्कृति की गरिमा और धार्मिक मर्यादाओं का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 347 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है। उनके आगमन, ठहराव, धार्मिक गतिविधियों और उनके साथ आने वाले देवलुओं व कारकूनों की सुविधा के लिए आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। देव समाज की भावनाओं का सम्मान और सदियों पुरानी परंपराओं के अनुरूप आयोजन समिति की प्राथमिकता है।
सुंदर सिंह ठाकुर ने स्पष्ट किया कि 21 से 27 अक्तूबर तक ढालपुर मैदान में रेहड़ी-फहड़ियां लगाने की अनुमति नहीं होगी। इसका उद्देश्य देव गतिविधियों में बाधा रोकना और धार्मिक आयोजन की पारंपरिक गरिमा बनाए रखना है। उन्होंने स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से उत्सव के सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन में सहयोग देने की अपील की। इस अवसर पर उपायुक्त एवं उत्सव समिति के उपाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार शर्मा और पुलिस अधीक्षक अभिषेक एस. भी उपस्थित रहे।
10 देशों के कलाकारों के साथ भारतीय लोक कलाओं की झलक
ग्लोबल डांस के कार्यक्रम तीन प्रमुख तारीखों पर आयोजित होंगे। इनमें अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक दलों के साथ भारतीय राज्यों के कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। सातों दिन अलग-अलग संगीत शैलियों की प्रस्तुतियां दर्शकों को आकर्षित करेंगी। हिमाचली लोक गायकों के साथ लोकप्रिय पंजाबी और सूफी कलाकारों की मौजूदगी से सांस्कृतिक संध्याओं में विविधता रहेगी।
22 अक्तूबर: इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका और रूस के सांस्कृतिक दल प्रस्तुति देंगे। हिमाचल प्रदेश की एलएसी टुकड़ी और लद्दाख के प्रतिभागी भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।
24 अक्तूबर: इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका, थाईलैंड, मलेशिया, मिस्र, श्रीलंका और नेपाल के कलाकार अपनी संस्कृति की झलक दिखाएंगे। भारतीय प्रस्तुतियों में हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान, केरल की कथकली और मणिपुर के कलाकार शामिल होंगे। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के दो विद्यार्थी दल भी भाग लेंगे।
26 अक्तूबर: नौ अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक दलों के साथ आईसीसीआर के विद्यार्थी दल प्रस्तुतियां देंगे। हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के कलाकार भी अपनी लोक कलाओं और पारंपरिक नृत्यों से दर्शकों को परिचित करवाएंगे। इन प्रस्तुतियों के जरिए ढालपुर में विभिन्न देशों और भारतीय राज्यों की सांस्कृतिक विविधता देखने को मिलेगी। यह आयोजन कुल्लू दशहरा की अंतरराष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई दिशा देने का प्रयास है।
सतिंदर सरताज से सलमान अली तक, सजेगी सुरों की महफिल
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा की सांस्कृतिक संध्याओं में इस बार हिमाचली लोक संगीत, पंजाबी गीतों, सूफी गायन और बैंड प्रस्तुतियों का मिश्रण देखने को मिलेगा। लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में प्रतिदिन होने वाले कार्यक्रमों में कई लोकप्रिय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
21 अक्तूबर: ममता जोशी, राजीव राजा, युग्म हिमालय रूट और अभिज्ञा बैंड।
22 अक्तूबर: सलमान अली के साथ दिव्या श्रीवास्तव, आयुष, पंकज डोगरा और बीरबल किन्नौरा।
23 अक्तूबर: पंजाबी गायक काका के साथ कुमार साहिल, अजय चौहान और हिमाचली लोक गायक सुनील राणा।
24 अक्तूबर: कुलदीप शर्मा, तत्त्वा बैंड और पुलिस बैंड 'फीट ऑफ फायर'।
25 अक्तूबर: रोहनप्रीत सिंह के साथ रमेश ठाकुर, अनुज शर्मा और लमन बैंड।
26 अक्तूबर: सूफी गायक सतिंदर सरताज के साथ इंदरजीत और फिरदौस बैंड।
27 अक्तूबर: ठाकुर दास राठी, कुशल वर्मा और खुशबू सहित अन्य लोक कलाकार।
महिला मंडलों को मंच, खेलों को भी मिलेगी जगह
उत्सव के अंतर्गत कुल्लू कार्निवाल में स्थानीय महिला मंडल भी भाग लेंगे। इनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को मंच मिलेगा। महिला मंडलों की सहभागिता स्थानीय सांस्कृतिक प्रतिभाओं को सामने लाने का अवसर बनेगी। धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ग्रामीण खेलों तथा राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं को भी उत्सव में स्थान दिया गया है। इससे आयोजन में खेल, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता के विभिन्न आयाम शामिल होंगे।
सात दिन ढालपुर में व्यवस्थाओं पर भी रहेगी नजर
बड़ी संख्या में देवी-देवताओं, देवलुओं, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने के मद्देनजर सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता और आवागमन की व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी। उत्सव समिति और संबंधित विभागों के सामने आयोजन को सुचारू बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी। ढालपुर मैदान में 21 से 27 अक्तूबर तक रेहड़ी-फहड़ियां नहीं लगेंगी। प्रशासन का जोर धार्मिक गतिविधियों के लिए व्यवस्थित स्थान उपलब्ध करवाने और लोगों की आवाजाही को सुचारू रखने पर रहेगा।
इस तरह अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा-2026 में एक ओर भगवान रघुनाथ की रथयात्रा और देवी-देवताओं की उपस्थिति से देव परंपराओं की झलक मिलेगी, तो दूसरी ओर वैश्विक नृत्य, लोकप्रिय कलाकारों की प्रस्तुतियां और पहली बार होने वाले ड्रोन-लेजर शो उत्सव के आधुनिक आकर्षण बनेंगे। देव आस्था, लोक संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता का यह मेल सात दिनों तक कुल्लू को सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनाएगा। (SBP)
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