हिमाचल के कर्मचारियों को मिलेगा पांच किस्तों का एरियर? हाईकोर्ट ने सरकार को दिया 6 हफ्ते का अल्टीमेटम
एक जुलाई 2022 से लंबित महंगाई भत्ते की किस्तों और बकाये पर सरकार को करना होगा फैसला, पात्र पाए जाने पर तय अवधि में भुगतान के भी निर्देश
बाबूशाही ब्यूरो
शिमला: 30 अक्टूबर 2026 : हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये का मामला एक बार फिर चर्चा में है। पांच लंबित किस्तों और एरियर की मांग पर प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित सक्षम अधिकारियों को छह सप्ताह के भीतर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में कर्मचारियों की निगाहें अब सरकार के निर्णय पर टिक गई हैं कि लंबे समय से लंबित दावे पर क्या रुख अपनाया जाता है। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने कर्मचारियों की ओर से दायर आठ रिट याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। मामला एक जुलाई 2022 से देय महंगाई भत्ते की पांच लंबित किस्तों और उनसे जुड़े एरियर की मांग से संबंधित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और संबंधित सक्षम अधिकारी कर्मचारियों की ओर से सौंपे गए अभ्यावेदनों पर कानून और संबंधित सरकारी कार्यालय ज्ञापनों के अनुसार छह सप्ताह के भीतर निर्णय लें। अधिकारियों को अपने निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ताओं को भी देनी होगी।
पात्र हुए तो छह सप्ताह में करना होगा भुगतान
हाईकोर्ट ने केवल अभ्यावेदनों पर निर्णय लेने तक ही निर्देश सीमित नहीं रखे हैं। अदालत ने कहा है कि यदि जांच और नियमानुसार विचार के बाद याचिकाकर्ता अपने दावे के अनुसार डीए की लंबित किस्तों और एरियर के पात्र पाए जाते हैं, तो उनका भुगतान भी निर्धारित छह सप्ताह की अवधि के भीतर किया जाए। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर कर्मचारियों के दावों की पात्रता पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। यानी कर्मचारियों को एरियर मिलेगा या नहीं, इसका अंतिम निर्णय संबंधित अधिकारियों को नियमों के अनुसार लेना है।
जुलाई 2022 से बकाये का दावा, क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि सरकार के दो मार्च 2024, 16 अक्तूबर 2024 और 15 अक्तूबर 2025 के विभिन्न कार्यालय ज्ञापनों के तहत वे एक जुलाई 2022 से महंगाई भत्ते के बकाये के हकदार हैं, लेकिन उन्हें अब तक यह राशि जारी नहीं की गई। कर्मचारियों ने अपनी मांग को लेकर 18 मई 2026 को सक्षम अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन भी सौंपे थे। लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि ये अभ्यावेदन लंबित थे। इसी के बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निश्चित समयसीमा के भीतर कर्मचारियों की मांग पर फैसला लेने का निर्देश दिया।
कर्मचारियों ने क्यों उठाया भेदभाव का मुद्दा?
याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलीलों में भेदभाव का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि सरकार की 10 अक्तूबर 2024 और 3 मार्च 2026 की अधिसूचनाओं के तहत राज्य सरकार के कर्मचारियों की एक विशेष श्रेणी को देय तिथियों से केंद्र सरकार की दरों पर महंगाई भत्ता प्रदान किया गया है। ऐसे में उन्होंने अपने मामले में भी समान आधार पर लाभ दिए जाने की मांग उठाई। यह कर्मचारियों की ओर से अदालत में रखी गई दलील थी। इस पर अदालत ने पात्रता का अंतिम निर्णय नहीं दिया, बल्कि संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार अभ्यावेदनों पर विचार करने के निर्देश दिए।
आठ याचिकाओं का एक साथ निपटारा
संदीप कुमार और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में डीए की लंबित किस्तों और एरियर का मुद्दा उठाया गया था। हाईकोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए सरकार के लिए छह सप्ताह की समयसीमा तय की। अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या सरकार कर्मचारियों की मांग स्वीकार करती है और पात्रता तय होने के बाद कितना बकाया जारी किया जाता है। फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश कर्मचारियों के दावे पर समयबद्ध निर्णय का निर्देश है, सभी कर्मचारियों के लिए एरियर मंजूर होने का आदेश नहीं। (SBP)
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