बेटी की आंखों में आंसू देख पिघला मुख्यमंत्री का दिल, 550 किलोमीटर दूर तैनात मां का 24 घंटे में तबादला
पांचवीं कक्षा की वंशिका ने सीएम सुक्खू से लगाई थी गुहार, मां से तीन साल की दूरी और पढ़ाई की परेशानी बताकर भावुक हुई बच्ची; नेरवा से तीसा पहुंचीं शिक्षिका नारो देवी
Babushahi Bureau
चंबा: 06 November 2026 : मां से दूर रहने का दर्द कितना गहरा होता है, यह पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छोटी बच्ची की आंखों में साफ नजर आ रहा था। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के सामने पहुंची वंशिका अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाई। मां से मिलने की चाह में उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उसने मुख्यमंत्री से बस इतनी सी गुजारिश की कि उसकी मां को घर के नजदीक तैनात कर दिया जाए, ताकि उसे अपनी मां से दूर न रहना पड़े। बच्ची की यह भावुक अपील केवल एक पारिवारिक परेशानी नहीं थी, बल्कि उन परिवारों की पीड़ा भी सामने लेकर आई, जहां सरकारी नौकरी की वजह से माता-पिता और बच्चे लंबे समय तक एक-दूसरे से दूर रहने को मजबूर हैं। वंशिका की बात मुख्यमंत्री सुक्खू तक पहुंची तो उन्होंने उसे आश्वासन दिया। खास बात यह रही कि यह आश्वासन महज औपचारिकता बनकर नहीं रह गया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने अगले ही दिन बच्ची की मां का तबादला आदेश जारी कर दिया।
अब वंशिका की मां नारो देवी शिमला जिले के नेरवा से चंबा जिले के तीसा शिक्षा खंड में पहुंच गई हैं। करीब 700 किलोमीटर की दूरी पर तैनाती के कारण मां-बेटी के बीच जो फासला बना हुआ था, उसे कम करने की दिशा में सरकार ने कदम उठाया है।
मां से दूर रहकर पढ़ाई करना हो रहा था मुश्किल
यह पूरा मामला मुख्यमंत्री के चुराह विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान सामने आया। सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री देहग्रां पहुंचे थे। इसी दौरान पांचवीं कक्षा की छात्रा वंशिका उनसे मिली और अपनी परेशानी बताई। वंशिका की मां नारो देवी जेबीटी अध्यापिका हैं। उनकी तैनाती शिमला जिले के नेरवा स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला सोबल में थी। वह पिछले करीब तीन वर्षों से वहां सेवाएं दे रही थीं। दूसरी ओर परिवार चंबा जिले में रहता है। नौकरी और घर के बीच लगभग 700 किलोमीटर की दूरी होने के कारण परिवार को अलग-अलग रहना पड़ रहा था। वंशिका चौथी कक्षा तक अपनी मां के साथ रहती थी, लेकिन पांचवीं कक्षा में दाखिला लेने के बाद उसे घर के नजदीक रहकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। ऐसे में मां से अलग रहने की स्थिति उसके लिए भावनात्मक रूप से काफी कठिन हो गई। बच्ची ने मुख्यमंत्री को बताया कि वह जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रवेश की तैयारी भी कर रही है। पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी और मां से दूरी के बीच तालमेल बैठाना उसके लिए आसान नहीं था। उसे मां की मौजूदगी की कमी लगातार महसूस हो रही थी।
मुख्यमंत्री से लिपटकर रो पड़ी वंशिका
मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखते हुए वंशिका भावुक हो गई। उसने मां को घर के पास बुलाने की गुहार लगाई। बच्ची की परेशानी सुनकर मुख्यमंत्री ने उसे स्नेहपूर्वक संभाला और उसकी पूरी बात सुनी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए और वंशिका को भरोसा दिलाया कि उसकी मां की तैनाती घर के नजदीक करवाने का प्रयास किया जाएगा। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षिका नारो देवी से भी बातचीत कर उनकी परिस्थितियों की जानकारी ली। इसके बाद विभागीय स्तर पर तबादले की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
24 घंटे में जारी हो गया तबादला आदेश
बच्ची की फरियाद के बाद शिक्षा निदेशालय ने वीरवार को नारो देवी के तबादले के आदेश जारी कर दिए। उन्हें शिमला जिले के राजकीय प्राथमिक पाठशाला सोबल, नेरवा से चंबा जिले के राजकीय प्राथमिक पाठशाला चांद्रू, शिक्षा खंड तीसा में स्थानांतरित किया गया है। यह तबादला सरकार की पांच प्रतिशत स्थानांतरण नीति के तहत किया गया है। इसके माध्यम से विशेष परिस्थितियों में निर्धारित सीमा के भीतर शिक्षकों के अंतर-जिला तबादले किए जा सकते हैं। शिक्षा विभाग के आदेश के साथ ही वंशिका और उसके परिवार को लंबे समय से चली आ रही परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। अब मां की तैनाती घर के नजदीक होने से बच्ची को मां का साथ मिल सकेगा।
शिक्षा व्यवस्था के बीच परिवार की पीड़ा भी आई सामने
इस मामले का एक दूसरा पहलू भी है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती और तबादलों की व्यवस्था के बीच कई बार ऐसे परिवारों को लंबी दूरी का दर्द झेलना पड़ता है। खासकर अंतर-जिला कैडर में सेवाएं देने वाले शिक्षकों के लिए एक जिले से दूसरे जिले में तबादला करवाना आसान नहीं होता। प्रदेश में शैक्षणिक सत्र के बीच शिक्षकों के तबादलों पर प्रतिबंध रहता है। जेबीटी शिक्षकों के अंतर-जिला तबादले भी सामान्यत: कठिन प्रक्रिया माने जाते हैं, क्योंकि उनका कैडर जिला स्तर का होता है। ऐसे मामलों में पांच प्रतिशत विशेष स्थानांतरण कोटे के तहत सरकार को निर्णय लेने का अधिकार है। वंशिका का मामला भी इसी विशेष व्यवस्था के तहत आगे बढ़ा। हालांकि इस घटना ने एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा किया है कि क्या दूरदराज क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों के लिए पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था और अधिक प्रभावी बनाई जा सकती है?
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम की सबसे सुखद तस्वीर एक छोटी बच्ची की है, जिसकी गुहार पर उसकी मां की तैनाती घर के नजदीक हो गई। वंशिका के लिए यह केवल एक तबादला आदेश नहीं, बल्कि मां के साथ फिर से समय बिताने और अपनी पढ़ाई को बेहतर ढंग से आगे बढ़ाने की उम्मीद है। एक बच्ची की छोटी सी फरियाद ने यह दिखा दिया कि कई बार सरकारी फाइलों के पीछे छिपी मानवीय संवेदनाओं को समझना भी उतना ही जरूरी है, जितना प्रशासनिक नियमों का पालन करना। (SBP)
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